Sunday, September 25, 2011

हंगामा है क्यों बरपा

प्रिय मित्रो,

पिछले   कई   सप्ताहों से  देश और दुनिया में हंगामा मचा हुआ है .पहले एक भारतीय  ने जो  स्टैण्डर्ड और पुअर नामक अमरीकी संस्था के प्रमुख हुआ करते थे ,ने अमरीका में रहते और  अमरीकी कम्पनी में काम करते हुए उसकी रेटिंग कम कर के  कालीदास       की तरह उस डाली को ही निशाना बना दिया जिस पर वोह खुद  भी बैठे हुए थे और महाकवी कालीदास  की तरह ही अपना नाम इतिहास में दर्ज करा दिया .फिर बाबा रामदेव ने काले लोगो के धन (धन काला या सफ़ेद नहीं होता) को निशाना बनाया तो कई हफ्ते इस चर्चा में निकल गए . पिछले महीने अन्ना हजारे जी के आन्दोलन और अनशन  ने  भारत में  ही नहीं  दुनिया भर  में  हंगामा मचाया और लोगो को फिर गुजरात  में पैदा हुए  गाँधी की  याद दिला दी .

इस क्रम में सबसे ताजा हंगामा मचाया है गुजरात के मुख्यमंत्री  नरेन्द्र मोदी के उपवास ने .कुछ कहते की यह उपवास प्रधानमंत्री बन ने के लिए मोदी का नाटक है और कुछ की निगाह में यह २०१२ के चुनाव में दुबारा सत्ता हासिल करने का हथकंडा .देश  के नेताओ  द्वारा तरह -तरह से देश का तमाम  धन खाने से भी  शायद इतना हंगामा नहीं मचा होगा जितना मोदी के उपवास से. कोई कहता है की इससे कलंक नहीं धुलेगा और कोई कहता है की नौ सो चूहे खा कर बिल्ली हज को जा रही है. कोई इन बुद्धजीविओं     से पूछे की भाई बिल्ली चूहे खा कर भी अगर हज को चली जाये तो क्या बुराई है , इनके हिसाब से  तो बिल्ली को जिन्दगी भर चूहे ही खाते रहना चाहिए और गलती समझ आ जाये तो भी करते रहना चाहिए  क्योंकि इन नेताओ में इतना साहस नहीं है की जो दिखता महसूस होता है उसको भी स्वीकार कर सके  . नहीं तो पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की महबूबा मोदी  गुजरात में हुए विकास की  तारीफ  कर फिर मुकर न जाती और अब्दुल्ला को ट्विट करके उन्हें याद न दिलाना पड़ता.वैसे  इस तरह की बाते करने वालो में वही लोग आगे है जिनका पेट साठ साल देश को लूट के अपना और अपने रिश्तेदारों के  घर भरने  के बाद  भी नहीं भरा है और वह खाली  का  खाली है बिलकुल लैटर बॉक्स की तरह जो  सुबह से शाम तक भरने के बाद भी  अगले दिन फिर खाली का खाली ही रहता है. 

ये तो अच्छा हुआ ये कांग्रेसी नेता भगवान राम के ज़माने में नहीं हुए,  नहीं तो महर्षि   बाल्मीकि जो अपने आरम्भिक दिनों में लूटपाट किया करते थे और ज्ञान मिलने के बाद  राम-राम जप करके अपने समय के सबसे बड़े ऋषि भी कहलाये और राम कथा लिखने के साथ ही राम के दोनों पुत्रो और सीता माता  का भरण पोषण भी  किया और लव कुश को युद्ध में इतना कुशल बनाया की वोह दोनों बच्चे भगवान राम के अश्वमेधयुद्ध के घोड़े को पकड़ कर राम जो पुरषोत्तम भी थे और भगवान भी की  सत्ता को  चेलेंज कर सके और सीता माता के साथ हुए अन्याय   का एहसास भी  करवा दिया . ऐसे अनेक उदहारण इतिहास में मिल जायंगे जहाँ नौ सो चूहे खा कर बिल्ली हज को भी गयी  और लोगो के लिए आदर्श भी रखा आखिर ये उनसे तो अच्छे ही  है जो नौसो क्या नौ हजार खाने के बाद भी हज नहीं जाना  चाहते है.


इस क्रम में एक और बात जिसने हंगामा मचाया है वोह है लाल कृष्ण अडवाणी की यात्रा .वैसे तो कृष्ण का एक नाम ही पार्थ सारथी है. पार्थ यानि अर्जुन के सारथी अर्थात  रथ को चलाने वाले .इस नाते से तो लाल कृष्ण अडवाणी जी का रथ यात्रा एक विशेषा अधिकार है (यथा नाम तथा गुण ) , और जब उन्होंने पार्थ सारथी की तरह अर्जुन रूपी  धर्म का रथ चलाया तो मोक्ष यानि सत्ता भी प्राप्त की और खूब आन्नद भी उठाया लेकिन यह बात तब की है जब एक तरफ कौरव थे और दूसरी तरफ पांडव .परन्तु  अब समस्या यह है की इस देश के पांडव (अर्थात धर्म मार्ग पर चलने वाले )  तो अज्ञात वास में  है इसलिए लड़ाई अब कौरव और पांडवो के बीच न होकर केवल  कौरवो के बीच है यानि दोनों ही तरफ कौरव है तो अब भगवान ही बता सकते है अबकी लाल कृष्ण किसका रथ हाकेंगे दुर्योधन का या फिर दुशाशन का. और अबकी बार युद्ध में विजय के बावजूद मोक्ष यानि प्रधान मंत्री की कुर्सी नहीं मिलेगी यह भी पहले ही  तय हो गया है तो रथ यात्रा और रथ यात्री का क्या होगा भगवान जाने.


 यानि और कुछ हो न हो हंगामा तो बरपे गा ही और कुछ दिन  और निकल जायेंगे भूखे पेट लोगो के इस हंगामे के बीच, जिनकी आमदनी 32 रुपये रोज से ज्यादा है और पेट भर के खाना भी नहीं खा  पाते है  और सरकारी सुविधाएँ  भी नहीं क्योंकि सरकार ने देश की सबसे बड़ी अदालत में हलफनामा दाखिल कर दिया है की इतने रुपये कमाने वाले को इसमें जितना मिलता है उतना ही खाना चाहिए तो  सरकार की जिम्मेदारी खतम हो गयी  ,गरीबी  रेखा से नीचे लोगो की  जीवन की मूल आवश्यकताओं  की पूर्ति में सर खपाने की जिसका अधिकार उन्हें भारत के संविधान से मिला है . इसलिए अब सरकार के मुखिया और अधिकारी आराम से अपनी गरीबी दूर करने में अपना दिमाग और  श्रम लगा सकते है .
  और अंत में 
तब्दीलिया बस इतनी हुई,इन्क़लाब से 
कुछ नाम हट गए पुरानी किताब से .

अजय सिंह "एकल"









Sunday, September 18, 2011

जाके पैर न फटी बिवाई

प्रिय दोस्तों ,

ठीक समझा आपने ,इस देश ७० प्रतिशत लोग गरीब है और देश की संसद में ७० प्रतिशत करोड़पति है यानि संसद में ७० प्रतिशत जनता को ३० प्रतिशत संसद रिप्रेजेंट करते है और ३० प्रतिशत जनता को ७० प्रतिशत .और संसद में तो खेल नम्बरों का है यानि जिसके पाले में ज्यादा लोग वह ही जीतेगा और निर्णय उसके पक्ष में ही होंगे .मतलब  यह  की  जिनके हाथो में जिम्मेदारी है गरीबों  के  लिए पालसी बनाने की और उसको  लागू करवाने  की उन्हें न तो यह पता है की गरीबी क्या होती है और न यह की  वह  अपना जीवन चलाने के लिए कितना संघर्ष करता है  . तभी तो प्लानिंग कमीशन  के उप प्रधान श्री मोंटेक सिंह जो वर्ल्ड बैंक के पेंसनर भी है ,फरमाते है की २० रुपये रोज कमाने वाला आदमी गरीबी रेखा के ऊपर है यानि सरकार की कसौटियो  पर गरीब नहीं माना जाना चाहिए. ठीक ही तो है जिन लोगो की कमाई डालर में होती है और जीवन की सारी जरूरते   सरकारी सुविधाओ से मुफ्त में प्राप्त हो,एयर कंडीशन  दफ्तर से निकल कर एयर कंडीशन घर शानदार   एवं  आरामदेय लाल बत्ती लगी काली शीशे वाली विदेशी कार से  घर जाते है उन्हें  सड़क पर पैदल चलती और न पब्लिक वाहनों  में  धक्के खाती जनता  नजर आती है और न सब्जी या पेट्रोल के दाम बढ़ने का असर .ठीक ही तो कहा है की "जाके पैर न फटी बेवाई सो क्या जाने पीर पराई"

 कितनी विचित्र बात है  और  सबको पता है की  अमीर आदमी अपनी ताकत या तो धन बढाने में लगता है या फिर उसको बचाने   में. हाँ यदि इस उद्देश्य की पूर्ति में कुछ धन और समय खर्च हो जाये तो उतना वह इन्वेस्टमेंट  कर देता है लेकिन यह सूद समेत कैसे वापस आएगा इसकी व्यवस्था भी साथ -साथ करता जाता है. तो जब इनके हाथ खजाना लग गया तो फिर दूसरे लोगो को  लाभ क्यों लेने देंगे ,इसीलिए अन्ना हजारे को  अपने भ्रष्टाचार के खिलाफ  आन्दोलन  में मंच से यह घोषणा करनी पड़ी की जो आज मंत्री और सांसद बन बैठे है लुटेरे भी इन्ही में से है.अब यह बात जिनके लिए कही गयी  उन्हें बुरा तो लगना ही था .क्योकिं अब तक सार्वजनिक मंच पर यह चर्चा नहीं हुई थी इसलिए कहने वालो को नोटिस भी दी जा रही है और उत्पीड़न भी किया जा रहा है नहीं तो जनता इसको नेताओ की मौन स्वीकृत मान लेगी.

अब यह तो मानना तर्क संगत ही होगा की यदि माननीय सांसद करोड़ो रुपये  खर्च कर के संसद में पहुचेंगे तो उसको सूद सहित वापस प्राप्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.इसलिए चुनाव सुधार को अन्ना ने जन लोकपाल के बाद प्राथमिकता दी है.इस सम्बन्ध में कुछ सुझावों नीचे दे रहा ,इनमे  जो उचित लगे उनपर विस्तृत चर्चा की जा सकती है:



  1. ५०-७० प्रतिशत सीटे उनलोगों के आरक्षित हो जिनकी सालाना आमदनी २-३ लाख से ज्यादा न हो,ताकि यह अपने और अपनों को लाभ देने वाली योजनाये बनाये और उसका प्रभाव भी जल्द से जल्द पता लग सके.
  2. जो लोग एक से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हो उन्हें अतरिक्त  सीट पर होने वाले  खर्च को चुनाव आयोग के पास जमा करवा देने का विधान बने. पिछले चुनाव में लोकसभा की ५४२ सीटों पर करीब १० हजार करोड़ खर्च हुए थे इस हिसाब से प्रति सीट खर्च २० करोड़ के औसत से जमा करने से दुबारा होने वाले चुनाव का खर्चा सरकार को  नहीं उठाना पड़ेगा. और किसी की  व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का बोझ देश के कर देने वाले लोगो की जेब पर नहीं पड़ेगा .
  3. राजनैतिक पार्टियों को मिलने वाले चंदे को कर मुक्त करने के बजाये इसे  पार्टी की कर योग्य  आए माना जाये और उस पर टैक्स लगना चाहिए . आखिर अब राजनीत करने वाले लोग पेशेवर है और पार्टिया कंपनी की तरह तनख्वा भी देती है और अतिरिक्त सुविधाए भी, इसलिए इन्हें कर मुक्त करना न तो तर्क संगत है न न्याय संगत.
  4. जो कॉर्पोरेट घराने पार्टियों को चंदा देते है वह  वास्तव में कंपनी के खातो से होता है,जिसकी मालिक शेयर होल्डर जनता है न की कुछ शेयर ज्यादा होने की वजह से बने हुए मालिक ,इसलिए इन्हें अपनी मर्जी से उन उद्देश्यों के लिए पैसे खर्च करने का अधिकार नहीं है जो कंपनी के मूल उद्देश्यों  से मेल नहीं खाते है.इतना ही नहीं इनकी पहली जिम्मेदारी  नियमानुसार कानून के मुताबिक टैक्स भरने की है न की राजनैतिक पार्टियो को चंदा देकर उस से  किसी तरह बचने की.  इसलिए जिन कंपनियो ने सरकार के करोड़ो रुपये  आय कर, एक्साइज ड्यूटी ,कस्टम ड्यूटी इत्यादि न चुकाए हो उन्हें चन्दा देने के पहले टैक्स चुकाना चाहिए तथा  चंदा देने वाली कंपनियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र चंदे के साथ देना चाहिए अन्यथा इनके द्वारा दिया जाने वाला पैसा टैक्स बचाने की नियत का हिस्सा बन जाता है और इस खर्चे को आय कर विभाग ख़ारिज कर ,कर योग्य आय मन सकता है,इस खर्चे  की स्वीकृत शेयर धारको  से भी ली जानी चाहिए.
  5. राजनैतिक पार्टियों का आय -व्यय खाता भी आम जनता के लिए इनकी वेब साईट पर  हो और इससे सम्बंधित प्रश्न सूचना  के अधिकार नियम के तहत दिए जाये.
  6. सार्वजनिक जीवन में काम करने  वाले सभी  व्यक्तियों की  सालाना आए व्यय जानकारी भी सार्वजनिक हो और इस से सम्बंधित जानकारी भी सूचना के अधिकार के तहत दी जानी चाहिए. सूचना गलत दिए जाने पर कड़े दंड का प्राविधान हो. उदहारण के लिए जिन मंत्रियो की संपत्ति में २०० से १००० प्रतिशत की वृधि दो सालो में हुई है वह यह बताये की इस आए का श्रोत क्या है और क्या इस पर नियम अनुसार टैक्स दिया गया है.इसमें कुछ भी अवैधानिक नहीं है आम आदमी को ऐसा करना पड़ता है तो सांसदों और मंत्रियो को इस से छूट देने का कोई कारण नजर नहीं आता है.
  7. राइट  टू रीकाल लागु हो और इसको प्रभावी एवं इकोनोमिकल बनाने के लिए मतदान में एक के बजाये दो उम्मीदवारों को  वरीयता के क्रम से विजयी घोषित किया जाये ,यानि किसी क्षेत्र के सांसद या विधायक को यदि उस इलाके की जनता वापस बुला ले तो दूसरी वरीयता प्राप्त विजेता को पहले के स्थान पर नियुक्ति मिले ,ताकि तुरंत दुबारा चुनाव करवाने के खर्च एवं प्रशासनिक कार्यो की जरुरत न पड़े.


और अंतिम बात:

ये तो तय था की मंजर बदल जायेंगे 
हालत जो बे काबू थे सुधर जायेंगे 
इक तुम जो खालो कसम इन्कलाब की 
वतन में हर तरफ बस अन्ना नजर आएंगे l 

अजय सिंह "एकल"
  












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Monday, August 15, 2011

डंडा ऊँचा रहे तुम्हारा

प्रिय पाठको,
६५वे  स्वतंत्रता दिवस  की बधाई देने में हर्ष भी हो रहा है और दुःख भी.हर्ष इसलिए की६४ वर्ष हो गए अंग्रेजो  को भारत छोड़े हुए और हमने इतनी उन्नत कर ली है की ऊंट और सपेरो का देश समझा जाने वाला  भारत आज दुनिया में एक आर्थिक महाशक्ति बन कर उभर रहा है.शिक्षा के क्षेत्र मे ,रक्षा के क्षेत्र में,सेवा के क्षेत्र में भारत ने नए मानदंड स्थापित कर दिए है .परन्तु शर्म इसलिए आ रही है आज भी  अन्ना हजारे  और स्वामी रामदेव को सरकार से उसी तरह लड़ना पड़ रहा  है  जैसे कभी स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए महत्मा गाँधी ने  अंग्रेजो के खिलाफ जनमत तेयार   कर लड़ाई लड़ी थी . सरकार में बैठे लोगो को ऐसा लग रहा है जैसे अन्ना हजारे की लड़ाई देश हित में न होकर उनकी सरकार के खिलाफ है इसलिए पुलिसिया हथकंडे अपना कर और इनके खिलाफ दुष्प्रचार करके ही इनका अस्तित्व बना रहेगा .एक साधारण सी बात जो इनकी समझ के बाहर है की ये सदा के लिए न तो सरकार है और न हमेशा के लिए  मंत्री .अतः ऐसी बाते जो  तुम्हे अपने लिए अच्छी  न लगती हो वोह दूसरो  को कैसे कह सकते है.

 परन्तु सच है की आदमी को चीजे दो स्थितियो में छोटी दिखाई देती है एक जब वोह दूर से देखता है और दूसरा जब गरूर से देखता है. रावन को जब श्री हनुमान जी ने सीता माता को सम्मान पूर्वक  प्रभु  श्री राम के पास भेजने की बात कही  तो रावन ने अपने  मंत्रियो से सलाह  करने  के बाद श्री हनुमान की पूछ में आग लगवा दिया .जब सोने की लंका जल गयी तब पता चला की यह कोई मामूली बन्दर नहीं बल्कि प्रभु श्री राम का सेवक श्री हनुमान है .कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी और माननीय मंत्री एवं प्रमुख रणनीतिकार  श्री कपिल सिब्बल को भी मामूली बन्दर एवं श्री हनुमान का फर्क नजर नहीं आ रहा है और पद के प्रभाव में इतने मदांध हो चले है की लगता ही नहीं की यह भी इस देश के साधारण नागरिक है जिनको कुछ समय के लिए देश के मंत्री पद की जिम्मेदारी इस देश की आम जनता ने ही दी है और यह सदा के लिए नहीं है.इसलिए हे मानव श्रेष्ठ मंत्री जी स्वतंत्रता की६५वे वर्षगांठ पर झंडा ऊँचा रहे हमारा का ही गीत गाइये और डंडा ऊँचा रहे हमारा को भूल  जाइये .नहीं तो याद रखियेगा समय बड़ा निर्दयी होता है .
प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने लाल किले की प्राचीर से  झंडा फिर फहरा दिया और कुछ वादे भी कर दिए ,साथ में यह भी बताना नहीं भूले की वह जादूगर नहीं,जो पिछले कई सालो से सरकार के वित् मंत्री और स्वयं प्रधानमंत्री भारत की जनता को अपनी सरकार की विफलताओ के दोष से बचाने के लिए कहते आ रहे है. तो जनता इनको जादूगर न मान कर सपेरा मानने लग गई है जिसके पिटारे में हर क़िस्म के साँप है जो अभी जनता को डस रहे है और मौका लगते ही मंत्री परिषद् में भी अपना हुनर दिखा सकते है.अतः जनता को तैआर रहना होगा इन सापों से डँसे जाने से.

स्वतंत्रता संग्राम में जिन लोगो ने तरह -तरह की आहूतिया दी उनमे एक नाम श्री श्याम लाल गुप्त का है जिन्होंने एक प्रसिद्ध गीत तिरंगे झंडे पर लिखा था .यह गीत १९३८  में कांग्रेस के अधिवेशन में प्रेरक गीत की तरह गाया गया था.इस अवसर पर उन्हें याद कर में देशवासियो की ओर से श्रधांजली देना चाहता हूँ .साथ ही आंध्र प्रदेश केश्री प.वेंकैया जिन के बनाये हुए तिरंगे को इस देश ने राष्ट्रीय ध्वज स्वीकार किया किया है ऐसे दोनों स्वतंत्रता सेनानियो को मेरा नमन.

                                             विजयी  विश्व तीरगा   प्यारा 
                                              झंडा ऊंचा रहे  हमारा!!
         सदा  शक्ति  सरसाने  वाला , प्रेम  सुधा  बरसाने वाला
वीरों  को हरषाने  वाला, मातृभूमि  का  तन -मन   सारा ;
विजयी विश्व तिरंगा  प्यारा,
झंडा ऊंचा रहे  हमारा!!
आओ  प्यारे  वीरों आओ , देश -धर्म  पर  बलि  बलि जाओ 
एक  साथ  सब  मिलकर  गाओ , प्यारा भारत  देश हमारा;
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊंचा रहे हमारा!!
शान  न  इसकी  जाने  पाए , चाहे  जान  भले  ही जाए 
सत्य  की विजय  कर  दिखलाये , तब  होवे  प्रण पूर्ण   हमारा

विजयी  विश्व तीरगा   प्यारा ,
झंडा  ऊंचा  रहें   हमारा ;

लेखक : श्री श्याम लाल गुप्त, कानपुर
             


अजय सिंह "एकल"

Friday, July 22, 2011

तो दाग भी अच्छे है.......और दागी भी..

प्रिय जनों,
"अरे मौसी बसंती का हाथ मेरे दोस्त  वीरू के हाथ में दे दो" , "अरे तुम का कहत हो सगी माँ ना सही पर हूँ तो बसंती की मौसी ऐसे वैसे के हाथ में कैसे दे दूँ" ."मगर  मेरा दोस्त तो  निहायत ही शरीफ है ,केवल एक ही लत है जुएँ में हारने के बाद थोड़ी सी पी लेता है और पीने के बाद मनोरंजन के लिए कोठे पर चला जा जाता है बस . "अब ये लो दोस्त जुआ खेलता है शराब पीता है कोठे पर जाता है और फिर भी शरीफ है वाह भई  वाह दोस्त हो तो ऐसा " मनमोहन सरकार की कहानी भी कुछ-कुछ  रमेश सिप्पी की पिक्चर "शोले " की तरह ही  लगती है .

मनमोहन सरकार के   मंत्रियो  और  कार्पोरेट की मिली भगत अब जग  जाहिर हो चुकी है,कामन वेल्थ खेलो के मुखिया के टीम सहित अंदर  हैं , कनिमोझी को अदालत जमानत देने में घबरा रही है ,चिदंबरम के ऊपर भी कई  आरोप लग रहे हैं  , वित् मंत्री के कार्यालय की जासूसी करने में  भी सरकार में शामिल लोगो के हाथ का शक है ,प्रधान मंत्री के सबसे काबिल और प्रिय मंत्री सिब्बल का रिलाएंस प्रेम जाहिर हो गया है ,इसके पहले भी वे 2G घोटाले में भी बयान  दे कर राजा को भी पाक साफ़ साबित करने की कोशिश कर चुके है. रामदेव के साथ जो खेल उन्होंने देश के सामने किया उस पर मनमोहन जी खेद तो     प्रगट कर रहे है लेकिन कहते है की कोई और उपाय नहीं  था. 

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में फिर बम  धमाके होने के बाद गृह मंत्री ने बड़ा संतोष जाहिर किया की उनकी वजह से आतंकवादी हमला ३२ महीनो बाद हुआ इसके लिए उन्होंने आतंकियों का भी धन्यवाद किया और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार पुलिस और सुरक्षा कर्मियों का भी.केवल यह नहीं बताया की जो योजनाये २६ /११ के बाद बनी थी उसमे कितनी शुरू हुयी है . और भविष्य में आतंकी हमले न हो इसके क्या उपाए सरकार ने किया है.   राहुल  गाँधी ने भी सरकार की तरफ से देश को यह बता दिया की हालाकिं सरकार ९९ प्रतिशत हमले रोक लेती है लेकिन १ प्रतिशत को रोकना मुश्किल ही नहीं असंभव है इसलिए जब भी कोई आतंकी हमला देश पर हो तो वोह १% ही माना जाये और जो नहीं हुए उनको यह मान लिया जाये की ९९% हैं. यानि खेल के नए नियम भावी प्रधान मंत्री ने लिखने शुरू करदिये .   आप के बाकी   के सिपाह सालारो ने भी हमेशा की तरह पुराने डायलागों को दोहरा कर अपने कर्तव्य की इत्श्री करली .दो मंत्री हमलो की खबर के बाद फैशन शो देखने चले गए और जब उनसे लोगो ने सवाल किया तो जवाब बिलकुल सीधा था की पहले से प्रोग्राम तय था और अपने वचन का पालन भी तो करना था ,इतने बड़े देश में कुछ न कुछ तो होता ही रहता है .

श्रीमान दिग्विजय सिंह जी ने भी हमेशा की तरह  अपने कर्तव्य का निर्वाह करते हुए मुसलमानों के  आतंकी घटना में शामिल   होने पर भी  लगे हाथ अपनी शंका जाहिर कर के संघ को भी घेरे में ले लिया और  कांग्रेस के पक्ष में  सबसे ज्यादा वोटो को प्रभावित कर के नंबर कमा लिए, और दल के बाहर  ही नहीं अन्दर के विरोधिओं को धोबी पाट लगा दिया . इतना ही नहीं कलमाड़ी और ए राजा को कोर्ट जमानत दे इसकी भी वकालत करदी और सुर्ख़ियों में छा गए . मैं तो सोच रहा था की मंत्रिमंडल विस्तार में इनको "बयान मंत्री" की कुर्सी तो पक्का  मिल जाएगी .

लेकिन सबसे ज्यादा धन्यवाद के पात्र तो आप है जो सोनिया जी को लेकर मुंबई के दुखी लोगो को बातों का मरहम (lip service) लगाया और जनता के साथ नेताओं को खुश कर फिर अपनी साफ और सुन्दर छवि को बरक़रार   रखा .


वैसे भी भारत सरकार जिसके की आप मुखिया है उसको चलाने की जिम्मेदारी आपने  राष्ट्रीय सलाहकार समित बना कर उसकी चेयर पर्सन  सोनिया जी को दे रखी है . आपके  मंत्रिमंडल में शामिल नवजवान मंत्री राहुल गाँधी की देख रेख में काम करते है और गटबंधन के मंत्री अपने -अपने आकाओं की सुनते है, हाल में हुई कालका मेल दुर्घटना में घायलों  का हालचाल पूछने को जब आपने रेल राज्य मंत्री मुकुल राय को  निर्देश दिया तो उन्होंने आपकी राय को अनदेखा कर के अपने बॉस यानि ममता बनर्जी के लिए काम करना बेहतर माना.ठीक है आप अपने को मजबूर प्रधान मंत्री चाहे न माने लेकिन सच्चाई तो यही है यानि यह भी मज़बूरी की इसको सार्वजानिक रूप से स्वीकार नहीं करसकते है. चलिए आप ने भी अपना मन ठीक ही बना रखा है जब तक गद्दी है मौज करों ,इतनी राजनीत  तो ७ साल में आप भी सीख   गए है की दूसरो  के सर पर कैसे दोष मढना है. अगर केवल अख़बार और टीवी  संपादको को चाय पर बुला के बयान देने से ,और राहुल के लिए रात्रि रक्षक (night guard) की तरह काम करके  सरकार का मुखिया बने रहा जा सकता है तो दाग भी अच्छे है और दागी भी .


जरा चाटुकारों की भीड़ को पास से हटा कर तो  देखिए की इस देश के दामाद श्री राबर्ट बढेरा कैसे सबसे तेजी से अरबपति बनने में कामयाब हो    गए है और देश के भावी प्रधान मंत्री राहुल गाँधी जी अपने नवजवान साथियों के साथ क्या -क्या रंगरेलिया कर रहे है . कहीं ऐसा न हो की पिछले स्वतन्त्रा दिवस पर दिया गया  आपका बयान की आप की कैबिनेट जवाहर लाल की कैबिनेट से बेहतर है  का मतलब यह निकले की जवाहर लाल के मंत्रियो की जो कोशिशे देश का सत्यानाश करने में कामयाब न हो पाई उनको आप के काबिल मंत्रियो की फ़ौज ने कर दिखाया  और आप भी देश को लूटने वालो के सरताज बन जाये . अभी भी समय है कांग्रेस का हाथ को   गरीब के साथ ही रहने दीजिये उसको  गरीब के गाल पर चपत न बनाइये . संप्रग सरकार के ७ साल के सुशासन ने गरीब की जिन्दगी वैसे ही महंगाई के कारण नरक हो गई है. आपके मंत्री महंगाई की तुलना करते हुए कहते है की यह नेपाल और बंगला देश में भी बढ़ी है लेकिन जब आतंकी हमलो की बात होती है महा सचिव  दिग्विजय जी कहते है यहाँ से ज्यादा हमले पाकिस्तान में हो रहे है .वाह भई वाह महंगाई की तुलना नेपाल से और आतंक की पाकिस्तान से .मतलब यह  की जहाँ से जो अच्छी चीज मिली ले ली. वाकई आप और आपकी कैबिनेट  दोनों लाजवाब है .


अजय सिंह "एकल"

Sunday, June 5, 2011

दिल्ली के ठग

जनाब,
दिल्ली का ठग नाम से एक पिक्चर आई  थी १९५८ में कलाकार थे, किशोर   कुमार  और नूतन .अब इसका      री मेक बना है ४ जून २०११ में .फिल्म का एक टेलर अप्रेल २०११ को भी हुआ था जंतर मंतर में  जिसमे अन्ना   हजारे ने हीरो प्ले किया ,परन्तु  जब दिल्ली के राम लीला मैदान में योग गुरु राम देव  के नेतृत्व में देश दुनिया से आए हुए लोगो को लेकर काले धन के खिलाफ भक्तो की अपार भीड़ के साथ   पिक्चर  शुरू हुई तो दिल्ली के ठगों जो बिहार ,बंगाल पंजाब तमिलनाडु इत्यादि के साथ दिल्ली में आ मंत्री बन बैठे है  का भी दिल मुश्किल  में पड गया ,हालांकि बाबा के ३ जून को हवाई जहाज से उतरते ही  दिल्ली के ठगों    ने बाबा को हैंडिल करने की कोशिश की और जब हैंडिल नहीं हुए तो मैन-हैंडल कर दिया . नतीजतन राम देव के खिलाफ कपिल सिब्बल का  विलेन प्ले सबके सामने आगया .

कहते है की जब रोम जल रहा था तो वहां का  राजा  नीरो बंसी बजा रहा  था , (यहाँ सोनिया चैन की बंसी बजा रही है लगता है रोम वाले ऐसे ही होते है) मुझे नहीं पता की जब दिल्ली के राम लीला मैदान में लाठिया चल रही थी तो इस महान    लोकतान्त्रिक देश का प्रधान मंत्री कहाँ चैन की नींद सो रहा था और देश का गृह  मंत्री कहाँ कपड़े    बदल रहा था अथवा ठगी का प्लान बना रहा  था, क्योंकि कार्यवाही रात में एक बजे शुरू हुयी लेकिन  ९ बजे सुबह तक केवल दिग्विजय सिंह जो ओसामा को ओसामा जी कहते हैं,अफ्जलं गुरु को फांसी न होने पाए इसके लिए तरह -तरह के बयान देते है,आजमगढ़ जा कर आतंक वादियो को विश्वास दिलाते है की उनके रहते उन्हें चिंता की जरुरत नहीं , वोह सबसे पहले करोडो लोगो के पूज्य एवं श्रद्धा के पात्र   स्वामी को ठग कहते और उनकी संपत्ति की जाँच की मांग करते हुए नजर आए . अब मुझे समझ आरहा है की खून के रिश्ते कितने असर कारक होते हैं .

इतिहास में पढ़ा था की अंग्रेजो के साम्राज्य में  सूरज कभी डूबता नहीं था.अंग्रेज अभी भी निश्चिन्त रह सकते है की उनका सूरज कम -से - कम भारत में अभी डूबा नहीं है .बेशक चमड़ी का रंग कुछ श्यामल हुआ हो और शक्ले हिन्दुस्तानियो जैसे लगती हो पर जून ७४ का आपातकाल और आज दिल्ली के राम लीला मैदान ने फिर याद दिला दिया है की जलिया  वाला बाग़ में गोली चाहे इंग्लैण्ड से आये हुए जनरल डायेर ने चलवाई हो ,लेकिन अब जनरल जैसो को इंग्लॅण्ड से आने की जरुरत नहीं पिछले ६० वर्षो में अब हम अब हमारा देश इतना समर्थ(self sufficient) हो गया है की हमने अंग्रेजो की पूरी नस्ल यही पैदा करनी शुरू कर दी है. 

वैसे ठगने की घटनाये अतीत में भी हुई है मसलन सावित्री के पति सत्यवान की जान ले कर जब यमराज जा रहे थे तो सावित्री ने एक ऐसा वरदान मांग लिया जिसको देने के बाद यमराज अपने को ठगा महसूस करने लगे परन्तु वरदान देने का बाद उसका पालन करने हेतु उन्हें सत्यवान को जिन्दा करना पड़ा. ऐसी ही योजना बाबा रामदेव ने भी बनाई थी ,लेकिन इस बार मामला उल्टा पड़ गया .अब आप ही बताइए की अपने डेथ वारंट पर बाबा के कहने से कोई कैसे साइन कर सकता है .जरा गंभीर मसला है सो ध्यान से समझना होगा . विदेशो में जमा धन ८० फीसदी नेताओ का है और २० फीसदी व्यापारियो का .बात ये है की व्यापारी अपने पैसे को  आइडल यानि अन प्रोडक्टिव  नहीं रखता , उसके पास काले धन को इन्वेस्ट करने के मौके है इसलिए उसको इन्वेस्ट  कर वोह उससे और धन पैदा करता है ,जबकि आम तौर पर  नेताओ के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होती और थोडा बहुत अपने विश्वाशपात्रो की मदद से इन्वेस्ट करने के अलावा धन को सुरक्षित जगहों (Tax haven) पर जमा करना उनकी मज़बूरी है .हर रोज डील पर डील होती है और पैसे का जेनेरेशन  लगातार होता है ,अब बाबा कहते है की ऐसा विधान बना दो की पैसा राष्ट्रीय सम्पति घोषित हो जाये और ऐसा करने वालो को मृत्यु दंड अथवा आजीवन कारावास मिले, एक बार को तो सरकार भुलावे में आ ही गयी थी और ऐसा दिखावा किया की मानो वोह समझ  नहीं पाई  और बाबा ने भी ९० प्रतिशत बातें सरकार ने  मानली है ऐसी  घोषणा भी कर दी , दरअसल ये यह छोटे ठग पर बड़े का दावं था  .सरकार ने सोचा की एक बार ऐसा दिखाने से कि बाबा की सारी मांगे मान ली है बाबा का अनशन  ख़तम हो जायेगा लोग चले जाएँगे और फिर बात ख़तम . लेकिन बाबा शातिर निकल गया उन्हें ये बात समझ आगई  और उन्होंने चिठ्ठी से मानने से मना कर दिया और कहा कि विधान लाओ , जैसा की अन्ना ने भी सावधान किया था , तब सरकार में बैठे ठगों को लगा की बाबा को ठगना आसान नहीं है तो फिर आगे वही किया सरकार ने जो होना चाहिए था अर्थात सोते हुए निहथ्थे लोगो को डंडा ,लाठी और गोली के द्वारा डरा धमका कर आम लोगो लो भगा दिया और बाबा के खिलाफ  तड़ी - पार के आदेश कर दिए गए तथा १५ दिन दिल्ली में बाबा के  प्रवेश पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है . जो सरकार देशद्रोहियो को बिरयानी खिलाने के लिए जिन्दा भी रखती है और पास भी ,उसी सरकार को बाबा के दिल्ली में रहने पर खतरा महसूस होता है .बात सिंपल है  जिस दिल्ली में बड़े -बड़े ठग रहते हो वहां छोटे ठगों का प्रवेश वर्जित होना ही चाहिए ,तभी दिल्ली का अंतर्राष्ट्रीय स्टैण्डर्ड बनेगा. 
अभी लड़ाई जारी है .अब लड़ाई में दूसरे दलों के नेताओ ने जो थोड़े छोटे ठग है उन्होंने भी हाथ बटाने का निर्णय किया है .भाजपा के लोग राज घाट पर  गाँधी की समाधी पर अनशन करेंगे मुलायम और मायावती भी बाबा का लड़ाई में साथ देंगी यानि अब मोर और सांप एक डाली पर रहेंगे .और भी कई रणनीतिया  बनेगी देखना है की निर्णायक लड़ाई की बाजी किसके हाथ लगती है.

अजय सिंह "एकल"














Thursday, May 19, 2011

मुंबई मे छोरा,पाकिस्तान मे ढिंढोरा .

  
दोस्तों, 
इसे कहते हैं सफलता ,इसे कहते है तेजी .भारत सरकार ने आखिरकार ५० ऐसे आतंकियो की सूची जारी कर दी जिनकी अरसे से देश को तलाश थी .जारी लिस्ट के कम से कम दो लोग पहले से ही हिंदुस्तान में थे. 

फिरोज अब्दुल खान नामक आतंकी पहले से ही भारत
 की जेल में बंद है और वजाहुल कमर खान नाम का  दूसरा आतंकी  जरा जेल के बाहर था और अपने परिवार के साथ मुंबई के पास में जिला ठाणे में रह रहा था ,और  बाकायदा अपनी अदालती तारीखों में पिछले कई वर्षो से अदालत में जा रहा था यानि पुलिस और अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज था .

अब लोग ये कह रहें है की गृह मंत्री चिदंबरम की गलती है और उनकी टीम नाकारा है , कल दबाव में उन्होंने भी यह कह दिया की चलो मानवीय गलती हो गए होगी  ,जब बड़े काम करने हो तो छोटी -मोटी गलती हो  ही जाती है.
पर मै तो कहता हूँ  इससे ज्यादा अच्छा क्या हो सकता है की  जिसे वोह  पाकिस्तान से लाना चाहते थे वो 
इनकी ही जेल मे बंद  था. राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने अपनी कविता चेतक मे राणा प्रताप के   प्रिय एवं स्वामिभक्त घोड़े का जिक्र कुछ यों किया है "राणा की पुतली फिरी नहीं तबतक चेतक मुड़ जाता था " उसी तरह अब हम निश्चिन्त  हो कर कह सकते है की गृह मंत्री  चिदम्बरम के हाथो में देश सुरक्षित है और उनकी टीम इतनी प्रतिभाशाली है की सूची जारी होने से पहले ही अपराधी जेल मे आ जाता है .वैसे फिल्म स्टार मनोज कुमार की  एक पिक्चर थी " दस नम्बरी"  उनका कहना भी यही था की ऊँगली देखते ही ताला खुल जाता था  और इशारा  पाते ही मॉल उधर का इधर हो जाता था वगैरा -वगैरा .तो भाई साहेब अब आपने देख लिया न चिदम्बरम की टीम के चेतक और दस नंबरियो की करामत इसलिए इसे अब उनकी गलती बताने के बजाये इसको राष्ट्रीय  अभिमान बताना चाहिए .और इनको हिंदुस्तान का प्रधान मंत्री बनाने के लिए प्रयास होना चाहिए .आप विश्वास कीजिये  पाकिस्तान और अमरीका मिलकर यह कर सकते है .आखिर जब इनके कहने पर दूसरे  मंत्री बन सकते है तो प्रधान मंत्री क्यों नहीं. और अब तो लादेन भी जिन्दा नहीं है अमरीका के मंसूबो को रोकने के लिए .हालाँकि अमरीका को पता है की मनमोहन कौन निर्णय अपने आप करते है वो भी तो हिंदुस्तान मे विदेशियो का ही हित साधते है नहीं तो कात्रोची कैसे छूट जाता और विदेशो मे जमा धन वापस लाने के लिए क्यों प्रयास नहीं किये जाते. इसे कहते है की मुंबई मे छोरा और पाकिस्तान मे ढिंढोरा .

राष्ट्रीय शर्म की बात तो राहुल गाँधी ने पहले ही मान ली  है भट्टा परसोल मे .राहुल का कहना है की ग्रेटर नॉएडा के भट्टा परसोल मे जितनी ज्यादती किसानो के साथ हुयी है इससे उन्हें अपने को  भारतीय कहने कहने मे शर्म आ रही है .मुझे थोडा भ्रम हो गया यह सुनकर .मैं सोंच में पद गया  की उन्हें  शर्म तब क्यों नहीं आई जब जैतपुर मे किसानो की उपजाऊ जमीन बिजली संयंत्र लगाने के लिए ली गयी , किसानो पर लाठी चलाई गयी और किसान मारे गए क्योंकि वहा प्रदेश मे सरकार कांग्रेस की है , और काग्रेस राज मे ये तो आम बात है दरअसल शर्म इस बात पर है की कांग्रेस के रहते किसानो की पिटाई और लूट का काम माया वती की पार्टी ने कैसे कर दिया .और उस पर तुर्रा यह १९ मई को प्रदेश सम्मलेन मे राहुल ने यह घोषणा भी कर दी की अब हम उत्तर प्रदेश के हर गाँव -गाँव मे वो करंगे जो ग्रेनो मे हुआ .मेरी तो रूह कॉप रही है राहुल की बात सुन कर.

कांग्रेस सम्मलेनके समापनमे सोनिया कहती है जिनके घर शीशे के
होवो दूसरो  पर पत्थर नहीं फेकते  है ,मुझे नहीं पता नहीं की वक्त पिक्चर मे यह 
 डायलाग जब बोला गया थातो उसका मतलब क्या रहा होगा पर इतना पक्का है इस डायलाग को राजनीतिज्ञ बखूबी इस्तेमाल कर रहे है और वो विरोधी पार्टी को यह ही बताना चाहते है की भाई न तुम मेरी कहो न मै तुम्हारी कहूँ , जनता का क्या वो तो है ही आम जनता जिसको आम की तरह चूस कर   राजनीतिज्ञ गुठली की तरह कभी भी फेंक सकते है ,इसलिए जब सत्ता मे तुम  हो तो तुम और जब मेरी बारी हो तो हम .अगर ऐसा नहीं होता तो अंतर्राष्टीय बाज़ार मे कच्चे तेल के दाम बढ़ने पर भी हमने  देश मे इलेक्शन ख़तम होने के पहले तेल के दाम बढ़ने नहीं दिया और इलेक्शन परणामो के २४ घंटे ख़तम होने के पहले दाम बढ़ा दिए और ये तो तब है जब हमने पेट्रोल की कीमतों पर से सरकार का नियंत्रण हटा दिया हैऔर तेल कंपनियो को दाम तय करने का अधिकार दे दिया है  . अब हम जनता की सोचे की अपने सत्ता मे रहने का जुगाड़ करे .जनता का क्या है थोड़े दिन मे भूल जाएगी वैसे भी हमने इतनी परेशानिया जनता के लिए खड़ी कर रखी है की वो उनको सुलझाने मे ही निपट जाएगी  .और फिर इलेक्शन मे तो अभी बहुत दिन है . इलेक्शन होगा तो फिर कोई लाली पाप थमा देंगे.लेकिन हम और तुम तो शीशे के घर मे है इसलिये पत्थर न फेके और न दूसरे को ऐसा करने को उकसाएँ नहीं तो जनता जान जाएगी हमारा  सच . 

अब इतना  सबकुछ जानने के बाद हम तो केवल ये ही कह सकते है की "बर्बाद गुलिश्ता (प्रदेश ) करने को बस एक ही उल्लू  काफी है ,अंजामे गुलिश्ता क्या होगा हर साख पर उल्लू बैठा है". इसको पढ़ कर आप बुरा न माने उल्लू लक्ष्मी की सवारी है और हर समझदार आदमी चाहता है की लक्ष्मी उसके पास रहे यानि सवारी करे.  



अजय सिंह "एकल"

Wednesday, May 11, 2011

वाह ओबामा,बाय ओसामा

दोस्तों,  
आखिर वो घड़ी आ ही गई जिसके इंतजार में बिचारे किल्टन की कुर्सी चली गई और ओबामा की जाते-जाते रह गई . ओसामा जी (दिग्विजय जी का संबोधन यही है) आखिर को मारे गए ,लेकिन ओसामा मरा वीरो की तरह ही ,एक  निहत्थे को मारने पूरी फ़ौज आई और मार कर अपने साथ ओसामा के बेटे को भी ले गई है(वैसे  डकैत भी यही करते है मरने के बाद लूट का माल साथ ले जाते है )   अमरीका ने मारे डर  के  ओबामा के मरने के फोटो तक सार्वजनिक नहीं किये है अब कौन जाने की मरा वही ओसामा है की कोई और .मैंने तो सुना है  की  बड़े आदमी  अपने साथ बहुत सारे हमशकल लोगो
 को साथ रखते है  ताकि दुनिया को धोखा दे सके (ये अलग बात है ही बिना धोखा दिए बड़ा बनना मुश्किल है   और अगर बन गए तो बने रहना मुश्किल है ) और ये पता ही नहीं चले  की  असली कौन है .भगवान जाने की असलियत क्या है लेकिन इतना तय है ओसामा के मरने के बाद भी अभी ओसामा का जिन  अमरीका को आसानी से जीने नहीं देगा ,अच्छा है अमेरिका     और किसी से तो डरने से रहा.

लेकिन इन सारी घटनाओ से कुछ बाते तो अब स्पष्ट ही है ,मसलन ओबामा जब भारत आये तो उनके भारत की पार्लियामेंट में दिए भाषण में ३६ बार तालिया बजी थी जिसमे  कम से कम तीन बार ओबामा ने अपने भाषण में गाँधी जी का नाम ले कर अपने को गाँधी ही नहीं बल्कि दक्षिण अफ्रीका के नेल्सन मंडेला ,जो की जाने माने गाँधी वादी है का भी फालोवर बता दिया था और हमारे लोगो ने उनकी इस बात को सुन कर के तरह -तरह से कशीदे काढने शुरू कर दिए. हम हिन्दुस्तानी तो मौके के इन्तजार में ही रहतेहै और जैसे ही मौका मिलता है ताकतवर ,पैसे वालो की तारीफ में लग जाते है और अपना फायदा ढूंढने  लगते है . नतीजा यह की आम  लोगो ने विश्वाश कर लिया की अब इतना बड़ा आदमी १० हजार  किलोमीटर चल कर कोई झूठ बोलने थोड़ी आयेगा ,मगर भाई ये तो राष्ट्रपति से ज्यादा सेल्स मैन निकल गया . गाँधी का नाम ले कर   लड़ाकू जहाज हिंदुस्तान को बेचने का सौदा किया, और दुनिया में  अहिंसा की बात करते करते मौका मिलते ही हिंसा कर गया .
गाँधी लेकिन अब हिंदुस्तान में भी गाँधी वादी कहाँ है? बस इज्जत बचा ली दिग्विजय सिंह जी ने. ओसामा को ओसामा जी कह कर और सिद्ध कर दिया की नफरत पापी के पापे करो न की पापी से . अब लोग चाहे जो भी कहे ,अगर दिग्विजय ऐसा नहीं करते तो दुनिया में लोग तो यही कहते की जब गाँधी के देश में ही कोई गाँधी वादी नहीं बचा तो फिर ओबामा का क्या वो तो है ही सेल्स मैन, अरे वो तो वही कहेगा जो खरीदार को पसंद हो इसलिए जब खरीदार गाँधी के देश का हो तो  गाँधी  की तारीफ करने में क्या हर्ज है .
हालाँकि दिग्विजय ने तो उसी दिन कह दिया था की ओसामा ने चाहे जो किया है ,कितना भी बड़ा आतंक वादी है लेकिन मरने के बाद तो उसकी अंतिम क्रिया उसके धर्म के हिसाब से ही होनी चाहिए,लेकिन उसदिन सारी दुनिया ओसामा के मरने की ख़ुशी मना रही थी तो टायमिंग गलत हो गई और लोगो ने ध्यान ही नहीं दिया ,इसलिए दुबारा ओसामा जी कह कर दुनिया का ध्यान खीचना  पड़ा .धन्यवाद दिग्विजय  सिंह जी    बड़ीसेबड़ी घटना होने पर भी अपने  कर्त्तव्य से न डिगने के लिए.

मै तो खैर वैसे भी आपकी और आपकी टीम की कर्त्तव्य शीलता का कायल हूँ, अब देखो न आखिर कसाब को पकडे जाने के ३ साल बाद भी आपकी  सरकार ने     क्या उसको मारा ,क्या उसको फांसी दी, हालाँकि विपक्ष के लोग तो पीछे पड़े है तरह -तरह के आरोप भी लगा रहे है ,मगर कोई मजाल की आप टस से मस हो जाये . अब आप ही बताइए जब नफरत पाप से करना है तो पापी को फाँसी क्यों दे .उलटे हम तो उसको वकील दे रहे है, जज बदल रहे है की शायद कोई  तो जज गाँधी वादी निकलेगा जो इसके कसूर को माफ़ कर देगा इस देश में .यही हमने अफजल गुरु के लिए भी किया है .रोज लाखो खर्च हो रहे है तो क्या हुआ , अब हम गाँधी के देश में पैदा हुए है, सोनिया गाँधी का नमक खा रहे है और ये ही हल रहा तो जल्दी ही राहुल गाँधी का नमक खाना पड़ेगा तो भइया अपनी CR क्यों ख़राब करवाएं पता नहीं कब नंबर आ जाये  मिनिस्टर बनने का .आखिर आदमी के भविष्य और त्रिया चरित्र का पता जब देवताओं को नहीं चलता तो मैं तो कांग्रेस का एक कार्यकर्ता मात्र हूँ ये पंगा मैं तो नहीं लूँगा .और गाँधी से जिसने पंगा लिया उन सबका हस्स्र क्या हुआ ,पानी देने वाला भी नहीं मिलता है जनाब .वायु यान से गिरने के बाद लाश तक नहीं मिलती सुभाष चन्द्र बोस से लेकर माधव राव सिंधिया  का उदाहरण सामने है .तो फिर काहे को शूरवीर बनना .पिता जी ने नाम दिग्विजय रख दिया तो इसका मतलब ये तो नहीं की गाँधी से पंगा लूँ ,इसलिये समझदार आदमी हूँ और समझदारी से काम करता हूँ. मुझे पता है की "एक साधे सब सधे ,सब साधे सब जाये ,रहिमन सींचे मूल  को फूले फले अघाए " इसलिए भैया मेरे तो गाँधी ही गाँधी दूसरो न कोई.


तो बस आप लोग भी समझ जाओ और समझ दारी दिखाओ ,गाँधी के नाम पर देश लूटना आसान है तो बस चुप चाप लूटे जाओ और कोई कुछ बोले तो उसको गाँधी का दुश्मन बता के गोडसे की जमात में खड़ा कर दो बस हो गई उसकी छुट्टी .एक बार गाँधी विरोधी  इमेज बना दो तो फिर जिन्दगी में इलेक्शन नहीं जीत सकता और कोई कहे कुछ भी  आखिर जीतने वाले लोग तो सब पार्टियो को ही चाहिए .

अंत में गाँधी बापू जिंदाबाद ,फिर कोई मरा तो देखेंगे की क्या बयान देना है,बयान    पार्टी को सूट करेगा    तो अधिकारिक मान लेना नहीं तो मुझे दो चार गाली दे लेना .

अजय सिंह "एकल"















Thursday, April 7, 2011

अकेला चना

 दोस्तों,

बचपन में  पढ़ा था की अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता ,पढने के बाद जिन्दगी  की  व्यस्तताओ में सोचने का मौका ही नहीं मिला की वास्तव में यह सही  था या नहीं ,परन्तु अन्ना हजारे के अनशन पर बैठने के बाद तो यह पक्का हो गया की चना जब भी भाड़ फोड़ेगा तो  वोह अकेला ही होगा .चाहे गाँधी हो ,विवेकानंद या सुभाष चन्द्र बोस सब अकेले ही चले थे घर से ,बस लोग मिलते गए काफिला बनता गया .

अन्ना की टीम के अरविन्द केजरीवाल  समय पूर्व अवकाश प्राप्त IRS अधिकारी है जिन्होंने भ्रस्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए सरकार की नौकरी छोड़ी ,श्रीमती किरण बेदी एक Ex.IPS अधिकारी है  और   ये उन हजारो-लाखो देशवाशियो की नुमाइंदगी अन्ना हजारे के आन्दोलन में कर रहे है जिन्होंने देश से भ्रष्टाचार ख़तम करने की मुहीम चलाई हुई है. इस आन्दोलन का परिणाम क्या निकलेगा ,भ्रस्टाचार ख़तम हो जायेगा  या नहीं यह तो समय बताएगा लेकिन इतना तो निश्चित है लोगो  का   आत्म विश्वाश बढेगा और भ्रस्टाचार के खिलाफ जागरूकता बढ़ेगी .इस से शायद कुछ नेताओ और अफसरों  की मरी हुई आत्माए भी जी उठे .


एक बात और जो निश्चित रूप से होने वाली है वोह यह की जो लोग सोचते थे की भगत सिंह पडोसी के यहाँ पैदा हो तो ठीक है उन्हें पता चलेगा की अब भगत   सिंह उनके घर में ही जन्म ले चुके है .जिस उत्साह  से विद्यार्थी और दुसरे यंग प्रोफेसनल इस  आन्दोलन में सक्रीएता से  भाग ले रहे है उस से तो यही लग रहा है .


हांलाकि अन्ना, गाँधी की तरह न तो पढ़े लिखे है और न ही उतने अमीर परिवार से है लेकिन जिस साफगोई से बात कहते है और दलील देते है वोह निश्चित ही काबिले तारीफ है .उनकी यह कमजोरी ही उनकी ताकत भी है जो आन्दोलन को आम आदमी से जोड़ने में समर्थ हुई है. 


भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुए    इस आन्दोलन और आजादी के आन्दोलन की तुलना करने पर ऐसा लगता है की यह आन्दोलन ज्यादा  मुश्किल है क्योकि यहाँ पक्ष और विपक्ष दोनों में अपने ही लोग है और वोह कब अपने रिश्तेदार की तरफ से छद्म वकालत शुरू करदेंगे  और कब  पहचाना जायेंगे  और जब तक पहचान में आए तब तक   कितना नुकसान करेंगे  इसका पूर्व अनुमान लगाना  मुश्किल  है . लेकिन खैर यह गणित तो उन लोगो के लिए है जो दर्शक है या विचारक है ,जो योद्धा होते है उन्हें तो लड़ने से फुर्सत ही  तब मिलती है या तो जब जीत  जाते है या हार जाते है . 


स्वतंत्रता आन्दोलन के बाद जय प्रकाश नारायण के आन्दोलन ने जिस तरह युवाओं को आंदोलित किया था अन्ना के भ्रष्टचार विरोधी आन्दोलन का प्रभाव उस से कम नहीं है .एक बात जो दोनों में कामन  है वोह है काग्रेस का गाँधी परिवार .उस आन्दोलन में इन्द्रा गाँधी शीर्ष पर थी और इसमें सोनिया गाँधी है ,उसमे ढिल्लो जैसे लोग इन्द्रा को इंडिया बताते थे तो इसमें स्वयं मनमोहनसिंह जी कुछ उसी सुर में गुणगान करते है और सोनिया तो क्या राहुल के लिए कुर्सी छोड़ने की घोषणा प्रेस कान्फेरेंस में कर रहे है .


खैर हम   भारत वासी अब चाहे भारत में   रहते है या फिर   दुनिया   में कही  और , सब इस आन्दोलन से मानसिक और शारीरिक रूप से जुड़ गए है ,और ये  इस धरती  की ताकत ही है  जो "सत्यमेव  जयते " का घोष करती है  अत: इसका इस आन्दोलन का  परिणाम भी अच्छा होगा सच जीतेगा और ये ही देश हित में होगा ,जन हित में होगा ऐसा  हम सब का विश्वास है.


भारत माता की जय 


अजय  सिंह"एकल"  

Saturday, April 2, 2011

बलि हारी गुरु आपने....

दोस्तो,ं
 दरअसल क्रिकेट के बारे में मेरा ज्ञान भी किसी आम भारतीयों  के जैसा ही है.इसलिए  जब भी  क्रिकेट का  जिक्र होता है  तो सचिन तेंदुलकर ,महेंद्र सिंह धोनी और दूसरे टीम मेम्बर का ही नाम ध्यान आता था.आज फ़ाइनल मैच में पहेली बार साउथ अफ्रीका के क्रिकेट खिलाडी और भारतीय टीम के कोच और     गुरु गैरी क्रिस्टन का नाम आया तो पता चला की सक्षम गुरु क्या नहीं करवा सकता है .परदे के पीछे रह कर बिना किसी लालच के गैर्री आपने जो काम किया है हम भारतीय आपके आभारी है और आने वाले अनेक वर्षो तक आपका गुण गान करते रहेंगे .

२८ साल के बाद भारत को यह गौरव  शील जीत हासिल हुई है भारत के १२१ करोड़ लोगो की तरफ से भारतीय टीम को बधाई  तथा कोच एवं गुरु गैरी का धन्यवाद .


मै तो केवल यह कहूँगा

गुरु गोविन्द दोनों      खड़े काके लागों पाएं
बलि हारी गैरी आपने वर्ड कप दिओ जिताय.

अनेक बधाई भारत को ,भारतीयों को और टीम भारत को ,

अजय सिंह "एकल"

Friday, March 18, 2011

बुरा ना मानो ...

खींचो न कमानों को, न तलवार निकालो
जब तोप मुकाबिल हो, तो अख़बार  निकालो
                                                        ~   अकबर इलाहाबादी


दोस्तों,
वो पुराना जमाना था जब अख़बार निकालने की बात होती थी .अब तो मुकाबले के लिए वेब साईट होती है .सो बना दी विकिलीक्स ने और चल पड़ा मुकाबला करने.पता नहीं क्यों खुन्नस थी
अमरीका से   और तोप  का  मुहं घुमा दिया भारत की तरफ.और  खामखाँ    में मुसीबत खड़ी     करदी संकट मोचन दादा के लिए.अब दादा कहते है की सब कुछ टाइम बाउन्ड होना चाहिए १४वी लोकसभा के भ्रस्टाचार का जिक्र १५वी में कैसे हो सकता है . इससे कोई मतलब नहीं की लोग वही है. सरकार भी उसी पार्टी की है तो भी क्या हुआ ? यहाँ तक की  प्रधानमंत्री भी  वही है ,लेकिन सापेक्षता का सिधान्त तो यही बताता है न  की टाइम बदल जाने से पोजीशन    बदल जाती है ,इसलिए  अब यह चर्चा उचित नहीं है .

वैसे भी एक बार कह तो दिया प्रधानमंत्री ने  प्रेस कान्फरेंस में ,केवल प्रेस नहीं टीवी के सामने भी मान लिया  की गलती हो गयी मगर उतनी नहीं है जितनी आप लोग कह रहे है .आखिर मै क्या-क्या  कर सकता हूँ .अगर प्रधान मंत्री कार्यालय से  होने वाले के CVC के बायो  डाटा  की  रिपोर्ट गलत आयी ,या थामस साहेब ने ऐसी सेटिंग की ,कि किसी को पता ही नहीं चला की वोह पुराने घोटालेबाज हैऔर यहाँ भी अपनी चल चलेंगे और दाल गला लेंगे ,तो मै क्या कर सकता हूँ .मै प्रधान मंत्री हूँ ,अर्थशास्त्री हूँ लेकिन जादूगर नहीं हूँ ,कि बिना  बताये सब कुछ जान जाऊ  .और ये विपक्ष के पास तो न कोई काम न धाम बस जय सिया राम , न जाने कहा -कहा से सूचना ले आता    है विपक्ष.अगर मै इन बातो पर इस्तीफा दे देता तो अब तक कम से कम २०-३० बार देने का वर्ड  रिकार्ड बन जाता .और मैं दुनिया का सबसे ज्यादा बार इस्तीफा देने वाला प्रधान मंत्री बन जाता .लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया क्योंकि मुझे देश कि चिंता है.  दूसरा प्रधानमंत्री   जो मुझ से भी ज्यादा भ्रष्टाचारी निकला तो क्या करोगे .अब देखो न ६२ बरस के बाद भी लोग कहते है न कि इनसे तो अंग्रेज ही ठीक थे ,उनके ज़माने में घी २ रुपिया किलो बिकता था और कम से कम अत्याचार तो मानवता कि हद मे   रह कर करते थे .मेरे जाने के बाद  फिर ऐसे ही कहते घूमोगे कि इन बतोले बाजो से तो चुप्पा सिंह ही ठीक थे .कम से कम बोलते तो  नहीं थे ,और भ्रष्टाचार करने वालो को भी  पूरा मौका देते थे .क्योकि मै तो यह मानता हूँ कि दर्द का हद से गुजर जाना ही है खुद दवा होना .गीता मै भी लिखा है कि पाप का घड़ा भरेगा  तो फूटेगा ,तब भगवान का अवतार होगा ,तो मै अब   आप पर यह आरोप लगाता हूँ  कि  विपक्ष नहीं चाहता कि भगवान  जरा जल्दी से   पुनः  इस पवित्र भारत भूमि मै   जन्म ले और देश और प्रजा का  कल्याण करे . इसलिए मेरा मुहं मत खुलवायिए तो ही बेहतर है .

  अच्छा थोड़ी देर के लिए मान लो कि मै त्यागपत्र दे भी दूँ तो प्रधानमंत्री की कुर्सी  क्या लौह पुरुष को या सुषमा स्वराज को मिल जाएगी ? और मिल भी गयी तो क्या कर लेंगी ,जरा सी धमकी यदुरप्पा ने दी कि सबकी पोल खोल दूंगा तो ऊपर से नीचे  तक सब कि सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई .तो पहले  अपने घर में ठीक कर लो फिर मुझे कहना .याद रखना जब आप  एक उंगली दूसरे पर उठाते हैं तो आपकी  चार   उँगलियाँ आप की ओर इशारा करती हैं.

मै तो यहाँ तक कहता हूँ कि तुम जो मेरा साथ दो तो मै एक क्या सौ विकिलीक्स कि तोपों का मुहं घुमा दूँ ,नहीं तो भैया तुम जानो और तुम्हारा काम ,मेरा काम था चेताना इसलिए बता दिया वरना देवी जी याद रखना जिनके घर शीशे के बने होते है वोह कपड़े बेसमेंट  मै बदलते है .

बाबा रामदेव तो वैसे भी सफाई अभियान मे लगे है इसलिये २०१४ के इलेक्शन  के बाद तो किसी का भी प्रधान मंत्री बनना मुश्किल है. इसलिए ज्यादा खिटिर पिटर मत करो मजे से सोनिया एंड कंपनी के भ्रष्ट अचार   के साथ खाना खायो और होली में  मौज उडाओ तुम भी और मैं भी .

होली की शुभकामनाओ सहित ,

अजय सिंह "एकल"