आइए देखे हिन्दू धर्म क्यों सरेहश्रेष्ठ है और मुसलमान धर्म मात्र एक नक़ल :
This blog is about the incidents and happenings in and around us which are affecting the country either way. I am raising these issues through this blog which are other wise left behind but need attention.
Wednesday, May 18, 2016
हिन्दू और मुसलमान धर्म
1.कितने हिन्दू भाइयों को ही क्या मुसलमानो को भी ये न पता होगा की पैगम्बर सिकंदर के 500 साल बाद पैदा हुए था।
Friday, May 6, 2016
तेरी कमीज मेरी कमीज से सफ़ेद कैसे?
मित्रो,
जब से मोदी प्रधान मंत्री बने है रोज कोई न कोई नया बवाल खड़ा हो जाता है। इसमें अधिकांश ऐसे है जिनका समाज अथवा देश के लिए केवल इतना महत्व है की वह देश की अथवा मोदी की बदनामी करवाने की असफल कोशिश करते दिखाई देते है। हालाँकि ज्यादातर ऐसे आरोप प्रिंट या सोशल मिडिया अथवा और कहीं भी एक या दो दिन ज्यादा चर्चा में नहीं रहते है । लेकिन चटखारे लगा लगा कर गॉसिप करने वालो का टाइम पास तो हो ही जाता है।
अरविन्द केजरीवाल के मुख्य मंत्री बन जाने के बाद मानों बन्दर के हाथ अस्तुरा लग गया है। अपने पद और बुद्धि पर घमन्ड ने पहले तो उन्हें उन अपनों से दूर किया जिनकी सहयता से पद पर पहुंचे। फिर पार्टी के सिद्धांतो के लिए समर्पित सैकड़ो कार्य कर्ताओ से दूर किया। पता नहीं कैसे और किन सलाहकारों ने केजरीवाल को अपना काम छोड़ कर बाकी दुनियाँ की चिंता करने की सलाह दी है। इसीलिए कभी मोदी खिलाफ चुनाव कभी योगेन्द्र यादव से मारपीट और अब मोदी की डिग्री की की चिंता उन्हें दिन सता रही है। शायद उन्हें यह ग़लतफ़हमी गयी है की यदि मोदी की डिग्री नकली साबित हो जाये तो उनका प्रमोशन हो जाएगा और वह मुख्यमंत्री प्रधान मंत्री जायेंगे।
वैसे यह ख्वाब देखने वाले वह अकेले मुख्यमंत्री नहीं है। नितीश बाबू ने भी ख्वाब सजाया है और हो भी क्यों न आखिर जिन के खिलाफ लड़ाई लड़ कर राजनीत में अपनी जगह बनाई उनकी गोद में बैठ कर एक बार फिर पद प्राप्त हो गया है इसलिए बिहार की चिंता कम देश की चिंता ज्यादा कर रहे रहे है। इसीलिए अब उन्होंने संघ मुक्त भारत बनाने की घोषणा कर दी है।
मैंने सुना था की पढ़ लिख कर आदमी विनम्र हो जाता है समझदार हो जाता है लेकिन अरविन्द को देख कर लगता है की बड़े और नामी गिरमी संस्थानों में पढाई करके आदमी चालक और घमण्डी हो जाता है जिसको अपने स्वार्थो के सिवाय न कुछ दिखाई देता है न सुनाई देता है। नहीं तो दिल्ली की दशा सुधरने के बजाय ख़राब न होती। जिन वादों से कुर्सी मिली उनका कोई जिक्र पद पर आने के बाद न होना हर दिन केवल और केवल नए विवादों को जन्म देकर सुर्खियों में बने रहना ही उनका काम रह गया है। इसलिए केजरीवाल अपनी सारी ताकत ने मोदी की डिग्री को नकली सिद्ध करने में लगा दिया है। हम तो केवल उन्हें भगवान सद्बुद्धि दे यह प्रार्थना ही कर सकते है। अरविन्द को पता नहीं की कितने ही ऐसे लोग जिन्होंने स्कूल या कालेज का मुंह भी नहीं देखा बड़े बड़े संस्थानों से पढ़ने वल उनकी नौकरी करते है। उदाहरण के लिए धीरु भाई अम्बानी ,जमशेद जी टाटा जैसे सैकड़ो लोग मौजूद है। नौकरी पाने के लिए बड़ी पढाई जरुरी है लेकिन जीवन में सफलता बुद्धिमानी ,विनम्रता और दूसरों को सम्मान देने से मिलती है।
मोदी का विरोध चाहे व्यक्तिगत हो अथवा सैद्धांतिक इसी काम को प्राथमिकता देकर सभी विरोधी जिसमे कांग्रेस भी शामिल है कर रहे है। मोदी देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को ठीक करने के लिए रात दिन जुटे है और बाकी मिलकर इस कोशिश में लगे है की अपनी कमीज को मोदी की कमीज से ज्यादा सफ़ेद कैसे सिद्ध कर दे। लेकिन शायद इन्हे पता नहीं कीदूसरे की कमीज गन्दी करने से अपनी कमीज साफ़ नहीं होती बल्कि अपनी कमीज को साफ़ करने से वह दूसरे कमीज से ज्यादा साफ़ दिखती है।
भगवान सभी को सद्बुद्धि दे।और जो जिम्मेदारी अरविन्द को दिल्ली की जनता ने उन्हें देकर अपना विश्वास दिया था उसे वह पूरा करेंगे ताकि त्राहि त्राहि करती जनता को राहत मिले।
और अंत में
दुश्मनी करो तो इतनी
की गर हम फिर दोस्त
हो जाये तो शर्मिंदा हो।
अजय सिंह "जे एस के "Saturday, April 30, 2016
Bhagvat Geeta One setence per chapter
Chapter 1 :
Wrong thinking is the only problem in life
Chapter 2 :
Right knowledge is the ultimate solution to all our problems
Chapter 3 :
Selflessness is the only way to progress and prosperity
Chapter 4 :
Every act can be an act of prayer
Chapter 5 :
Renounce the ego of individuality and Rejoice in the Bliss of Infinity
Chapter 6 :
Connect to the Higher Consciousness Daily
Chapter 7 :
Live what you learn
Chapter 8 :
Never give up on yourself
Chapter 9 :
Value your blessings
Chapter 10 :
See divinity all around
Chapter 11 :
Have enough surrender to see the Truth as it is
Chapter 12 :
Absorb your mind in the Higher
Chapter 13 :
Detach from Maya and Attach to Divine
Chapter 14 :
Live a lifestyle that matches your vision
Chapter 15 :
Give priority to Divinity
Chapter 16 :
Being good is a reward in itself
Chapter 17 :
Choosing the right over the pleasant is a sign of power
Chapter 18 :
Let Go, Lets move to Union with God
Ved Vyasa.....author of Bhagvat Geeta
In last
Awesome. Blessed children.... :
They are the children of Prof Christopher doing research on
Bharatiya samskruti in Banaras university They both can chant all the
18 chapters of Bhagavadgita
17 points that always keep in your mind
दुकान सोने की है या कोयले की।
और अंत में
झांक रहे सब सबके आँगन,अपने आँगन झाँके कौन?
ढूँढ रहे दुनियाँ में खामी,अपने मन में झाँके कौन?
सबके भीतर चोर छुपा है,उसको अब ललकारे कौन?
दुनियाँ सुधरे सब चिल्लाते,खुद को आज सुधारे कौन?
पर उपदेश कुशल बहुतेरे,खुद पर आज बिचारे कौन?
हम सुधरें तो जग सुधरेगा,इस मुद्दे पर सब हैं मौन?
ढूँढ रहे दुनियाँ में खामी,अपने मन में झाँके कौन?
सबके भीतर चोर छुपा है,उसको अब ललकारे कौन?
दुनियाँ सुधरे सब चिल्लाते,खुद को आज सुधारे कौन?
पर उपदेश कुशल बहुतेरे,खुद पर आज बिचारे कौन?
हम सुधरें तो जग सुधरेगा,इस मुद्दे पर सब हैं मौन?
अध्यापक
किसी ने साधारण से दिखने वाले शिक्षक से पूछा -क्या करते हो आप ? शिक्षक का सुन्दर जवाब देखिए-
सुन्दर सुर सजाने को साज़ बनाता हूँ ।
नौसिखिये परिंदों को बाज़ बनाता हूँ ।।
नौसिखिये परिंदों को बाज़ बनाता हूँ ।।
चुपचाप सुनता हूँ शिकायतें सबकी ।
तब दुनिया बदलने की आवाज़ बनाता हूँ।।
समंदर तो परखता है हौंसले कश्तियों के ।
मैं डूबती कश्तियों को जहाज़ बनाता हूँ ।।
मैं डूबती कश्तियों को जहाज़ बनाता हूँ ।।
बनाए चाहे चांद पे कोई बुर्ज-ए- ख़लीफ़ा ।
अरे मैं तो कच्ची ईंटों से ही ताज बनाता हूँ ।।
अरे मैं तो कच्ची ईंटों से ही ताज बनाता हूँ ।।
Thursday, January 28, 2016
आज कल के हालात पर पत्रकारो/मिडिया को नसीहत
आज कल के हालात पर पत्रकारो/मिडिया को नसीहत
आज कलम का कागज से ,मै दंगा करने वाला हूँ,.
मीडिया की सच्चाई को मै ,नंगा करने वाला हूँ।
मीडिया जिसको लोकतंत्र का ,चौंथा खंभा होना था,
खबरों की पावनता में ,जिसको गंगा होना था।
मीडिया की सच्चाई को मै ,नंगा करने वाला हूँ।
मीडिया जिसको लोकतंत्र का ,चौंथा खंभा होना था,
खबरों की पावनता में ,जिसको गंगा होना था।
आज वही दिखता है हमको,वैश्या के किरदारों में,
बिकने को तैयार खड़ा है ,गली चौक बाजारों में।
दाल में काला होता है ,तुम काली दाल दिखाते हो,
सुरा सुंदरी उपहारों की,खूब मलाई खाते हो।
गले मिले सलमान से आमिर,ये खबरों का स्तर है,
और दिखाते इंद्राणी का ,कितने फिट का बिस्तर है।
म्यंमार में सेना के ,साहस का खंडन करते हो,
और हमेशा दाउद का,तुम महिमा मंडन करते हो।
हिन्दू कोई मर जाए तो ,घर का मसला कहते हो,
मुसलमान की मौत को ,मानवता पे हमला कहते हो।
लोकतंत्र की संप्रभुता पर ,तुमने कैसा मारा चाटा है,
सबसे ज्यादा तुमने हिन्दू,मुसलमान को बाँटा है।
साठ साल की लूट पे भारी ,एक सूट दिखलाते हो,
ओवैसी को भारत का तुम ,रॉबिनहुड बतलाते हो।
दिल्ली में जब पापी वहशी ,चीरहरण मे लगे रहे,
तुम एश्श्वर्या की बेटी के,नामकरण मे लगे रहे।
दिल से' दुनिया समझ रही है, खेल ये बेहद गंदा है,
मीडिया हाउस और नही कुछ,ब्लैकमेलिंग का धंधा है।
गूंगे की आवाज बनो ,अंधे की लाठी हो जाओ,
सत्य लिखो निष्पक्ष लिखो ,और फिर से जिंदा हो जाओ।
दिल्ली में जब पापी वहशी ,चीरहरण मे लगे रहे,
तुम एश्श्वर्या की बेटी के,नामकरण मे लगे रहे।
दिल से' दुनिया समझ रही है, खेल ये बेहद गंदा है,
मीडिया हाउस और नही कुछ,ब्लैकमेलिंग का धंधा है।
गूंगे की आवाज बनो ,अंधे की लाठी हो जाओ,
सत्य लिखो निष्पक्ष लिखो ,और फिर से जिंदा हो जाओ।
(उपरोक्त कविता व्हाट्स अप पर प्राप्त हुई है )
Thursday, December 31, 2015
सोने की चिड़िया भारत
दोस्तों ,
जिंदगी में कभी -कभी ऐसे क्षण आते की समझ में नहीं आता की रोऊँ या हसूँ। साल खत्म होते होते टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपे एक संचार को पढ़ने के बाद मेरा यही हाल हुआ,अब यह आप पर निर्भर करता है की आपको यह कैसा लगता है।
समाचार यह है की देश अनुमानित साढ़े तीन लाख भिखारिओ में करीब पाँचवा हिस्सा यानि 70000 लोग कम से कम सीनियर सेकेंडरी अर्थात 12 वी पास है। मुझे लगा की सोने चिड़या कहा जाने वाला यह देश वाकई महान है। जहाँ के भिखारी भी इतना पढ़े लिखे हो उस देश का यारों क्या कहना।
लेकिन यही डिस्कशन जब मैंने अपने मित्र से किया तो उन्होंने तो पूरे आधे घंटे का भाषण यह समझाने के लिए से डाला की 1835 में मैकाले नामक अगंरेज ने हिंदुस्तान में आकर यहाँ की शिक्षा व्यस्था इतनी ख़राब करवा दी किअब इस देश में ज्यादातर लोग इसी मानसिकता के है हालांकि उनका व्यसाय भीख माँगना ही हो यह आवश्यक नहीं है। उदाहरण के लिये देश के स्वतन्त्र होने के करीब ६८-६९ वर्षो के बाद भी हमारे नेता लोग पूरी दुनियाँ में जा जा कर और देश की गरीबी का रोना रो कर हर तरह की सहायता प्राप्त करने में महारथ रखते है। उनकी पूरी कोशिश रही की देश का स्वाभिमान जागने न पाये और किसी हद तक मैं उन्हें अपने काम में सफल भी मानता हूँ।
मागने की आदत केवल नेतावों की है यह कहना भी शायद उनके साथ ज्यादती होगी। देश के किसी भी मन्दिर में आप जाये तो आपको पता चलेगा की गरीब आदमी मंदिर के बाहर और अमीर मंदिर के अन्दर कुछ न कुछ मागने में ही लगा हुआ है। इतना ही नहीं इससे भी एक कदम आगे चले और अच्छी खासी आमदनी वाले से भी यदि आप किसी की सहायता करने के लिये निवेदन करें तो वोह आपको अपंना ही दुखड़ा सुनाने लग जायेगा और थोड़ा चालाक हुआ तो पिछले दिनों उसने कहाँ - कहाँ दान किया है इसका पूरा विवरण आपको देकर कर विश्वास दिला देगा की इस युग में कर्ण वही है।
चलिए हम भी कहा से कहा पहुँच गये। जिन्दगी का एक और वर्ष खत्म होने में बस २० घण्टे बचे है। जल्दी से 2015 में कुछ करना बचा है उसे फटाफट निपटाया जाये ताकि नए साल में हम अपना हुनर फिर दिखा सके। और जाते हुये साल को अलबिदा कहकर नए का स्वागत करे।
और अन्त में
क्या किया मैंने अधिक ,जो नहीं कर चुका संसार अबतक
वृद्ध जग को क्यों अखरती है क्षणिक मेरी जवानी
मैं छिपाना जानता तो जग मुझे साधु समझता
शत्रु मेरा बन गया है छल रहित व्यहार मेरा।
--हरिवंश राय बच्चन
अजय सिंह "जे एस के "
मोदी की बिना योजना लाहौर यात्रा
कवि गौरव चौहान: (मोदी की बिना योजना लाहौर यात्रा का विरोध करने वालों को जवाब देती मेरी नई कविता)
रचनाकार-गौरव चौहान इटावा उ प्र 9557062060
जिसकी आँखों में भारत की उन्नति का उजियारा है,
जिसकी गलबहियां करने को व्याकुल भी जग सारा है,
जिसकी गलबहियां करने को व्याकुल भी जग सारा है,
अमरीका जापान चीन इंग्लैंण्ड साथ में बोले हैं,
घूम घूम कर जिसने दरवाजे विकास के खोले हैं,
जिसके सभी विदेशी दौरे सफल कहानी छोड़ गए,
बड़े बड़े तुर्रम खां तक भी हाथ सामने जोड़ गए,
बड़े बड़े तुर्रम खां तक भी हाथ सामने जोड़ गए,
उन्ही विदेशी दौरों की अब खिल्ली आज उड़ाते हैं?
देश लूटने वाले उसको कूटनीति सिखलाते हैं,
देश लूटने वाले उसको कूटनीति सिखलाते हैं,
कायम था ग्यारह वर्षों से,वो वनवास बदल डाला,
मोदी ने लाहौर पहुंचकर सब इतिहास बदल डाला,
मोदी ने लाहौर पहुंचकर सब इतिहास बदल डाला,
जिस धरती पर हिन्द विरोधी नारे छाये रहते हैं,
जिस धरती पर नाग विषैले मुहँ फैलाये रहते हैं,
जिस धरती पर नाग विषैले मुहँ फैलाये रहते हैं,
जिस धरती पर हाफ़िज़ जैसे लेकर बैठे आरी हों,
और हमारे मोदी जी की देते रोज सुपारी हों,
और हमारे मोदी जी की देते रोज सुपारी हों,
जहाँ सुसाइड बम फटते हैं रोज गली चौराहों में,
बारूदी कालीन बिछी है जहाँ सियासी राहों में,
बारूदी कालीन बिछी है जहाँ सियासी राहों में,
जहाँ होलियाँ बच्चों के संग खेली खूनी जाती हों,
बेनजीर सी नेता भी गोली से भूनी जाती हों,
बेनजीर सी नेता भी गोली से भूनी जाती हों,
उसी पाक में पहुंचे मोदी,शोर मचाया संसद ने,
सभा बीच रावण की देखो पैर जमाया अंगद ने,
सभा बीच रावण की देखो पैर जमाया अंगद ने,
बिना सुरक्षा बिना योजना जाना एक दिलेरी है,
लगता है उलझन सुलझाने में कुछ पल की देरी है,
लगता है उलझन सुलझाने में कुछ पल की देरी है,
लाहौरी दरबार समूचा ही अंगुली पर नाचा है,
पड़ा मणीशंकर के गालों पर भी एक तमाचा है,
पड़ा मणीशंकर के गालों पर भी एक तमाचा है,
ये गौरव चौहान कहे अब देखो जिगरा मोदी का,
जांबाजी से भरा हुआ है कतरा कतरा मोदी का,
जांबाजी से भरा हुआ है कतरा कतरा मोदी का,
अंगारों को ठंडा करदे,उसे पसीना कहते है,
इसको ही तो प्यारे छप्पन इंची सीना कहते हैं,
------कवि गौरव चौहान(कृपया मूलरूप में ही शेयर करें,कटिंग,पेस्टिंग और जरा सी भी एडिटिंग न करें)
इसको ही तो प्यारे छप्पन इंची सीना कहते हैं,
------कवि गौरव चौहान(कृपया मूलरूप में ही शेयर करें,कटिंग,पेस्टिंग और जरा सी भी एडिटिंग न करें)
और अन्त में
बगैर पाकिस्तानी वीज़ा लिए अपने 120 सिपहसालारों के साथपाकिस्तान में मौजूद था हमारा पीएम मोदी
ये देख अभिनेता राजकुमार का एक डायलॉग फिर याद आ गया
जानी ,,,,, हम तुमसे मिलेंगे ,,ज़रूर मिलेंगे
लेकिन वो ज़मीन भी तुम्हारी होगी,,,,
प्लेन भी तुम्हारा होगा,,,
पार्टी भी तुम्हारी होगी,,,
लेकिन वक़्त हमारा होगा।
अजय सिंह "जे एस के "
Saturday, December 26, 2015
निर्भया काण्ड के आरोपी की रिहाई के विरुद्ध भारत की आवाज
निर्भया काण्ड के आरोपी की रिहाई के विरुद्ध भारत की न्याय
व्यवस्था को निर्भया के स्वर में धिक्कारती नयी कविता। स्वयं पढ़ें और अधिक
से अधिक शेयर करें। नीति नियन्ताओं के कानों तक पहुंचनी चाहिये निर्भया की
आवाज।
कितनी लाशें और लगेंगी ये पट्टी खुलवाने में
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जिसके वहशीपन से मेरी सांस का धागा टूट गया
बहुत दुखी हूँ तुम्हें बताते मेरा कातिल छूट गया
जिसके वहशीपन से मेरी सांस का धागा टूट गया
बहुत दुखी हूँ तुम्हें बताते मेरा कातिल छूट गया
रौंद गया जो मेरे सपने जिसने मुझको मारा था
केवल मेरा नहीं था वो मानवता का हत्यारा था
केवल मेरा नहीं था वो मानवता का हत्यारा था
मेरी भी अभिलाषा थी मैं खूब उड़ूँ पक्षी बनकर
लेकिन मेरे जीवन में वो आया नरभक्षी बनकर
लेकिन मेरे जीवन में वो आया नरभक्षी बनकर
सीधा साधा मेरा जीवन, कुछ घंटों में बदल गया
सुनकर जिसका क्रूर कृत्य दिल बड़े बड़ों का दहल गया
सुनकर जिसका क्रूर कृत्य दिल बड़े बड़ों का दहल गया
जिसके कुकृत्य से शर्मशार भारत माता की कोख हुई
उसकी सजा बढ़ाने को जब हाईकोर्ट से रोक हुई
उसकी सजा बढ़ाने को जब हाईकोर्ट से रोक हुई
तब मुझे लगा कि भारत शायद अब भी जाग नहीं पाया
किसको कौन सजा देनी है यह भी जान नहीं पाया
किसको कौन सजा देनी है यह भी जान नहीं पाया
उसको बच्चा मान लिया जो जल्लादों से बद्तर है
सच कहती हूँ आज की पीड़ा उस पीड़ा से बढ़कर है
सच कहती हूँ आज की पीड़ा उस पीड़ा से बढ़कर है
मेरा कातिल निर्भय होकर जब सड़कों पर घूमेगा
लाचार व्यवस्था पर भारत की बच्चा बच्चा थूकेगा
लाचार व्यवस्था पर भारत की बच्चा बच्चा थूकेगा
न्याय की आशा में थी मैं तो मेरे संग में घात हुआ
मेरे संग भी वही हुआ जो अरुणा जी के साथ हुआ
मेरे संग भी वही हुआ जो अरुणा जी के साथ हुआ
सिंघासन पर मुट्ठी भींचे द्रोण नहीं हो सकती हूँ
मौन रहो तुम लोग मगर मैं मौन नहीं हो सकती हूँ
मौन रहो तुम लोग मगर मैं मौन नहीं हो सकती हूँ
मैं पूछ रही हूँ तुम सबसे क्या किया करोगे क्या आगे
जिससे कोई किसी बहन की लाज की देहरी न लांघे
इस अंधे कानून की आँखों से पट्टी हटवाने मेंजिससे कोई किसी बहन की लाज की देहरी न लांघे
कितनी लाशें और लगेंगी ये पट्टी खुलवाने में
Friday, December 11, 2015
हिट एंड रन, बड़े आराम से
दोस्तों,
कल सलमान खान के हिट एंड रन केस का निर्णय हाई कोर्ट ने सुना दिया। कोर्ट ने कहा की सलमान के खिलाफ सुबूत पुख्ता न होने के कारण सन्देह का लाभ उन्हें देते हुए केस से रिहा कर दिया गया है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की,कि पुलिस के जिन लोगों ने इस केस की जाँच की उन्होंने उसमें अनेक गलतियाँ की जिससे केस कमजोर हुआ और गुनाह साबित नहीं हो सका। लेकिन कोर्ट ने पुलिस के खिलाफ किसी कार्यवाही किये जाने
का कोई आदेश नहीं दिया। पूरे केस में अब तक तेरह साल निकल गये है। यदि केस को लेकर महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट तो कुछ और साल आराम से निकल जायेंगे। घटना में जिस गरीब की मृत्यु हुई उसके परिवार वालों को इस निर्णय से घोर निराशा हुई जो उनकी अंतिम उम्मीद थी।
इस निर्णय की चारों तरफ चर्चा हो रही है। सुरेश जरीवाला मोदी के बड़े मुस्लिम समर्थक है और गुजरात से आते है उन्होंने कहा की " हम तो पहले से कह रहे थे की सलमान निर्दोश और उन्हें जान कर फँसाया गया था। कई और नामी गिरामी फ़िल्मी और सामाजिक हस्तियों ने भी अपने ऐसे ही विचार प्रकट किये हैं ।
इस निर्णय से मुझे एक ज्ञान तो यह हुआ की न्यूटन का दूसरा नियम "हर एक्शन का बराबर और उल्टा रिएक्शन" होता है को नयी तरह परिभाषित करने जरुरत महसूस हो रही है। नई परिभाषा कुछ ऐसी होगी "हर एक्शन रिएक्शन होता है लेकिन यह कब होगा, कितना होगा और होगा भी नहीं होगा यह समय, जगह और किन लोगो के बीच होना है पर निर्भर करेगा। उदाहरण के लिए यदि आपको चींटी काट ले तो आप नहीं काट सकते ,हाथी अपनी सूंड़ में लपेट कर फेक दे तो भी आप इसके बराबर और उलटी रिएक्शन नहीं सकते है। यदि कोई मुस्लिम किसी हिन्दू को गाली दे और आप हिंदुस्तान है तो इसकी रिएक्शन आपको इजाजत नहीं सकती और यदि उसने आपको मार दिया हो तो उसे सक आधार पर छोड़ा सकता है लेकिन यदि कोई हिन्दू किसी मुस्लिम को गाली दे रिएक्शन आपकी पिटाई और जेल दोनों सकती है और यदि हिन्दू ने मुसलमान की पिटाई कर दी तो आपको दंगा फैलने के डर से या उसके आरोप जेल तो होगी ही साथ ही आप की सम्पति इत्यादि जब्त सकती है। अतः न्यूटन के दूसरे नियम के बारे में आप अपनी समझ को जितनी जल्दी ठीक कर सके उतना ही सुरक्षित आप अपने को महसूस कर सकते है।
इस निर्णय से दूसरी यह बात भी समझ आ गई वैसे तो शक सन्देह करना बहुत बुरा माना जाता है और इसे न करने की सीख हमेशा हम अपने लोगो तो देते रहते है लेकिन। इसके कुछ अनकहे लाभ भी है इसलिये मौका देख कर कभी कभी शक संदेह करना देश हित में होता है और इससे आप के पैसे कमाने की सम्भावनाये भी बढ़ती है और इज्ज़त भी। इसका क्या और कितना लाभ मिलेगा यह इस बात पर निर्भर करेगा की आपके शक की क्वालिटी और उसकी टाइमिंग क्या है और उससे दूसरे आदमी का क्या और कितना लाभ हो सकता है। यानि न्यूटन का नियम यहाँ भी लागू होगा।
मुझे पूरी उम्मीद है जैसे इस नियम बारे में संशोधन बताने से आइन्स्टीन को नोबल प्राइज मिला था,उसी तरह मेरा नाम भी इस बार के भारत रत्न के लिए रिकमेंड किया जायेगा। अन्यथा अपनी कथा की व्यथा लेकर मैं यूनाइटेड नेशन जाने के लिए स्वतंत्र हूँ। कम से कम इतनी रिएक्शन तो मेरा अधिकार है।
अजय सिंह "जे एस के "
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