Tuesday, July 28, 2015

देश के सच्चे सपूत, कर्मयोगी अब्दुल कलाम को देश वासियों का अंतिम प्रणाम

भारत के 11वे राष्ट्रपति कार्यकाल 25 जुलाई 2002 – 25 जुलाई 2007  
 संछिप्त जीवन परिचय 

जन्म 15 अक्टूबर 1931
रामेश्वरम, ब्रिटिश राज (मौजूदा तमिलनाडु में, भारत)
मृत्यु 27 जुलाई 2015 (उम्र 83)
शिलोंग, मेघालय, भारत                                                                         


विद्या अर्जन सेंट जोसेफ कॉलेज, तिरुचिरापल्ली
मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी
पेशा प्रोफेसर, लेखक, वैज्ञानिक
एयरोस्पेस इंजीनियर
धर्म इस्लाम में पैदा हुए और जीवन भर मानवता के  धर्म का पालन किया
वेबसाइट abdulkalam.com

अवुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम का  जन्म 15 अक्टूबर 1931 - 27 जुलाई 2015, रामेश्वरम, तमिलनाडु, भारत), जिन्हें डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम के नाम से जाना जाता है, भारतीय गणतंत्र के ग्यारहवें निर्वाचित राष्ट्रपति थे। वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति, जानेमाने वैज्ञानिक और अभियंता के रूप में विख्यात हैं।
प्रारंभिक जीवन
15 अक्टूबर 1931 को धनुषकोडी गाँव (रामेश्वरम, तमिलनाडु) में एक मध्यमवर्ग मुस्लिम परिवार में इनका जन्म हुआ| इनके पिता जैनुलाब्दीन न तो ज़्यादा पढ़े-लिखे थे, न ही पैसे वाले थे। इनके पिता मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे। अब्दुल कलाम सयुंक्त परिवार में रहते थे। परिवार की सदस्य संख्या का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि यह स्वयं पाँच भाई एवं पाँच बहन थे और घर में तीन परिवार रहा करते थे। अब्दुल कलाम के जीवन पर इनके पिता का बहुत प्रभाव रहा। वे भले ही पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन उनकी लगन और उनके दिए संस्कार अब्दुल कलाम के बहुत काम आए।
  विद्यार्थी जीवन
पाँच वर्ष की अवस्था में रामेश्वरम के पंचायत प्राथमिक विद्यालय में उनका दीक्षा-संस्कार हुआ था। उनके शिक्षक इयादुराई सोलोमन ने उनसे कहा था कि 'जीवन मे सफलता तथा अनुकूल परिणाम प्राप्त करने के लिए तीव्र इच्छा, आस्था, अपेक्षा इन तीन शक्तियो को भलीभाँति समझ लेना और उन पर प्रभुत्व स्थापित करना चाहिए।' अब्दुल कलाम ने अपनी आरंभिक शिक्षा जारी रखने के लिए अख़बार वितरित करने का कार्य भी किया था। कलाम ने 1958 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलजी से अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है। स्नातक होने के बाद उन्होंने हावरक्राफ्ट परियोजना पर काम करने के लिये भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में प्रवेश किया। 1962 में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में आये जहाँ उन्होंने सफलतापूर्वक कई उपग्रह प्रक्षेपण परियोजनाओं में अपनी भूमिका निभाई। परियोजना निदेशक के रूप में भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी 3 के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई जिससे जुलाई 1980 में रोहिणी उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया था।
  व्यावसायिक जीवन
1962 में वे 'भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन' में आये। डॉक्टर अब्दुल कलाम को प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह (एस.एल.वी. तृतीय) प्रक्षेपास्त्र बनाने का श्रेय हासिल हुआ। 1980 में इन्होंने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित किया था। इस प्रकार भारत भी अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया। इसरो लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम को परवान चढ़ाने का श्रेय भी इन्हें प्रदान किया जाता है। डॉक्टर कलाम ने स्वदेशी लक्ष्य भेदी (गाइडेड मिसाइल्स) को डिजाइन किया। इन्होंने अगनि एवं पृथ्वी जैसी मिसाइल्स को स्वदेशी तकनीक से बनाया था। डॉक्टर कलाम जुलाई 1992 से दिसम्बर 1999 तक रक्षा मंत्री के विज्ञान सलाहकार तथा सुरक्षा शोध और विकास विभाग के सचिव थे। उन्होंने स्ट्रेटेजिक मिसाइल्स सिस्टम का उपयोग आग्नेयास्त्रों के रूप में किया। इसी प्रकार पोखरण में दूसरी बार न्यूक्लियर विस्फोट भी परमाणु ऊर्जा के साथ मिलाकर किया। इस तरह भारत ने परमाणु हथियार के निर्माण की क्षमता प्राप्त करने में सफलता अर्जित की। डॉक्टर कलाम ने भारत के विकासस्तर को 2020 तक विज्ञान के क्षेत्र में अत्याधुनिक करने के लिए एक विशिष्ट सोच प्रदान की। यह भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे। 1982 में वे भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में वापस निदेशक के तौर पर आये और उन्होंने अपना सारा ध्यान "गाइडेड मिसाइल" के विकास पर केन्द्रित किया। अग्नि मिसाइल और पृथवी मिसाइल का सफल परीक्षण का श्रेय काफी कुछ उन्हीं को है। जुलाई 1992 में वे भारतीय रक्षा मंत्रालय में वैज्ञानिक सलाहकार नियुक्त हुये। उनकी देखरेख में भारत ने 1998 में पोखरण में अपना दूसरा सफल परमाणु परीक्षण किया और परमाणु शक्ति से संपन्न राष्ट्रों की सूची में शामिल हुआ।
  राजनीतिक जीवन
डॉक्टर अब्दुल कलाम भारत के ग्यारवें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे। इन्हें भारतीय जनता पार्टी समर्थित एन॰डी॰ए॰ घटक दलों ने अपना उम्मीदवार बनाया था जिसका वामदलों के अलावा समस्त दलों ने समर्थन किया। 18 जुलाई 2002 को डॉक्टर कलाम को नब्बे प्रतिशत बहुमत द्वारा 'भारत का राष्ट्रपति' चुना गया था और इन्हें 25 जुलाई 2002 को संसद भवन के अशोक कक्ष में राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई गई। इस संक्षिप्त समारोह में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, उनके मंत्रिमंडल के सदस्य तथा अधिकारीगण उपस्थित थे। इनका कार्यकाल  25 जुलाई 2007 को समाप्त हुआ। डॉक्टर अब्दुल कलाम व्यक्तिगत ज़िन्दगी में बेहद अनुशासनप्रिय,  शाकाहारी और मद्यपान से दूर थे । इन्होंने अपनी जीवनी 'विंग्स ऑफ़ फायर' भारतीय युवाओं को मार्गदर्शन प्रदान करने वाले अंदाज में लिखी है। इनकी दूसरी पुस्तक 'गाइडिंग सोल्स- डायलॉग्स ऑफ़ द पर्पज ऑफ़ लाइफ' आत्मिक विचारों को उद्घाटित करती है इन्होंने तमिल भाषा में कविताऐं भी लिखी हैं। यह भी ज्ञात हुआ है कि दक्षिणी कोरिया में इनकी पुस्तकों की काफ़ी माँग है और वहाँ इन्हें बहुत अधिक पसंद किया जाता है।

 यूं तो डॉक्टर अब्दुल कलाम राजनीतिक क्षेत्र के व्यक्ति नहीं हैं लेकिन राष्ट्रवादी सोच और राष्ट्रपति बनने के बाद भारत की कल्याण संबंधी नीतियों के कारण इन्हें कुछ हद तक राजनीतिक दृष्टि से सम्पन्न माना जा सकता है। इन्होंने अपनी पुस्तक 'इण्डिया 2020' में अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया है। यह भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर राष्ट्र बनते देखना चाहते हैं और इसके लिए इनके पास एक कार्य योजना भी है। परमाणु हथियारों के क्षेत्र में यह भारत को सुपर पॉवर बनाने की बात सोचते रहे हैं। वह विज्ञान के अन्य क्षेत्रों में भी तकनीकी विकास चाहते हैं। डॉक्टर कलाम का कहना है कि 'सॉफ़्टवेयर' का क्षेत्र सभी वर्जनाओं से मुक्त होना चाहिए ताकि अधिकाधिक लोग इसकी उपयोगिता से लाभांवित हो सकें। ऐसे में सूचना तकनीक का तीव्र गति से विकास हो सकेगा। वैसे इनके विचार शांति और हथियारों को लेकर विवादास्पद हैं। इस संबंध में इन्होंने कहा है- "2000 वर्षों के इतिहास में भारत पर 600 वर्षों तक अन्य लोगों ने शासन किया है। यदि आप विकास चाहते हैं तो देश में शांति की स्थिति होना आवश्यक है और शांति की स्थापना शक्ति से होती है। इसी कारण मिसाइलों को विकसित किया गया ताकि देश शक्ति सम्पन्न हो।"
  मृत्यु
अब्दुल कलाम का बेथनी अस्पताल, शिलोंग में आई आई एम शिलोंग में एक भाषण के दौरान हृदयघात (हार्ट अटैक) से निधन हो गया। इससे पूर्व वे भारतीय प्रबन्धन संस्थान, शिलौंग में भाषण देने के दौरान बेहोश हो गए थे।  आईआईएम शिलॉन्ग में लेक्चर के दौरान ही उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद वह बेहोश होकर गिर पड़े। इसके बाद उन्हें तुरन्त शिलॉन्ग के बेथानी अस्पताल लाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने भरसक प्रयास किया लेकिन तब तक उनका देहांत हो चुका था। देर शाम 7:45 बजे उन्हें मृत घोषित किया गया। 
पुरस्कार:
अवुल पकीर जैनुलबीदीन अब्दुल कलाम को भारत सरकार द्वारा १९८१ में प्रशासकीय सेवा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। डाक्टर कलाम को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से 1997 में सम्मानित किया गया।[6] 18 जुलाई, 2002 को डाक्टर कलाम को नब्बे प्रतिशत बहुमत द्वारा भारत का राष्ट्रपति चुना गया और उन्होंने 25 जुलाई को अपना पदभार ग्रहण किया। इस पद के लिये उनका नामांकन उस समय सत्तासीन राष्ट्रीय प्रजातांत्रिक गठबंधन की सरकार ने किया था जिसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का सम्रथन हासिल हुआ था। उनका विरोध करने वालों में उस समय सबसे मुख्य दल भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी और अन्य वामपंथी सहयोगी दल थे। वामपंथी दलों ने अपनी तरफ से 87 वर्षीया श्रीमती लक्ष्मी सहगल का नामांकन किया था जो सुभाषचंद्र बोस के आज़ाद हिंद फौज में और द्वितीय विश्वयुद्ध में अपने योगदान के लिये जानी जाती हैं।
  व्यक्तिगत

डॉक्टर कलाम अपने व्यक्तिगत जीवन में पूरी तरह अनुशासन शाकाहार और ब्रह्मचर्य का पालन करने वालों में से हैं। ऐसा कहा जाता है कि वे क़ुरान और भगवद् गीता दोनों का अध्ययन करते हैं। कलाम ने कई स्थानों पर उल्लेख किया है कि वे तिरुक्कुरल का भी अनुसरण करते हैं, उनके भाषणों में कम से कम एक कुराल का उल्लेख अवश्य रहता है। राजनीतिक स्तर पर कलाम की चाहत है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की भूमिका विस्तार हो और भारत ज्यादा से ज्याद महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाये। भारत को महाशक्ति बनने की दिशा में कदम बढाते देखना उनकी दिली चाहत है। उन्होंने कई प्रेरणास्पद पुस्तकों की भी रचना की है और वे तकनीक को भारत के जनसाधारण तक पहुँचाने की हमेशा वक़ालत करते रहे हैं। बच्चों और युवाओं के बीच डाक्टर क़लाम अत्यधिक लोकप्रिय हैं। अंतिम समय तक आप भारतीय अन्तरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के कुलपति रहे। 

डॉक्टर कलाम ने साहित्यिक रूप से भी अपने शोध को चार उत्कृष्ट पुस्तकों में समाहित किया है, जो इस प्रकार हैं- 'विंग्स ऑफ़ फायर', 'इण्डिया 2020- ए विज़न फ़ॉर द न्यू मिलेनियम', 'माई जर्नी' तथा 'इग्नाटिड माइंड्स- अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया'। इन पुस्तकों का कई भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। इस प्रकार यह भारत के एक विशिष्ट वैज्ञानिक हैं, जिन्हें 30 विश्वविद्यालयों और संस्थानों से डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्राप्त हो चुकी है।

इग्नाइटेड माइंडस: अनलीशिंग थे पावर विदीन इंडिया एपीजे अब्दुल कलाम कृत (पेंग्विन बुक्स, 2003) ISBN 0-14-302982-7 इंडिया- माय-ड्रीम एपीजे अब्दुल कलाम कृत (एक्सेल बुक्स, 2004) ISBN 81-7446-350-X एनविजनिंग अन एमपावर्ड नेशन: टेक्नालजी फार सोसायटल ट्रांसफारमेशन एपीजे अब्दुल कलाम कृत (टाटा मैकग्रा हिल पब्लिशिंग कंपनी लिमिटेड, 2004) ISBN 0-07-053154-4 आत्मकथात्मक
विंग्स ऑफ फायर: एन आटोबायोग्राफी ऑफ एपीजे अब्दुल कलाम एपीजे अब्दुल कलाम कृत, अरुण तिवारी (ओरियेंट लांगमैन, 1999) ISBN 81-7371-146-1 साइंटिस्ट टू प्रेसिडेंट एपीजे अब्दुल कलाम कृत (ज्ञान पब्लिशिंग हाउस, 2003) ISBN 81-212-0807-6 इटरनल क्वेस्ट: लाइफ ऐंड टाइम्स ऑफ डाक्टर अवुल पकिर जैनुलाआबदीन अब्दुल कलाम एस चंद्रा कृत (पेंटागन पब्लिशर्स, 2002) ISBN 81-86830-55-3 प्रेसिडेंट एपीजे अब्दुल कलाम आर के पूर्ति कृत (अनमोल पब्लिकेशन्स, 2002) ISBN 81-261-1344-8 ए पी जे अब्दुल कलाम: द विजनरी ऑफ इंडिया' के भूषण एवं जी कात्याल कृत (एपीएच पब्लिशिंग कार्पोरेशन, 2002) ISBN 81-7648-380-X
श्रद्धांजलि
  बोलते-बोलते अचानक धड़ाम से
जमीन पर गिरा एक फिर वटवृक्ष
फिर कभी नहीं उठने के लिए
वृक्ष जो रत्न था
वृक्ष जो शक्तिपुंज था
वृक्ष जो न बोले तो भी
खिलखिलाहट बिखेरता था
चीर देता था हर सन्नाटे का सीना
सियासत से कोसों दूर
अन्वेषण के अनंत नशे में चूर
वृक्ष अब नहीं उठेगा कभी
अंकुरित होंगे उसके सपने
फिर इसी जमीन से
उगलेंगे मिसाइलें
शान्ति के दुश्मनों को
सबक सीखने के लिए
वृक्ष कभी मरते नहीं
अंकुरित होते हैं.
नए-नए पल्ल्वों के साथ
वे किसी के अब्दुल होते हैं किसी के कलाम
अलविदा .अलविदा ,अलविदा


अजय सिंह "एकल"

Saturday, July 4, 2015

अंतर्राष्ट्रीय योगा डे पर हुई महत्व पूर्ण गतिविधियाँ

 विदेशो में तथा देश में बड़ी धूम से २१ जून २०१५ को प्रथम अंतर्राष्ट्रीय योगा डे मनाया गया . दुनिया भर के लोगो ने इस ऐतिहासिक दिन को उत्साह से मनाया। योगा डे  को भारत में भी पूरी तैयारी के साथ माननीय प्रधान मंत्री के नेतृत्व में मनाया गया ,  इस दिन देश में क्या क्या प्रमुख गति विधियाँ रही उसका विवरण नीचे दिया जा रहा है:

१. प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के साथ राजपथ दिल्ली में ३५ हजार लोगो ने सामूहिक योगा में भागीदारी 


२. पूरे देश में ९ करोड़ से ज्यादा एस एम एस भेज कर प्रधान मंत्री ने योग दे मनाने के लिए संपर्क किया।



 गिन्नीज़ बुक ऑफ वर्ड रिकार्ड में दर्ज हुआ यह इवेंट


 ३. दुबई में इवान स्टैनले ने ६१ मिनट का शीर्षासन कर बनाया रिकार्ड


 
 ४. दुनिया के सबसे ऊँचे (१८८०० फिट ) स्थान  सियाचिन ग्लेशियर पर भारतीय सेना के जवानों द्वारा मनाया गया योगा डे


५. योेगा डे पर भारतीय डाक विभाग ने डाक टिकट जारी किया 



 ६. योग डे  की याद में भारतीय रिज़र्व बैंक ने १० और १०० रुपये के सिक्के जारी किये



  







७. २०१६ के अंतर्राष्ट्रीय योगा डे के लिए उल्टी गिनती की वेब साइट का शुभारंभ 



अगले योगा डे में कितना समय बचा है यह जानना अब आसान है बस ऊपर दिए लिंक को क्लिक कीजये।


८. योगा पजल की वेब साइट लॉन्च 
योग से सम्बंधित अपने ज्ञान को टेस्ट करने के लिए किलक करे .








Sunday, June 7, 2015

मोदी सरकार का पहला साल:अच्छे दिनों की आहट


1. मोदी जी ने सऊदी अरब को “On-Time Delivery” Premium charges on Crude Oil  के लिए मना लिया है
2. India भूटान में 4 Hydropower stations Dams बनाएगा । जिस से Green energy मिलेगी ।
3. India नेपाल में सबसे बड़ा hydro dam बनाएगा जिस से 83% Green energy इंडिया को मिलेगी। ( इसके लिए china कब से लगा हुआ था )
4. जापान के साथ समझोता हुआ. वो भारत में 10 लाख करोड़ invest करेंगे और bullet train चलाने में मदद करेंगे।
( कांग्रेस के टाइम में ये समझोता सिर्फ 1000 करोड़ का था)
5. Vietnam के साथ रिश्ते सुधारे हैं और अब भारत को आयल देने और आयल रिफानरी में भारत के लिए मदद करेगा।कांग्रेस के समय उसने मना कर दिया था। 
6. इरान अब डॉलर की जगह रूपये में आयल देने को राजी हो गया है । इस से काफी बचत होगी ।
7. मोदी जी 28 साल के बाद औस्ट्रेलिया जाने वाले प्रधनमंत्री बने । और वहां दोस्ती के रिश्ते बनाये । अब वहां से Uranium मिलेगा जिससे बिजली बनाने के लिए काफी मदद मिलेगी।
8. मोदी जी इस साल श्री लंका गये और टूटी हुई दोस्ती सुधारी। जो कांग्रेश ने श्री लंका ना जाके बिगाड़ ली थी।
9. China के सामान india में बहुत बिक रहे हैं , इसके लिए बोल दिया की या तो इंडिया में invest करो नही तो गैर क़ानूनी माना जाएगा । अब China $20 billion Invest करेगा।
1 India ने North East and around India china border पे रोड बनाना शुरू कर दिया है ताकि हमारी army को जाने में दिक्कत न हो।
कांग्रेस  इसे  बनाने में डरती रही।
12. India यमन से 4000+ Indians को लाने में सफल रही ।ये सब मोदी और सऊदी अरब किंग की दोस्ती की वजह से संभव हो पाया।
13. India की Air force की ताकत कमजोर हो गयी थी। इसके लिए आते ही  फ़्रांस से 36 Rafale fighter Jets खरीदने के लिए deal की है।
14. after  42 years Canada , भारत को Uranium देने के लिए राजी हो गया है । इस से बिजली की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी ।
15. Canada अब भारतीयों को On-Arrival visa देगा।
16. अब तक हम अमेरिक और रूस से ही Nuclear Reactor खरीद सकते थे । मगर अब फ़्रांस भारतीय कम्पनी के साथ यही बनाएगी ।
- MAKE IN INDIA
17. बराक ओबामा से दोस्ती की और अमेरिका अब भारत में 16 Nuclear power plant लगाने में मदद करेगा । जिस से भारत में बिजली की दिक्कत ख़तम हो जाएगी ।

 अन्त में

मोदी सरकार   के कार्यकाल का एक वर्ष पूरा  हो गया इस एक वर्ष मे केजरी की खाँसी ठीक हो गई मौनमोहन जी बोलने लग गये सोनिया जी की वो बीमारी जिसके इलाज के लिए वो बार बार अमेरिका जाती थी ठीक हो गई राहुल जी संसद मे भाषण भी देने लग गये और कितने अच्छे दिन चाहिए ?

अजय सिंह "एकल "


Tuesday, May 19, 2015

बारह महीने सत्रह देश :मोदी सरकार का एक साल

मित्रों,
नरेंद्र मोदी जी ने २६ मई २०१४ को शपथ लेने के बाद से एक साल में करीब १९ विदेश यात्रायें  की है।  इसमें पंद्रह  यात्रा स्टेट प्रमुख के नाते हुई है तीन यात्रायें शिखर सम्मलेन में भागीदारी के लिए और एक यात्रा सिंगापुर के पूर्व प्रधान मंत्री की अन्येष्टि में भाग लेने के लिए थी।नेपाल की यात्रा दो बार हुई एक बार स्टेट प्रमुख के नाते और दुबारा शिखर सम्मलेन में भाग लेने के लिए। 

विरोधी दल कांग्रेस ,जनता परिवार के लोग और वाम नेता सरकार पर मोदी के देश में कम और विदेश में ज्यादा रहने का आरोप  लगा कर जनता को गुमराह करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते  है।लेकिन आपको जान कर आश्चर्य होगा की जिस बात पर संसद से जमीन  तक शोर मचा हुआ है उसकी सच्चाई क्या है ?और वास्तव में क्या मोदी जी ने विदेश यात्रायें बहुत ज्यादा की है ?क्या वह देश के एन आर आई प्रधान मंत्री है ?

नीचे दिया हुये  चार्ट  से स्पष्ट है की मोदी जी ने एक साल में ५३ दिन विदेश में बिताये और मनमोहन सिंह ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले साल में ४७ दिन  देश से बाहर बिताये यानी एक सप्ताह ज्यादा। यदि यह तुलना राहुल गांधी के विदेश में रहने से की जाये तो वह विदेश में ५६ दिन एक साथ लम्बी छुट्टी मन कर देश लौटे है। यानि मोदी के काम करने के लिए जाने पर एतराज और अपने  ऐश करने पर चुप्पी


 अब आइये जरा दोनों प्रधान मंत्री की यात्राओं का विजिटेड देशो के साथ सम्बन्धो का वहाँ रह रहे भारत वंशियो पर प्रभाव की तुलना करेंगे तो पता चलेगा की मनमोहन सिंह की यात्राओं का लोगो को तब पता चलता था जब उनके जाने की खबर अख़बार में या टी वी पर आती इसके मुकाबले में मोदी के जाने के पंद्रह दिन  से लेकर एक महीने पहले से चर्चा शुरू होकर एक महीने बाद तक रहती है और जितना बिज़नेस मोदी की यात्राओ के दौरान हो रहा है शायद यह अपने आप में एक रिकार्ड बनने वाला है।  हर देश का मुखिया मोदी के आने की तैयारी करता है स्वागत करता है और सम्बन्धों  में गर्मजोशी भरने में कोई कसर छोड़ता है। चाहे वह अमरीका के ओबामा हो या जापान के प्रधान मंत्री शिंजो अबे या चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग हो।
भारत वंशियो को फिर देश हित  से जोड़ना ,विदेशी पूंजी को देश में लेन के लिए समझौते करना ,रक्षा सौदा ,परमाणु बिजली के लिए तकनीक,परमाणु ईंधन ,यूनाइटेड नेशन में भारत की स्थाई जगह इत्यादि मोदी के विदेश दौरों का एजेंडा रहा है और बहुत हद तक मोदी ने इसमें अपने एजेंडा अनुसार सफलता प्राप्त की है इसको विरोधी भी स्वीकार कर रहे है और विदेशी भी। जिन अंतर्राष्ट्रीय समझौतों पर वर्षो से प्रगति विभिन्न कारणों से नहीं हो रही थी अधिकांश में सफलता मोदी जी ने प्राप्त की है और देश का मान बढ़ाया है।

देश के सर्वांगीण विकास के लिए पडोसी तथा शक्ति शाली और विकसित देशो के साथ अच्छे सम्बन्ध होना एक खास आवश्यकता है मोदी जी अपने करिश्माई व्यक्तित्व एवं बड़ी और राष्ट्रीय सोंच से काम करने वाले पहले प्रधान  मंत्री बने है। इसका व्यापक प्रभाव दुनिया में हो रहा है और भारत का सम्मान बढ़ा है।


अजय सिंह "एकल "




स्कैम नहीं स्कीम: मोदी सरकार की दस स्कीमें

दोस्तों,
यू पी ए की पिछली सरकार ने देश में अगर स्कैम करने का रिकार्ड बनाया तो मोदी जी की सरकार ने जनता के लिए स्कीमों की घोषणा का एक नया रिकार्ड बनाया है। एक रिकार्ड और मोदी सरकार के नाम होने जा रहा है और वह है १२ महीनो में १६ देशों के दौरे का।  आइये जरा एक एक कर देखें की बारह महीने के अपने शासन  में जनता के लिए क्या घोस्णाए मोदी सरकार ने की है। इन स्कीमों को मोदी सरकार का रोड मैप माना जा सकता है जिनका परिणाम देर सबेर देश की जनता को देखने को मिलेंगे। चलो अच्छे दिन आ गए है अगर यह मह्सूस करने में कुछ संकोच भी हो तो आने वाले समय में ऐसा हो सकता है यह विश्वास कर लेने में कोई कठिनाई  है।



  1.  प्रधान मंत्री जनधन योजना : देश के हर परिवार के लिए एक बैंक खाता खुलवाने का यह कार्यक्रम बहुत ही काम समय में सफल हुआ है। सभी खाता धारकों के लिए एक लाख रुपए का बीमा  और डेबिट कार्ड इसकी विशेषतायें है। इसकी काम समय में सफलता ने इसे गिन्नीज बुक में स्थान दिलवाया है। आर्थिक रूप से पिछड़े लोगो के लिए यह स्कीम  वरदान साबित हो रही है साथ ही देश की एक और  बड़ी समस्या का भी समाधान है जिसकी वजह से गरीबो की सब्सिडी सही आदमी के पास पहुचने के बजाय बिचोलियों के पास पहुंच जाती थी यह अब सीधे खाते में जमा हो जाएगी। 
  2. सांसद आदर्श ग्राम योजना :भारत गावों का देश है यहाँ की  अर्थ व्यवस्था भी गावों के ऊपर निर्भर है इसलिये सभी सांसदों को अपने संसदीय क्षेत्र  में आदर्श गाँव बनाने में अपनी सांसद निधि से मदद करनी चाहिये ताकि दूसरे गांवो को भी प्रेरणा मिल सके और हमारे गाँव उन्नत बने और अपने साथ देश का कल्याण हो सके। योजना अच्छी है लेकिन कितनी प्रभावी है इसका लेख जोखा अगले तीन -चार महीने में जब योजना का एक साल पूरा होगा तो पता चलेगा। 
  3. डिजिटल इंडिया : डिजिटल इंडिया मोदी सरकार का अत्यंत महत्वाकांक्षी प्रोग्राम है। इसके माध्यम से दिन प्रतिदिन के भ्रष्टाचार से प्रभावी  तरीके से निपटने में मदद मिलेगी। इंटरनेट और मोबाइल फोन के माध्यम से जनता को सूचनाए मिल सकेंगी और सरकार की कार्यप्रणाली पारदर्शी हो इसकी सम्भावना भी बढ़ जाएगी तो अनावश्यक समय की बर्बादी रुकेगी  और भ्रस्टाचार भी काबू अ सकेगा। योजना अच्छी है किन्तु इसका प्रभाव दिखने में कम से कम  तीन से चार साल लग जाने की सम्भावना है। 
  4. स्किल,स्केल और स्पीड : तीन एस का फार्मूला मोदी सरकार ने जनता को दिया है। एक मंत्रालय स्किल डेवलपमेंट के लिए अलग से बनाया गया है जिसकी जिम्मेदारी है की युवाओं की व्यवसाईक स्किल डेवलपमेंट  में तेजी लाई जाये ताकि मेक इन इंडिया के लिए हर जरुरी  स्किल के लिए देश में युवा  उपलब्ध हो सके।  इसका स्केल बढ़े और तेजी से यह हो सके इसकी व्यवस्था की गयी है।  इस योजना पर काम पहले से भी हो रहा है, किंचित कारणों से अभी तक यह बहुत प्रभावी नहीं हो पायी है। पुरानी योजनाओं की कमियों  से क्या सबक सीखा है और उसको नयी सरकार सरकार कैसे प्रबन्धन करने वाली है यह बहुत स्पष्ट नहीं है तो भी योजना का प्रभाव  दिखने में दो से तीन साल लग जाये तो कोई जाये तो कोई आश्चर्य नहीं। 
  5. स्मार्ट सिटी : मोदी सरकार ने देश में सौ स्मार्ट सिटी डेवलप करने की एक अति महत्वाकान्छी योजना पर काम करने की घोषणा की है।  योजना अच्छी है इसके दूरगामी परिणाम होंगे। नए रोजगार एवं बने हुये सामानो के लिए देश में एक बड़ा बाजार इस योजना के माध्यम से होंगे। शहरों के बन जाने के बाद एक अच्छी स्वस्थ जीवन शैली बिताने के लिए यह शहर महत्वपूर्ण होंगे,परन्तु यह सबकुछ होने में और लक्ष्य प्राप्त करने में दस से पंद्रह साल तो लगने वाले है  लेकिन कुछ लाभ योजना क्रियान्वन के साथ ही शुरू होंगे, अत: उम्मीद करनी चाहिए अगले चुनावों से पहले योजना के लाभ दिखना शुरू हो जायँगे। 
  6. बुलेट ट्रेन : भारत में रेल यातायात का प्रमुख एवं सस्ता साधन है जिसका इस्तेमाल आम जनता आवश्यकता अनुसार करती है। मॉल वाहन के रूप में भी रेलों का महत्व बहुत अधिक है। अतः यदि रेल नेटवर्क के लिए आधार बहुत संरचना का विस्तार हो  देश के आर्थिक विकास को गति मिलेगी और आम आदमी को सुविधा। लेकिन बुलेट ट्रैन के लिए जिस तरह का इन्वेस्टमेंट करने की आवश्यकता है उस के
    इंतजाम पर सवाल उठना स्वाभाविक है। यहाँ प्रश्न यह भी है की जो संसाधन उपलब्ध है उन्हें कैसे जल्दी से वर्ड क्लास बनाया जाये ताकि आम आदमी को राहत मिले। बुलेट ट्रैन जैसी परियोजनायें देश में शुरू हो इसमें आपत्ति नहीं लेकिन प्रार्थमिकता तय करना आवश्यक है। वैसे भी बुलेट ट्रैन का इस्तेमाल आम लोग कम और खास लोग ज्यादा करने वाले है।
  7.  सौर ऊर्जा : देश की ऊर्जा आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा की मदद से प्राप्ति  हो सकता है इस सम्भावना पर बातें कम से कम १५-२० वर्षों से की जा रही है किन्तु इसका जमीनी प्रभाव लगभग नगण्य है। मोदी सरकार ने भी इस स्रोत के  प्रभावी इस्तेमाल की योजनाये बनायीं है, पिछली गलतियों अथवा इसके प्रभावी स्रोत न बन पाने के कारणों से  कैसे निजात पायी जाये इस पर भी जिम्मेदार लोगो ने
    विमर्श अवश्य किया होगा। लेकिन इसका प्रभाव जमीं पर दिखने में काम से काम ३-४ वर्ष लगेंगे। इसी क्रम में मोदी सरकार ने 48 शहरों को सोलर शहर घोषित  किया है। ३१ को सैद्धांतिक सहमति मिली है और ११ शहरो के मास्टर प्लान में इस योजना को शामिल किया गया है।  आशा है की आने वाले समय में देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में सौर ऊर्जा की भूमिका महत्व पूर्ण  रहेगी।
  8.  बिजनेस करना हुआ आसान :भारत में बिजनेस शुरू करने के लिए तमाम औपचारिकतायें पूरी करनी पड़ती थी जिसमे ४ सप्ताह से लेकर १२ और कभी कभी तो २४ सप्ताह का समय लगा करता था।  मोदी सरकार ने इन औपचारिकताओं  व्याहारिक रूप दिया है और अब एक से दो सप्ताह में बिजनेस शुरू हो सकता है। इसे मोदी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि माना जा सकता है। 
  9. वीसा की सुविधायें :देश के पर्यटन उद्योग को बढ़ाने की अपार संभावनाओं का दोहन करने के लिए तथा दुनिया में कही भी बसे भारत वंशियो को अपने देश से जोड़ने के लिए में मोदी सरकार ने वीसा नियमों को सरल  और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है। मोदी सरकार का यह कदम देश के आर्थिक विकास में अत्यंत महत्व पूर्ण सिद्ध होने वाला है और मोदी सरकार इसमें अत्यंत सफल रही है,इसका प्रभाव भी जमीं पर दिखने लगा है। 
  10. जी एस  टी यानि एकीकृत कर प्रणाली : देश में कर ढांचे को लेकर अनेक प्रकार की आलोचनाओ का शिकार होना पड़ता था साथ ही यह  देश के आर्थिक विकास में एक बड़ा रोड़ा था।  मोदी सरकार ने इसको ठीक करने के लिए कमर कस रखी है ,बना हुआ कानून अप्रेल २०१६ से किसी भी कीमत पर लागू करने का इरादा दिखाया है उम्मीद है की सरकार इसमें सफल होगी और इसका  प्रभाव अगले वित्त वर्ष से दिखना शुरू हो जायेगा। 
अजय सिंह "एकल "