Sunday, June 5, 2011

दिल्ली के ठग

जनाब,
दिल्ली का ठग नाम से एक पिक्चर आई  थी १९५८ में कलाकार थे, किशोर   कुमार  और नूतन .अब इसका      री मेक बना है ४ जून २०११ में .फिल्म का एक टेलर अप्रेल २०११ को भी हुआ था जंतर मंतर में  जिसमे अन्ना   हजारे ने हीरो प्ले किया ,परन्तु  जब दिल्ली के राम लीला मैदान में योग गुरु राम देव  के नेतृत्व में देश दुनिया से आए हुए लोगो को लेकर काले धन के खिलाफ भक्तो की अपार भीड़ के साथ   पिक्चर  शुरू हुई तो दिल्ली के ठगों जो बिहार ,बंगाल पंजाब तमिलनाडु इत्यादि के साथ दिल्ली में आ मंत्री बन बैठे है  का भी दिल मुश्किल  में पड गया ,हालांकि बाबा के ३ जून को हवाई जहाज से उतरते ही  दिल्ली के ठगों    ने बाबा को हैंडिल करने की कोशिश की और जब हैंडिल नहीं हुए तो मैन-हैंडल कर दिया . नतीजतन राम देव के खिलाफ कपिल सिब्बल का  विलेन प्ले सबके सामने आगया .

कहते है की जब रोम जल रहा था तो वहां का  राजा  नीरो बंसी बजा रहा  था , (यहाँ सोनिया चैन की बंसी बजा रही है लगता है रोम वाले ऐसे ही होते है) मुझे नहीं पता की जब दिल्ली के राम लीला मैदान में लाठिया चल रही थी तो इस महान    लोकतान्त्रिक देश का प्रधान मंत्री कहाँ चैन की नींद सो रहा था और देश का गृह  मंत्री कहाँ कपड़े    बदल रहा था अथवा ठगी का प्लान बना रहा  था, क्योंकि कार्यवाही रात में एक बजे शुरू हुयी लेकिन  ९ बजे सुबह तक केवल दिग्विजय सिंह जो ओसामा को ओसामा जी कहते हैं,अफ्जलं गुरु को फांसी न होने पाए इसके लिए तरह -तरह के बयान देते है,आजमगढ़ जा कर आतंक वादियो को विश्वास दिलाते है की उनके रहते उन्हें चिंता की जरुरत नहीं , वोह सबसे पहले करोडो लोगो के पूज्य एवं श्रद्धा के पात्र   स्वामी को ठग कहते और उनकी संपत्ति की जाँच की मांग करते हुए नजर आए . अब मुझे समझ आरहा है की खून के रिश्ते कितने असर कारक होते हैं .

इतिहास में पढ़ा था की अंग्रेजो के साम्राज्य में  सूरज कभी डूबता नहीं था.अंग्रेज अभी भी निश्चिन्त रह सकते है की उनका सूरज कम -से - कम भारत में अभी डूबा नहीं है .बेशक चमड़ी का रंग कुछ श्यामल हुआ हो और शक्ले हिन्दुस्तानियो जैसे लगती हो पर जून ७४ का आपातकाल और आज दिल्ली के राम लीला मैदान ने फिर याद दिला दिया है की जलिया  वाला बाग़ में गोली चाहे इंग्लैण्ड से आये हुए जनरल डायेर ने चलवाई हो ,लेकिन अब जनरल जैसो को इंग्लॅण्ड से आने की जरुरत नहीं पिछले ६० वर्षो में अब हम अब हमारा देश इतना समर्थ(self sufficient) हो गया है की हमने अंग्रेजो की पूरी नस्ल यही पैदा करनी शुरू कर दी है. 

वैसे ठगने की घटनाये अतीत में भी हुई है मसलन सावित्री के पति सत्यवान की जान ले कर जब यमराज जा रहे थे तो सावित्री ने एक ऐसा वरदान मांग लिया जिसको देने के बाद यमराज अपने को ठगा महसूस करने लगे परन्तु वरदान देने का बाद उसका पालन करने हेतु उन्हें सत्यवान को जिन्दा करना पड़ा. ऐसी ही योजना बाबा रामदेव ने भी बनाई थी ,लेकिन इस बार मामला उल्टा पड़ गया .अब आप ही बताइए की अपने डेथ वारंट पर बाबा के कहने से कोई कैसे साइन कर सकता है .जरा गंभीर मसला है सो ध्यान से समझना होगा . विदेशो में जमा धन ८० फीसदी नेताओ का है और २० फीसदी व्यापारियो का .बात ये है की व्यापारी अपने पैसे को  आइडल यानि अन प्रोडक्टिव  नहीं रखता , उसके पास काले धन को इन्वेस्ट करने के मौके है इसलिए उसको इन्वेस्ट  कर वोह उससे और धन पैदा करता है ,जबकि आम तौर पर  नेताओ के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होती और थोडा बहुत अपने विश्वाशपात्रो की मदद से इन्वेस्ट करने के अलावा धन को सुरक्षित जगहों (Tax haven) पर जमा करना उनकी मज़बूरी है .हर रोज डील पर डील होती है और पैसे का जेनेरेशन  लगातार होता है ,अब बाबा कहते है की ऐसा विधान बना दो की पैसा राष्ट्रीय सम्पति घोषित हो जाये और ऐसा करने वालो को मृत्यु दंड अथवा आजीवन कारावास मिले, एक बार को तो सरकार भुलावे में आ ही गयी थी और ऐसा दिखावा किया की मानो वोह समझ  नहीं पाई  और बाबा ने भी ९० प्रतिशत बातें सरकार ने  मानली है ऐसी  घोषणा भी कर दी , दरअसल ये यह छोटे ठग पर बड़े का दावं था  .सरकार ने सोचा की एक बार ऐसा दिखाने से कि बाबा की सारी मांगे मान ली है बाबा का अनशन  ख़तम हो जायेगा लोग चले जाएँगे और फिर बात ख़तम . लेकिन बाबा शातिर निकल गया उन्हें ये बात समझ आगई  और उन्होंने चिठ्ठी से मानने से मना कर दिया और कहा कि विधान लाओ , जैसा की अन्ना ने भी सावधान किया था , तब सरकार में बैठे ठगों को लगा की बाबा को ठगना आसान नहीं है तो फिर आगे वही किया सरकार ने जो होना चाहिए था अर्थात सोते हुए निहथ्थे लोगो को डंडा ,लाठी और गोली के द्वारा डरा धमका कर आम लोगो लो भगा दिया और बाबा के खिलाफ  तड़ी - पार के आदेश कर दिए गए तथा १५ दिन दिल्ली में बाबा के  प्रवेश पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है . जो सरकार देशद्रोहियो को बिरयानी खिलाने के लिए जिन्दा भी रखती है और पास भी ,उसी सरकार को बाबा के दिल्ली में रहने पर खतरा महसूस होता है .बात सिंपल है  जिस दिल्ली में बड़े -बड़े ठग रहते हो वहां छोटे ठगों का प्रवेश वर्जित होना ही चाहिए ,तभी दिल्ली का अंतर्राष्ट्रीय स्टैण्डर्ड बनेगा. 
अभी लड़ाई जारी है .अब लड़ाई में दूसरे दलों के नेताओ ने जो थोड़े छोटे ठग है उन्होंने भी हाथ बटाने का निर्णय किया है .भाजपा के लोग राज घाट पर  गाँधी की समाधी पर अनशन करेंगे मुलायम और मायावती भी बाबा का लड़ाई में साथ देंगी यानि अब मोर और सांप एक डाली पर रहेंगे .और भी कई रणनीतिया  बनेगी देखना है की निर्णायक लड़ाई की बाजी किसके हाथ लगती है.

अजय सिंह "एकल"














Thursday, May 19, 2011

मुंबई मे छोरा,पाकिस्तान मे ढिंढोरा .

  
दोस्तों, 
इसे कहते हैं सफलता ,इसे कहते है तेजी .भारत सरकार ने आखिरकार ५० ऐसे आतंकियो की सूची जारी कर दी जिनकी अरसे से देश को तलाश थी .जारी लिस्ट के कम से कम दो लोग पहले से ही हिंदुस्तान में थे. 

फिरोज अब्दुल खान नामक आतंकी पहले से ही भारत
 की जेल में बंद है और वजाहुल कमर खान नाम का  दूसरा आतंकी  जरा जेल के बाहर था और अपने परिवार के साथ मुंबई के पास में जिला ठाणे में रह रहा था ,और  बाकायदा अपनी अदालती तारीखों में पिछले कई वर्षो से अदालत में जा रहा था यानि पुलिस और अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज था .

अब लोग ये कह रहें है की गृह मंत्री चिदंबरम की गलती है और उनकी टीम नाकारा है , कल दबाव में उन्होंने भी यह कह दिया की चलो मानवीय गलती हो गए होगी  ,जब बड़े काम करने हो तो छोटी -मोटी गलती हो  ही जाती है.
पर मै तो कहता हूँ  इससे ज्यादा अच्छा क्या हो सकता है की  जिसे वोह  पाकिस्तान से लाना चाहते थे वो 
इनकी ही जेल मे बंद  था. राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने अपनी कविता चेतक मे राणा प्रताप के   प्रिय एवं स्वामिभक्त घोड़े का जिक्र कुछ यों किया है "राणा की पुतली फिरी नहीं तबतक चेतक मुड़ जाता था " उसी तरह अब हम निश्चिन्त  हो कर कह सकते है की गृह मंत्री  चिदम्बरम के हाथो में देश सुरक्षित है और उनकी टीम इतनी प्रतिभाशाली है की सूची जारी होने से पहले ही अपराधी जेल मे आ जाता है .वैसे फिल्म स्टार मनोज कुमार की  एक पिक्चर थी " दस नम्बरी"  उनका कहना भी यही था की ऊँगली देखते ही ताला खुल जाता था  और इशारा  पाते ही मॉल उधर का इधर हो जाता था वगैरा -वगैरा .तो भाई साहेब अब आपने देख लिया न चिदम्बरम की टीम के चेतक और दस नंबरियो की करामत इसलिए इसे अब उनकी गलती बताने के बजाये इसको राष्ट्रीय  अभिमान बताना चाहिए .और इनको हिंदुस्तान का प्रधान मंत्री बनाने के लिए प्रयास होना चाहिए .आप विश्वास कीजिये  पाकिस्तान और अमरीका मिलकर यह कर सकते है .आखिर जब इनके कहने पर दूसरे  मंत्री बन सकते है तो प्रधान मंत्री क्यों नहीं. और अब तो लादेन भी जिन्दा नहीं है अमरीका के मंसूबो को रोकने के लिए .हालाँकि अमरीका को पता है की मनमोहन कौन निर्णय अपने आप करते है वो भी तो हिंदुस्तान मे विदेशियो का ही हित साधते है नहीं तो कात्रोची कैसे छूट जाता और विदेशो मे जमा धन वापस लाने के लिए क्यों प्रयास नहीं किये जाते. इसे कहते है की मुंबई मे छोरा और पाकिस्तान मे ढिंढोरा .

राष्ट्रीय शर्म की बात तो राहुल गाँधी ने पहले ही मान ली  है भट्टा परसोल मे .राहुल का कहना है की ग्रेटर नॉएडा के भट्टा परसोल मे जितनी ज्यादती किसानो के साथ हुयी है इससे उन्हें अपने को  भारतीय कहने कहने मे शर्म आ रही है .मुझे थोडा भ्रम हो गया यह सुनकर .मैं सोंच में पद गया  की उन्हें  शर्म तब क्यों नहीं आई जब जैतपुर मे किसानो की उपजाऊ जमीन बिजली संयंत्र लगाने के लिए ली गयी , किसानो पर लाठी चलाई गयी और किसान मारे गए क्योंकि वहा प्रदेश मे सरकार कांग्रेस की है , और काग्रेस राज मे ये तो आम बात है दरअसल शर्म इस बात पर है की कांग्रेस के रहते किसानो की पिटाई और लूट का काम माया वती की पार्टी ने कैसे कर दिया .और उस पर तुर्रा यह १९ मई को प्रदेश सम्मलेन मे राहुल ने यह घोषणा भी कर दी की अब हम उत्तर प्रदेश के हर गाँव -गाँव मे वो करंगे जो ग्रेनो मे हुआ .मेरी तो रूह कॉप रही है राहुल की बात सुन कर.

कांग्रेस सम्मलेनके समापनमे सोनिया कहती है जिनके घर शीशे के
होवो दूसरो  पर पत्थर नहीं फेकते  है ,मुझे नहीं पता नहीं की वक्त पिक्चर मे यह 
 डायलाग जब बोला गया थातो उसका मतलब क्या रहा होगा पर इतना पक्का है इस डायलाग को राजनीतिज्ञ बखूबी इस्तेमाल कर रहे है और वो विरोधी पार्टी को यह ही बताना चाहते है की भाई न तुम मेरी कहो न मै तुम्हारी कहूँ , जनता का क्या वो तो है ही आम जनता जिसको आम की तरह चूस कर   राजनीतिज्ञ गुठली की तरह कभी भी फेंक सकते है ,इसलिए जब सत्ता मे तुम  हो तो तुम और जब मेरी बारी हो तो हम .अगर ऐसा नहीं होता तो अंतर्राष्टीय बाज़ार मे कच्चे तेल के दाम बढ़ने पर भी हमने  देश मे इलेक्शन ख़तम होने के पहले तेल के दाम बढ़ने नहीं दिया और इलेक्शन परणामो के २४ घंटे ख़तम होने के पहले दाम बढ़ा दिए और ये तो तब है जब हमने पेट्रोल की कीमतों पर से सरकार का नियंत्रण हटा दिया हैऔर तेल कंपनियो को दाम तय करने का अधिकार दे दिया है  . अब हम जनता की सोचे की अपने सत्ता मे रहने का जुगाड़ करे .जनता का क्या है थोड़े दिन मे भूल जाएगी वैसे भी हमने इतनी परेशानिया जनता के लिए खड़ी कर रखी है की वो उनको सुलझाने मे ही निपट जाएगी  .और फिर इलेक्शन मे तो अभी बहुत दिन है . इलेक्शन होगा तो फिर कोई लाली पाप थमा देंगे.लेकिन हम और तुम तो शीशे के घर मे है इसलिये पत्थर न फेके और न दूसरे को ऐसा करने को उकसाएँ नहीं तो जनता जान जाएगी हमारा  सच . 

अब इतना  सबकुछ जानने के बाद हम तो केवल ये ही कह सकते है की "बर्बाद गुलिश्ता (प्रदेश ) करने को बस एक ही उल्लू  काफी है ,अंजामे गुलिश्ता क्या होगा हर साख पर उल्लू बैठा है". इसको पढ़ कर आप बुरा न माने उल्लू लक्ष्मी की सवारी है और हर समझदार आदमी चाहता है की लक्ष्मी उसके पास रहे यानि सवारी करे.  



अजय सिंह "एकल"

Wednesday, May 11, 2011

वाह ओबामा,बाय ओसामा

दोस्तों,  
आखिर वो घड़ी आ ही गई जिसके इंतजार में बिचारे किल्टन की कुर्सी चली गई और ओबामा की जाते-जाते रह गई . ओसामा जी (दिग्विजय जी का संबोधन यही है) आखिर को मारे गए ,लेकिन ओसामा मरा वीरो की तरह ही ,एक  निहत्थे को मारने पूरी फ़ौज आई और मार कर अपने साथ ओसामा के बेटे को भी ले गई है(वैसे  डकैत भी यही करते है मरने के बाद लूट का माल साथ ले जाते है )   अमरीका ने मारे डर  के  ओबामा के मरने के फोटो तक सार्वजनिक नहीं किये है अब कौन जाने की मरा वही ओसामा है की कोई और .मैंने तो सुना है  की  बड़े आदमी  अपने साथ बहुत सारे हमशकल लोगो
 को साथ रखते है  ताकि दुनिया को धोखा दे सके (ये अलग बात है ही बिना धोखा दिए बड़ा बनना मुश्किल है   और अगर बन गए तो बने रहना मुश्किल है ) और ये पता ही नहीं चले  की  असली कौन है .भगवान जाने की असलियत क्या है लेकिन इतना तय है ओसामा के मरने के बाद भी अभी ओसामा का जिन  अमरीका को आसानी से जीने नहीं देगा ,अच्छा है अमेरिका     और किसी से तो डरने से रहा.

लेकिन इन सारी घटनाओ से कुछ बाते तो अब स्पष्ट ही है ,मसलन ओबामा जब भारत आये तो उनके भारत की पार्लियामेंट में दिए भाषण में ३६ बार तालिया बजी थी जिसमे  कम से कम तीन बार ओबामा ने अपने भाषण में गाँधी जी का नाम ले कर अपने को गाँधी ही नहीं बल्कि दक्षिण अफ्रीका के नेल्सन मंडेला ,जो की जाने माने गाँधी वादी है का भी फालोवर बता दिया था और हमारे लोगो ने उनकी इस बात को सुन कर के तरह -तरह से कशीदे काढने शुरू कर दिए. हम हिन्दुस्तानी तो मौके के इन्तजार में ही रहतेहै और जैसे ही मौका मिलता है ताकतवर ,पैसे वालो की तारीफ में लग जाते है और अपना फायदा ढूंढने  लगते है . नतीजा यह की आम  लोगो ने विश्वाश कर लिया की अब इतना बड़ा आदमी १० हजार  किलोमीटर चल कर कोई झूठ बोलने थोड़ी आयेगा ,मगर भाई ये तो राष्ट्रपति से ज्यादा सेल्स मैन निकल गया . गाँधी का नाम ले कर   लड़ाकू जहाज हिंदुस्तान को बेचने का सौदा किया, और दुनिया में  अहिंसा की बात करते करते मौका मिलते ही हिंसा कर गया .
गाँधी लेकिन अब हिंदुस्तान में भी गाँधी वादी कहाँ है? बस इज्जत बचा ली दिग्विजय सिंह जी ने. ओसामा को ओसामा जी कह कर और सिद्ध कर दिया की नफरत पापी के पापे करो न की पापी से . अब लोग चाहे जो भी कहे ,अगर दिग्विजय ऐसा नहीं करते तो दुनिया में लोग तो यही कहते की जब गाँधी के देश में ही कोई गाँधी वादी नहीं बचा तो फिर ओबामा का क्या वो तो है ही सेल्स मैन, अरे वो तो वही कहेगा जो खरीदार को पसंद हो इसलिए जब खरीदार गाँधी के देश का हो तो  गाँधी  की तारीफ करने में क्या हर्ज है .
हालाँकि दिग्विजय ने तो उसी दिन कह दिया था की ओसामा ने चाहे जो किया है ,कितना भी बड़ा आतंक वादी है लेकिन मरने के बाद तो उसकी अंतिम क्रिया उसके धर्म के हिसाब से ही होनी चाहिए,लेकिन उसदिन सारी दुनिया ओसामा के मरने की ख़ुशी मना रही थी तो टायमिंग गलत हो गई और लोगो ने ध्यान ही नहीं दिया ,इसलिए दुबारा ओसामा जी कह कर दुनिया का ध्यान खीचना  पड़ा .धन्यवाद दिग्विजय  सिंह जी    बड़ीसेबड़ी घटना होने पर भी अपने  कर्त्तव्य से न डिगने के लिए.

मै तो खैर वैसे भी आपकी और आपकी टीम की कर्त्तव्य शीलता का कायल हूँ, अब देखो न आखिर कसाब को पकडे जाने के ३ साल बाद भी आपकी  सरकार ने     क्या उसको मारा ,क्या उसको फांसी दी, हालाँकि विपक्ष के लोग तो पीछे पड़े है तरह -तरह के आरोप भी लगा रहे है ,मगर कोई मजाल की आप टस से मस हो जाये . अब आप ही बताइए जब नफरत पाप से करना है तो पापी को फाँसी क्यों दे .उलटे हम तो उसको वकील दे रहे है, जज बदल रहे है की शायद कोई  तो जज गाँधी वादी निकलेगा जो इसके कसूर को माफ़ कर देगा इस देश में .यही हमने अफजल गुरु के लिए भी किया है .रोज लाखो खर्च हो रहे है तो क्या हुआ , अब हम गाँधी के देश में पैदा हुए है, सोनिया गाँधी का नमक खा रहे है और ये ही हल रहा तो जल्दी ही राहुल गाँधी का नमक खाना पड़ेगा तो भइया अपनी CR क्यों ख़राब करवाएं पता नहीं कब नंबर आ जाये  मिनिस्टर बनने का .आखिर आदमी के भविष्य और त्रिया चरित्र का पता जब देवताओं को नहीं चलता तो मैं तो कांग्रेस का एक कार्यकर्ता मात्र हूँ ये पंगा मैं तो नहीं लूँगा .और गाँधी से जिसने पंगा लिया उन सबका हस्स्र क्या हुआ ,पानी देने वाला भी नहीं मिलता है जनाब .वायु यान से गिरने के बाद लाश तक नहीं मिलती सुभाष चन्द्र बोस से लेकर माधव राव सिंधिया  का उदाहरण सामने है .तो फिर काहे को शूरवीर बनना .पिता जी ने नाम दिग्विजय रख दिया तो इसका मतलब ये तो नहीं की गाँधी से पंगा लूँ ,इसलिये समझदार आदमी हूँ और समझदारी से काम करता हूँ. मुझे पता है की "एक साधे सब सधे ,सब साधे सब जाये ,रहिमन सींचे मूल  को फूले फले अघाए " इसलिए भैया मेरे तो गाँधी ही गाँधी दूसरो न कोई.


तो बस आप लोग भी समझ जाओ और समझ दारी दिखाओ ,गाँधी के नाम पर देश लूटना आसान है तो बस चुप चाप लूटे जाओ और कोई कुछ बोले तो उसको गाँधी का दुश्मन बता के गोडसे की जमात में खड़ा कर दो बस हो गई उसकी छुट्टी .एक बार गाँधी विरोधी  इमेज बना दो तो फिर जिन्दगी में इलेक्शन नहीं जीत सकता और कोई कहे कुछ भी  आखिर जीतने वाले लोग तो सब पार्टियो को ही चाहिए .

अंत में गाँधी बापू जिंदाबाद ,फिर कोई मरा तो देखेंगे की क्या बयान देना है,बयान    पार्टी को सूट करेगा    तो अधिकारिक मान लेना नहीं तो मुझे दो चार गाली दे लेना .

अजय सिंह "एकल"















Thursday, April 7, 2011

अकेला चना

 दोस्तों,

बचपन में  पढ़ा था की अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता ,पढने के बाद जिन्दगी  की  व्यस्तताओ में सोचने का मौका ही नहीं मिला की वास्तव में यह सही  था या नहीं ,परन्तु अन्ना हजारे के अनशन पर बैठने के बाद तो यह पक्का हो गया की चना जब भी भाड़ फोड़ेगा तो  वोह अकेला ही होगा .चाहे गाँधी हो ,विवेकानंद या सुभाष चन्द्र बोस सब अकेले ही चले थे घर से ,बस लोग मिलते गए काफिला बनता गया .

अन्ना की टीम के अरविन्द केजरीवाल  समय पूर्व अवकाश प्राप्त IRS अधिकारी है जिन्होंने भ्रस्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए सरकार की नौकरी छोड़ी ,श्रीमती किरण बेदी एक Ex.IPS अधिकारी है  और   ये उन हजारो-लाखो देशवाशियो की नुमाइंदगी अन्ना हजारे के आन्दोलन में कर रहे है जिन्होंने देश से भ्रष्टाचार ख़तम करने की मुहीम चलाई हुई है. इस आन्दोलन का परिणाम क्या निकलेगा ,भ्रस्टाचार ख़तम हो जायेगा  या नहीं यह तो समय बताएगा लेकिन इतना तो निश्चित है लोगो  का   आत्म विश्वाश बढेगा और भ्रस्टाचार के खिलाफ जागरूकता बढ़ेगी .इस से शायद कुछ नेताओ और अफसरों  की मरी हुई आत्माए भी जी उठे .


एक बात और जो निश्चित रूप से होने वाली है वोह यह की जो लोग सोचते थे की भगत सिंह पडोसी के यहाँ पैदा हो तो ठीक है उन्हें पता चलेगा की अब भगत   सिंह उनके घर में ही जन्म ले चुके है .जिस उत्साह  से विद्यार्थी और दुसरे यंग प्रोफेसनल इस  आन्दोलन में सक्रीएता से  भाग ले रहे है उस से तो यही लग रहा है .


हांलाकि अन्ना, गाँधी की तरह न तो पढ़े लिखे है और न ही उतने अमीर परिवार से है लेकिन जिस साफगोई से बात कहते है और दलील देते है वोह निश्चित ही काबिले तारीफ है .उनकी यह कमजोरी ही उनकी ताकत भी है जो आन्दोलन को आम आदमी से जोड़ने में समर्थ हुई है. 


भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुए    इस आन्दोलन और आजादी के आन्दोलन की तुलना करने पर ऐसा लगता है की यह आन्दोलन ज्यादा  मुश्किल है क्योकि यहाँ पक्ष और विपक्ष दोनों में अपने ही लोग है और वोह कब अपने रिश्तेदार की तरफ से छद्म वकालत शुरू करदेंगे  और कब  पहचाना जायेंगे  और जब तक पहचान में आए तब तक   कितना नुकसान करेंगे  इसका पूर्व अनुमान लगाना  मुश्किल  है . लेकिन खैर यह गणित तो उन लोगो के लिए है जो दर्शक है या विचारक है ,जो योद्धा होते है उन्हें तो लड़ने से फुर्सत ही  तब मिलती है या तो जब जीत  जाते है या हार जाते है . 


स्वतंत्रता आन्दोलन के बाद जय प्रकाश नारायण के आन्दोलन ने जिस तरह युवाओं को आंदोलित किया था अन्ना के भ्रष्टचार विरोधी आन्दोलन का प्रभाव उस से कम नहीं है .एक बात जो दोनों में कामन  है वोह है काग्रेस का गाँधी परिवार .उस आन्दोलन में इन्द्रा गाँधी शीर्ष पर थी और इसमें सोनिया गाँधी है ,उसमे ढिल्लो जैसे लोग इन्द्रा को इंडिया बताते थे तो इसमें स्वयं मनमोहनसिंह जी कुछ उसी सुर में गुणगान करते है और सोनिया तो क्या राहुल के लिए कुर्सी छोड़ने की घोषणा प्रेस कान्फेरेंस में कर रहे है .


खैर हम   भारत वासी अब चाहे भारत में   रहते है या फिर   दुनिया   में कही  और , सब इस आन्दोलन से मानसिक और शारीरिक रूप से जुड़ गए है ,और ये  इस धरती  की ताकत ही है  जो "सत्यमेव  जयते " का घोष करती है  अत: इसका इस आन्दोलन का  परिणाम भी अच्छा होगा सच जीतेगा और ये ही देश हित में होगा ,जन हित में होगा ऐसा  हम सब का विश्वास है.


भारत माता की जय 


अजय  सिंह"एकल"  

Saturday, April 2, 2011

बलि हारी गुरु आपने....

दोस्तो,ं
 दरअसल क्रिकेट के बारे में मेरा ज्ञान भी किसी आम भारतीयों  के जैसा ही है.इसलिए  जब भी  क्रिकेट का  जिक्र होता है  तो सचिन तेंदुलकर ,महेंद्र सिंह धोनी और दूसरे टीम मेम्बर का ही नाम ध्यान आता था.आज फ़ाइनल मैच में पहेली बार साउथ अफ्रीका के क्रिकेट खिलाडी और भारतीय टीम के कोच और     गुरु गैरी क्रिस्टन का नाम आया तो पता चला की सक्षम गुरु क्या नहीं करवा सकता है .परदे के पीछे रह कर बिना किसी लालच के गैर्री आपने जो काम किया है हम भारतीय आपके आभारी है और आने वाले अनेक वर्षो तक आपका गुण गान करते रहेंगे .

२८ साल के बाद भारत को यह गौरव  शील जीत हासिल हुई है भारत के १२१ करोड़ लोगो की तरफ से भारतीय टीम को बधाई  तथा कोच एवं गुरु गैरी का धन्यवाद .


मै तो केवल यह कहूँगा

गुरु गोविन्द दोनों      खड़े काके लागों पाएं
बलि हारी गैरी आपने वर्ड कप दिओ जिताय.

अनेक बधाई भारत को ,भारतीयों को और टीम भारत को ,

अजय सिंह "एकल"

Friday, March 18, 2011

बुरा ना मानो ...

खींचो न कमानों को, न तलवार निकालो
जब तोप मुकाबिल हो, तो अख़बार  निकालो
                                                        ~   अकबर इलाहाबादी


दोस्तों,
वो पुराना जमाना था जब अख़बार निकालने की बात होती थी .अब तो मुकाबले के लिए वेब साईट होती है .सो बना दी विकिलीक्स ने और चल पड़ा मुकाबला करने.पता नहीं क्यों खुन्नस थी
अमरीका से   और तोप  का  मुहं घुमा दिया भारत की तरफ.और  खामखाँ    में मुसीबत खड़ी     करदी संकट मोचन दादा के लिए.अब दादा कहते है की सब कुछ टाइम बाउन्ड होना चाहिए १४वी लोकसभा के भ्रस्टाचार का जिक्र १५वी में कैसे हो सकता है . इससे कोई मतलब नहीं की लोग वही है. सरकार भी उसी पार्टी की है तो भी क्या हुआ ? यहाँ तक की  प्रधानमंत्री भी  वही है ,लेकिन सापेक्षता का सिधान्त तो यही बताता है न  की टाइम बदल जाने से पोजीशन    बदल जाती है ,इसलिए  अब यह चर्चा उचित नहीं है .

वैसे भी एक बार कह तो दिया प्रधानमंत्री ने  प्रेस कान्फरेंस में ,केवल प्रेस नहीं टीवी के सामने भी मान लिया  की गलती हो गयी मगर उतनी नहीं है जितनी आप लोग कह रहे है .आखिर मै क्या-क्या  कर सकता हूँ .अगर प्रधान मंत्री कार्यालय से  होने वाले के CVC के बायो  डाटा  की  रिपोर्ट गलत आयी ,या थामस साहेब ने ऐसी सेटिंग की ,कि किसी को पता ही नहीं चला की वोह पुराने घोटालेबाज हैऔर यहाँ भी अपनी चल चलेंगे और दाल गला लेंगे ,तो मै क्या कर सकता हूँ .मै प्रधान मंत्री हूँ ,अर्थशास्त्री हूँ लेकिन जादूगर नहीं हूँ ,कि बिना  बताये सब कुछ जान जाऊ  .और ये विपक्ष के पास तो न कोई काम न धाम बस जय सिया राम , न जाने कहा -कहा से सूचना ले आता    है विपक्ष.अगर मै इन बातो पर इस्तीफा दे देता तो अब तक कम से कम २०-३० बार देने का वर्ड  रिकार्ड बन जाता .और मैं दुनिया का सबसे ज्यादा बार इस्तीफा देने वाला प्रधान मंत्री बन जाता .लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया क्योंकि मुझे देश कि चिंता है.  दूसरा प्रधानमंत्री   जो मुझ से भी ज्यादा भ्रष्टाचारी निकला तो क्या करोगे .अब देखो न ६२ बरस के बाद भी लोग कहते है न कि इनसे तो अंग्रेज ही ठीक थे ,उनके ज़माने में घी २ रुपिया किलो बिकता था और कम से कम अत्याचार तो मानवता कि हद मे   रह कर करते थे .मेरे जाने के बाद  फिर ऐसे ही कहते घूमोगे कि इन बतोले बाजो से तो चुप्पा सिंह ही ठीक थे .कम से कम बोलते तो  नहीं थे ,और भ्रष्टाचार करने वालो को भी  पूरा मौका देते थे .क्योकि मै तो यह मानता हूँ कि दर्द का हद से गुजर जाना ही है खुद दवा होना .गीता मै भी लिखा है कि पाप का घड़ा भरेगा  तो फूटेगा ,तब भगवान का अवतार होगा ,तो मै अब   आप पर यह आरोप लगाता हूँ  कि  विपक्ष नहीं चाहता कि भगवान  जरा जल्दी से   पुनः  इस पवित्र भारत भूमि मै   जन्म ले और देश और प्रजा का  कल्याण करे . इसलिए मेरा मुहं मत खुलवायिए तो ही बेहतर है .

  अच्छा थोड़ी देर के लिए मान लो कि मै त्यागपत्र दे भी दूँ तो प्रधानमंत्री की कुर्सी  क्या लौह पुरुष को या सुषमा स्वराज को मिल जाएगी ? और मिल भी गयी तो क्या कर लेंगी ,जरा सी धमकी यदुरप्पा ने दी कि सबकी पोल खोल दूंगा तो ऊपर से नीचे  तक सब कि सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई .तो पहले  अपने घर में ठीक कर लो फिर मुझे कहना .याद रखना जब आप  एक उंगली दूसरे पर उठाते हैं तो आपकी  चार   उँगलियाँ आप की ओर इशारा करती हैं.

मै तो यहाँ तक कहता हूँ कि तुम जो मेरा साथ दो तो मै एक क्या सौ विकिलीक्स कि तोपों का मुहं घुमा दूँ ,नहीं तो भैया तुम जानो और तुम्हारा काम ,मेरा काम था चेताना इसलिए बता दिया वरना देवी जी याद रखना जिनके घर शीशे के बने होते है वोह कपड़े बेसमेंट  मै बदलते है .

बाबा रामदेव तो वैसे भी सफाई अभियान मे लगे है इसलिये २०१४ के इलेक्शन  के बाद तो किसी का भी प्रधान मंत्री बनना मुश्किल है. इसलिए ज्यादा खिटिर पिटर मत करो मजे से सोनिया एंड कंपनी के भ्रष्ट अचार   के साथ खाना खायो और होली में  मौज उडाओ तुम भी और मैं भी .

होली की शुभकामनाओ सहित ,

अजय सिंह "एकल"





Tuesday, March 1, 2011

शहीदों की चिताओं पर

दोस्तों,
हम कितने खुश  नसीब है  ,हमारा  देश कितना महान है और यहाँ पर  लोगों का क्या पूछना .अरे मरने वाले मर गए अब उनकी याद में क्यों परेशान होना है भाई .रात गई बात गई .आखिर यादों  को लेकर जिन्दगी भर बैठे थोड़ी रहेंगे .हम प्रोग्रेसिव है और इसका प्रमाण भी हम जब तब देते रहते  है . 
अब ये तो कोई बात न हुई की चन्द्र शेखर आजाद को मरे ८० साल हो गए और अब भी हम उन शहीदों की चिताओं  पर मेले  ही लगाते रहे .अरे  उस  ज़माने की बात और थी तब     चिताओं पर   मेले लगते थे  मेले में लोग आते थे शहीदों की याद में कुछ गीत कविताए होती थी आंसू बहते थे ,और अच्छी  खासी दुकानदारी हो जाती थी .पर अब किस के पास इतना टाइम धरा है जो मेले आये और आ कर शहीदों की याद करे .अब तो घर में भी कोई मर जाये तो आदमी १३ दिन के बजाये ३  दिन में ही निपटा देता है ,अरे टाइम कहाँ  है .और फिर कमाई भी तो करनी है .आखिर टाइम के साथ सब चीजे बदलती है अरे इसीको को कहते है मोडर्न होना.
तो भैया ८० साल बाद इलाहबाद में ठीक उसी जगह  और उसी दिन जहाँ चन्द्र शेखर आजाद शहीद हुए थे ,लोगो ने   लगा दिया कुत्तो का मेला (Dog show) .कुछ पुराने सिरफिरे किसिम के लोग आगये नारे वारे लगाते कहते थे यहाँ शहीदों की याद में मेला लगेगा ,पुलिस ने मार पीट के भगा दिया नारा लगाने वालो को .आखिर धंघे का मामला  हो तो सेटिंग तो करनी पड़ती है न, सो  उनका भी धंधा हो गया और हमारा  भी . 

और वैसे भी अब इस देश में आदमी और कुत्ते में ज्यादा फरक भी कहाँ है चाहे लाइफ स्टाइल का मामला हो या वफ़ादारी का ,बराबरी की जाये तो कुत्ता ही अव्वल आयेगा  .फिर आम आदमी की हालत तो गली के कुत्ते के जैसी ही है .इसलिए  अब 

शहीदों की  चिताओं पर लगेंगे  कुत्तो के मेले 
वतन पर मरने वालो का नहीं कोई निशाँ होगा 
                  
                         पूरा समाचार यहाँ पढ़े: 

Dog show organised, activists cry foul



















अजय सिंह "एकल"

दादा का बजट

दोस्तों,
हमेशा की तरह इसबार भी भारत सरकार का बजट पार्लियामेंट में पेश हो गया ,कांग्रेसियो ने तारीफ की और विरोधियो ने विरोध कर दिया  | कुछ लोगो ने इसे आम आदमी का बजट बताया तो कुछ ने खास लोगो को फायदा  पहुँचाने  वाला ,मतलब ये की सबने अपने-अपने हिसाब से बयान बाजी कर दी और अख़बार में छप   गए|

मुझे तो दादा बंगाल के जादूगर सरीखे नजर आये | शो के समय जैसा दिखाना चाहते थे दिखाया ,जब बाहर निकले तो लोगो की जेब हलकान थी और माल सरकार के पास कैसे पहुचेंगा इसकी बाकयदा प्लानिंग हो चुकी थी | 

८० साल पार कर गए लोगो का इनकम  टैक्स  कम लगेगा अरे भाई ठीक ही है ,जब आदमी के जिन्दा रहने में इतनी मुश्किले है और लोग तिल तिल कर मर रहे हो तो इतनी महंगाई   मे  ८० साल जी लेने वाले को  इनकम टैक्स की छूट के अलावा भारत सरकार का "शतायु पुरुस्कार" भी मिलना ही  चाहिए |  ऐसे लोगो का  उदाहरण दे कर सरकार जवानो का मुह बंद कर सकती है |और फिर दादा के सारे साथी भी तो इसी ग्रुप मे है और दादा तो सबमे सीनियर है , अब आखिर मंत्री तो जिन्दगी  भर रहेगे नहीं इसलिए  मंत्री रहते भविष्य तो सुरक्षित कर लेने में ही फायदा है , वर्ना कल किसने देखा है | अरे हाँ परेशानी के इस माहोल मे आदमी जल्दी बूढ़ा होता जा रहा है यह सरकार को भी पता है तभी तो सरकार ने ऐसी व्यवस्था कर दी है की अब  सीनियर सिटिज़न का ख़िताब और उपहार ६० बरस मे ही मिलजायेंगे ताकि मन मे ये न रहे की हम तो जी भर के जी  नहीं पाए और  सीनियरसिटिज़न का लाभ नहीं मिला|

यही  दादा महंगाई कम करने के लिए दबाव पड़ने पर कहते है की मै कोई जादूगर थोड़ी हूँ ,लेकिन महंगाई बढाने की जादूगरी  तो कर ही लेते है | और दादा ही क्यों ,शरद पवार भी तो कहते है की मै जादूगर नहीं हूँ यहाँ तक प्रधानमंत्री तक को भी यह मानना पड़ा की वो जादूगर नहीं है ,यानि मंत्रिमंडल मै कोई जादूगर है नहीं और सरकार को यह पता है की जनता दुःख    बढ़ा   तो कोई भी सकता है लेकिन दूर करने को जादूगर ही  चाहिए तो जादूगर बंगाल मे मिलते है |अरे भाई  U .P. A. सरकार  में दादा और दीदी दोनों ही बंगाल  का  काला   जादू  कर रहे है | 

अब  देखिये दीदी की जादूगरी   उनकी रेल बिना ड्राईवर ,गार्ड के चल रही है न | दीदी कलकत्ता मे बैठ कर दिल्ली मे रेल चलाती है ,लोगो की रेल बनाती  और पिछले 3 सालो मे ऐसी  रेल चलाई की सीधी राइटर बिल्डिंग जा कर रुकेंगी,है न दीदी की जादूगरी|

क्या ऐसा नहीं हो सकता अगले चुनाव मै जादूगरों को मौका दिया जाये ,और अगर  ५४१ ट्रेंड लोग  पार्लियामेंट    के लिए  न मिल सके तो इसका बाकयदा पाठ पढाया जाये ,ट्रेनिंग दी जाये |सरकार को  एक नए इंडियन इंस्टीटूट ऑफ़ मैजिक (I I M ) की घोषणा करनी चाहिए | ताकि हिंदुस्तान की जनता का कष्ट  सरकार दूर कर सके |इसी तरह विधान सभा के लिए  भी ऐसे वोकेशनल  ट्रेनिंग  कोर्से भी शुरू हो सकते है | ताकि जिम्मेदार पदों पर ऐसे लोग बैठे की जो समस्याओ को बढ़ाने के साथ उसको कंट्रोल करने के उपाए भी निकल सके |ये ना हो  की बयान दे कर समस्या बढ़ा तो दे और जब कंट्रोल करने की जरुरत पड़े तो बोले की हम कोई जादूगर थोड़े ही है | इससे    कम से कम आम आदमी को जीने का सहारा तो मिलेगा ,वरना अगले चुनाव तक तो लंगोटी भी नजर नहीं आयेगी | 

अजय सिंह "एकल"





Saturday, January 1, 2011

स्वागत नव वर्ष का

नव-छन्द सजे नव-गीत रचें ,
नव-बिम्ब सुसज्जित काव्य-कला
सब रागिनियाँ मनुहार करें ,
नव-बीन गहें कर में विमला
नववर्ष प्रहर्ष प्रदायक हो,
 जग-प्रीति सुनीति रहे सुफला
तन-ताप मिटे मन-मोद बढ़े,
 नित कोष भरें घर में कमला
Ajay Singh"Ekal"


Monday, November 1, 2010

ये देश है वीर जवानो का



दोस्तों,
मुझे याद नहीं की पिछले ३०-४० बरसो में किसी  ऐसी शादी में शरीक  हुआ हूँ  जिसमे "ये देश है वीर जवानो का" गाना ना बजाया गया हो .मैं सोचता था की यह गाना शायद इसलिए  बजाया है        की हम    हिन्दुस्तानी   केवल लड़ाई(युद्ध)  या दूसरी कठिन परिस्थितियो में ही  देश के वीर जवानो को नहीं  याद  रखते  बल्कि   खुशी के मौको पर भी याद रखते है .
यही बात  जब मैंने अपने एक बुजुर्ग दोस्त से पूछा तो उन्होंने बताया की यह गाना इसलिए बजाया जाता  है की दूल्हे की  तुलना वीर जवानो से की जाती जो लगभग वीर जवानो की तरह ही शहीद होने के लिए तैयार हो कर आता है.इसलिये ये गाना आमतौर   आखिर में बजता है ताकि उसका प्रभाव सारी जिन्दगी बना रहे  .पर पिछले हफ्ते कामन वेल्थ गेम ख़तम होने के बाद जैसे ही जाँच का काम शुरू हुआ तो अचानक पता चला की और भी गम है ज़माने में .१० अरब का आदर्श होउसिंग सोसाइटी , मुंबई घोटाला वीर जवानो के नाम पर किया गया है ,और ये कोई पहला घोटाला थोड़ी है ,आखिर बोफोर्स घोटाला से लगाकर  कारगिल ताबूत घोटाला  भी वीर जवानो के नाम पर ही हुआ है .अब सोसाइटी तो आदर्श है, घोटाला तो जाँच के बाद ही पता चलेगा की आदर्श है या नहीं .वैसे आदर्श हो भी सकता है क्योंकि सोसाइटी बनी शहीदों के परिजनो को देने के लिए तो उद्देश्य  तो आदर्श ही था बस घोटाला इसलिए हो गया की शहीदों के परिजनों के अलावा उन लोगो को भी फ्लैट मिल गए जो अभी तक शहीद नहीं हुए है .मसलन मुख्यमंत्री अशोक चौहान की सासु मा को फ्लैट अलाट हुआ जो अभी तक शहीद नहीं हुए है ,इसीलिए सोनिया जी ने उनको तुरंत हाजिर होने का आदेश दिया है , देखिये शायद अब शहीद हो ही जाये. रु. ८ करोड़ का फ्लैट यदि रु. ८० लाख में मिल जाये तो शहीद होने में भी कोई बुराई नहीं है.आखिर आदमी की जरूरत रोटी कपड़ा और मकान  ही तो है और शहीद होने के बाद  पहले दो की जरूरत तो वैसे भी नहीं होती. 

अब देखिये ना "चीजो  के भाव असमान पर चढ़ गए है ,हम अन्तरिक्ष युग  में कितना आगे बढ़ गए है " और इसी में क्यों , हम तो दुनिया के भ्रष्टतम  देशो की लिस्ट में भी ८४वे से ८७वे नंबर पर पहुँच गए है ,क्या यह उपलब्धता नहीं मानी जाएगी? एक ईमानदार लेकिन निष्क्रिय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश कहाँ  से कहाँ  पहुँच  रहा है ,मगर हमारा भविष्य उज्जवल है क्योकि आजादी के बाद से ना जाने कितने घोटाले इस देश में हुए है पर  मजे की बात ये आज तक किसी का कुछ नहीं हुआ .पता नहीं कितने आयोग बैठ चुके है ,ये आयोग  भी अगर जाँच हो तो पता लगेगा केवल दो काम के लिए बनाये जाते है ,एक तो अवकाश प्राप्त अफसरों को फिर अधिकार दे कर सरकार के खर्चे पर अनुग्रहित करने का मौका  मिलता है आखिर जिन अफसरों ने अपने कार्य काल में सरकार के नजायज कामो को जायज करनें में  मदद की उन्हें भी तो लाभ पहुचने की जिम्मेदारी भी तो सरकार की है, दूसरा घोटालो को क़ानूनी जामा पहेनाने में मदद मिलजाती है ताकि जब केस अदालत में जाये तो घोटाले बाज को  कानून की पकड़ से दूर रहने में सहूलियत रहे. अब तो ऐसा लगने लगा है की ये देश वीर जवानों के साथ ही  घोटालो का भी देश है .सबसे बड़ी बात यह की जो कंपनिया अपने देश में बहुत अच्छी मानी जाती है वो भी हिंदुस्तान में आ कर घोटाला करने से नहीं डरती है बल्कि ऐसा एहसास होता है की आती ही इसी लिए है अभी हाल में ही रु.  १२००० हजार करोड़ की वोडा फ़ोन कंपनी पर आयकर की डिमांड तो कम से कम  यही बताती है .

राजीव गाँधी के ज़माने में  ट्रको के पीछे अक्सर एक स्लोगन लिखा मिलता था "सौ में नब्बे बेईमान फिर भी भारत महान" ,ठीक ही है पिछले २०-२५ सालो की तो स्थिति यही है. राहुल तो खुद ही मानते है की राजीव गाँधी  के ज़माने में केंद्र के भेजे  रु. १००  नीचे पहुचते पहुचते  रु. १५ रह जाते थे, अब राहुल कहते है की यह रकम रु.१० हो गयी है, और इसी बूते जिन राज्यों के चुनाव में करिश्मा दिखने जाते है वहां  कहते है की हमने जो पैसा भेजा था वह  खर्च नहीं हुआ  इसलिए  हम पहुचने ही रु.१०० के १० देते है .

आप इससे यह ना समझे की केवल जिनकी जाँच हो रही है वही घोटालो में शामिल है  बल्कि सच्चाई ये है आप जिस की जाँच करा देंगे वही घोटाले में मिलेगा फिर चाहे वो शरद पवार हो या लालू यादव .इसलिये भलाई इसी में है जितनी ढकी है वो ढकी रहे .वर्ना सच्चाई तो यह है की जिसकी पूंछ  उठा कर देख लोगे मादा ही मिलेगा.

स्वामी रामदेव भ्रष्टाचार के पीछे लगे है तरह -तरह से लोगो को समझा रहे है योग सिखा रहे है और पैसा के बजाय हवा खाने की सलाह दे रहे है .  वास्तव में बड़ा चैलेन्ज है .भगवान से प्रार्थना है की उनको शतायु करे और हम लोग उनको सहयोग कर आने वाले सालो में भारत को भ्रष्टाचार से मुक्ति  दिलाये  .ताकि इस देश को पुनः उस सम्मान जनक स्थिति 
में पहुचायां जा सके जिसका अधिकारी है  हमारा प्यारा महान देश भारत .
दीपावली की शुभ कामनाओ सहित ,


अजय सिंह"एकल"