Sunday, June 5, 2016

चित्रों में मोदी के सत्ता में दो साल




दोस्तों ,
मोदी सरकार ने दो साल सत्ता में पूरे किये है। इन कार्यो को लेकर सत्ता पक्ष के लोग अति उत्साहित है और जनता तक अपने किये कार्यो को पहुंचने में व्यस्त है। वही जैसा होता है विपक्ष के लोग निंदा पुराण में लगे है और ऐसे प्रचार कर रहे है मानों सबकुछ पहले से भी बुरा हो रहा है।  इन्ही भावनाओ को व्यक्त किया चित्रों में ,जो मुझे मेरे व्हाट्स एप ग्रुप में प्राप्त हुए है। ये अन्य संदेशों की तरह कही खो न जाये इसलिए इन्हे मैंने ब्लॉग पर डालने का उपक्रम किया है। नीचे दो हुई कविता भी व्हाट्स एप ग्रुप  में ही प्राप्त हुई है आप इसका भी आनंद ले सकते है। 























































अंत में
दो साल की कीमत तुम क्या जानो मोदी बाबू.......
बहुत याद आते हैं ... वो "घोटाले भरे दिन" ....
वो "दामाद बाबू" के खेती-किसानी के चर्चे .... उनके करामती बिजनेस के नुस्खे ।
वो शहजादे का "अध्यादेश के पन्ने फाड़ हवा मे लहराना ....
"राजमाता" का 'गुप्त रोग' के इलाज मे अमेरिका के चक्कर लगाना ....
शहजादे के कमरे मे टेंसूए बहाना ।
वो जिज्जी की चौपाल...... दिग्गी की भौकाल.......
वो जीरो लोस की थ्योरी.....
वो वो... बब्बर की वो 12 रूपये की थाली ....वो घड़ी-घड़ी मोदी को गाली ।
वो डॉलर और पेट्रोल की रेस .... वो CBI तोते के केस ।
वो "मन्नू" का ठुमक-ठुमक कर चलना .... वो हजार सवालों की आबरू रखना ... वो पेड़ पे पैसे का उगना .... .
बहुत याद आते हैं । बहुत याद आते हैं... वो "घोटाले भरे दिन" ।
कहाँ गए वो घोटाले वाले दिन

अजय सिंह"जे एस के "

मथुरा का दर्द


 दोस्तों ,
जय गुरुदेव के कथित शिष्य राम वृक्ष यादव ने पिछले दो वर्षो से ज्यादा समय तक मथुरा के २८० एकड़ में फैले जवाहर मैदान में अपने अंध अनुनाईयो के साथ डेरा दाल रखा था। राम वृक्ष यादव के अनुनायी किस लालच और भ्र्म में थे उन्हें कैसे बरगलाया गया यह जाँच का विषय है। लेकिन उससे भी बड़ी बात यह की मथुरा एक अंतर्राष्टीय ख्याति प्राप्त तीर्थ एवं पर्यटक स्थल है वहां पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे लम्बे समय तकबिना प्रशासनिक इजाजत के इतने लोगो का गैरकानूनी ढंग से सरकारी सम्पत्ति पर कब्ज़ा करके बैठना बिना राजनीतिज्ञों की मिली भगत के संभव ही नहीं है। राजनैतिक कारणों से  भाजपा के लोग इसे प्रदेश की सरकार की असफलता बता सकते है ,हो सकता है की क़ानूनी रूप से या संवैधानिक रूप से यह सही भी हो तो भी केंद्र सरकार और खास तोर पर गृह मंत्रालय को यह समाचार नहीं मिला हो ऐसा असम्भव है। इस जगह से करीब बीस किलोमीटर दूर फरह नाम की जगह है जो जनसंघ के पूर्व अध्यक्ष पंडित दीनदयाल जी की जन्म स्थली है।  पंडित जी के जन्म दिन २५ सितम्बर २०१४ में प्रधान मंत्री जी और २०१५ गृह मंत्री जी का कार्यक्रम हुआ था। इन लोगो की सुरक्षा की दृस्टि से पूरे  इलाके की जाँच और उपयुक्त व्यस्था केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है  अतः केंद्र भी अपनी नाकामी से पीछे है नहीं सकता। 

इस घटना की समुचित जाँच सभी तरह की मिलीभगत को सामने लायेगी। किन कारणों से बिना तैयारी पुलिस दल वहाँ कार्यवाही को  वहाँ पहुँचा जिसमे शहर के एस पी और एक इंस्पेक्टर की जान भी चली गयी। यह भी किसी साजिश की तरफ इशारा कर रहा है। स्थानीय सांसद हेमा मालनी को वहाँ जाने से किन कारणों से रोका  गया यह भी जाँच करके सामने लाया जाना चाहिये। 

इस घटना पर जनता की भावनाओं को व्यक्त  करती इटावा के श्री गौरव चौहान की एक कविता व्हाटस अप पर प्राप्त हुई है जिसमे इन बातों  को बहुत अच्छी तरह बताया गया है।

मैं मथुरा नगरी हूँ,घायल हूँ सत्ता की चोटों से,
कैसे कहूँ वेदना अपनी इन झुलसाये होठों से,
मैं तो प्रेम रंग में डूबी मदमस्तों की नगरी थी,
होली के रंगों में छायी प्रेम सुधा की बदरी थी,
वंशीवट पर बजी बांसुरी,मैं खुल कर इठलाई थी,
मैं कान्हा के बाल रूप पर मंद मंद मुस्काई थी,
मैं मीरा का प्रेम ग्रन्थ थी,सूर दास की स्याही थी,
वासुदेव की लीलाओं की पावन एक गवाही थी,
मैं यमुना के निर्मल तट पर ग्वालों के संग झूमी थी,
गोवर्धन से वृन्दावन तक कृष्णप्रेम मे घूमी थी,
लेकिन आज बहुत घायल हूँ,ह्रदय कष्ट में रोया है,
कांधों पर अपने मैंने चौबिस लाशों को ढोया है,
लुटी पिटी हूँ,पूछ रही हूँ लखनऊ के सरपंचो से,
मेरा सीना क्यों घायल है कट्टों और तमंचो से,
मोहन की मुरली को आखिर किसने चकनाचूर किया,
किसने दो सालों तक गुंडों को सहना मंजूर किया,
लगता है अपने ही कुत्ते पाल रहे थे नेता जी,
रामवृक्ष की जड़ में पानी डाल रहे थे नेता जी,
क्या कारण था,मथुरा की रखवाली नही करा पाये,
दो सालों से बाग़ जवाहर खाली नही करा पाये,
जिस में सारी खीर पकी है,बोलो बर्तन किसका था,
दो सालों तक इसके पीछे मौन समर्थन किसका था,
20 लाख में दो वर्दी वालों का मरण भुलाया है,
गौ भक्षी अख़लाक मरा तो,पूरा कोष लुटाया है,
ना तो ख़ान,हुसैन,अली,ना वोट बैंक के बिंदू थे,
जो कुर्बान हुए वर्दी वाले दोनों ही हिन्दू थे,
मुस्लिम होते तो सत्ता की अंतड़ियां तक फट जातीं,
चार फ़्लैट,रुपये करोड़,नौकरियां तक भी बंट जातीं,
अब ,वर्दी की यही कहानी है,
खुद नेता का हुक्म बजाएं,खुद देनी कुर्बानी है,
कब तक खेल चलेगा भईया,अब जवाब देना होगा,
आने वाले हैं चुनाव सबका हिसाब देना होगा,

अजय सिंह "जे एस के "

Wednesday, May 18, 2016

हिन्दू और मुसलमान धर्म


 आइए देखे हिन्दू धर्म क्यों सरेहश्रेष्ठ है और मुसलमान धर्म मात्र एक नक़ल :

1.कितने हिन्दू भाइयों को ही क्या मुसलमानो को भी ये न पता होगा की पैगम्बर सिकंदर के 500 साल बाद पैदा हुए था।
2. भारत को छोड़ पूरे संसार में रमजान को”रामदान”कहते है,आप गूगल परभी देख सकते हैं । भारत में अपनी नक़ल छुपानेको इन्होने इसे “रमजान” कर दिया | इस्लाम के पवित्र महीना रमजान संस्कृत शब्द”रामज्ञान”का अपभ्रंस है । और मक्का में विश्वप्रसिद्ध शिव लिंग भी था और अभीभी है और ये मुस्लिम हज के समय इस शिवलिंग को ही सज़दा करते हैं।
3. मुहम्मद के चाचा एक हिन्दू थे और अरब में भी आर्य संस्कृति का प्रभाव बहुत था। मुहम्मद के चाचा ने एक पुस्तक भी लिखी थी”शायर उलओकुल “जिसमें हिन्दू संस्कृति की भूरी भूरी प्रसंसा थी बाद में मुहम्मद के बदमाशों नेउन्हें मार दिया था |
4-“मुसलमानो का “नमाज”भी संस्कृत के नमत शब्द से बना है जिसका अर्थ है झुकना |
5- मुसलमानो की दिन में ५ बार नमाज हमारे वेदों के”पञ्च महायज्ञ”की ही नक़ल है |
6-मुसलामानों का त्यौहार “शब्बेरात”शिवरात्री का हीअपभ्रंस है |
7-*नमाज के पहले ५ अंगों को धुलना वेदों के”शरीर शुद्ध्यर्थं पंचांग न्यासः”का ही नियम है |
8-ईद उल फितर भी हिन्दुओं के पित्री पक्षकी नक़ल है और ईद उल फ़ित्र में मुसलमान अपने
पुरखों को ही याद करते हैं |
9-नक़ल यहीं बंद नहीं हुई : गर्भा बना काबा,पुराण बना कुराण, संगे अश्वेत बना संगे अस्वाद, हमारा मलमास बना सफ़र मास, रविसे उनका रबी महिना, उनका ग्यारहवीशरीफ हमारे एकादशी कीही नक़ल है| गृह से ही उनका गाह शब्द बना ईदगाह , दरगाह*********** बस  बिना अकल नक़ल ही नकल 

Friday, May 6, 2016

तेरी कमीज मेरी कमीज से सफ़ेद कैसे?

 मित्रो,
जब से  मोदी  प्रधान मंत्री बने है रोज  कोई न कोई नया बवाल खड़ा हो जाता है। इसमें अधिकांश ऐसे है जिनका समाज अथवा देश के लिए  केवल इतना महत्व है की वह देश की अथवा मोदी की बदनामी करवाने की असफल कोशिश करते दिखाई देते है। हालाँकि ज्यादातर  ऐसे आरोप प्रिंट या सोशल मिडिया अथवा और कहीं भी एक या दो दिन ज्यादा चर्चा में  नहीं रहते है । लेकिन चटखारे लगा लगा कर गॉसिप करने वालो का टाइम पास तो हो ही जाता है।

अरविन्द केजरीवाल के मुख्य मंत्री बन जाने के बाद  मानों बन्दर के हाथ अस्तुरा लग गया है। अपने पद और बुद्धि पर घमन्ड ने पहले तो उन्हें उन अपनों से दूर किया जिनकी सहयता से  पद पर पहुंचे। फिर पार्टी के सिद्धांतो के लिए समर्पित सैकड़ो कार्य कर्ताओ से दूर किया। पता नहीं कैसे और किन सलाहकारों ने केजरीवाल को अपना काम छोड़ कर बाकी दुनियाँ की चिंता करने की सलाह दी है। इसीलिए कभी मोदी  खिलाफ चुनाव कभी योगेन्द्र यादव से मारपीट और अब मोदी की डिग्री की की चिंता उन्हें  दिन सता रही है। शायद उन्हें यह ग़लतफ़हमी गयी है की यदि मोदी की डिग्री नकली साबित हो जाये तो उनका प्रमोशन हो जाएगा और वह मुख्यमंत्री  प्रधान मंत्री  जायेंगे।
वैसे यह ख्वाब देखने वाले वह अकेले मुख्यमंत्री नहीं है। नितीश बाबू ने भी  ख्वाब सजाया है और हो भी क्यों न आखिर जिन के खिलाफ  लड़ाई लड़ कर राजनीत में अपनी जगह बनाई उनकी गोद में बैठ कर एक बार फिर पद प्राप्त हो गया है इसलिए  बिहार की चिंता कम देश की चिंता ज्यादा कर रहे रहे है। इसीलिए अब उन्होंने संघ मुक्त भारत बनाने की घोषणा कर दी है।

मैंने सुना था की पढ़ लिख कर आदमी विनम्र हो जाता है समझदार हो जाता है लेकिन अरविन्द को देख कर लगता है की बड़े और नामी गिरमी संस्थानों में पढाई करके आदमी चालक और घमण्डी हो जाता है जिसको अपने स्वार्थो के सिवाय न कुछ दिखाई देता है न सुनाई देता है। नहीं तो दिल्ली की दशा सुधरने के बजाय ख़राब न होती। जिन वादों से कुर्सी मिली उनका कोई जिक्र पद पर आने  के बाद न होना हर दिन केवल और केवल नए विवादों को जन्म देकर सुर्खियों में बने रहना ही उनका काम रह गया है।  इसलिए केजरीवाल अपनी सारी  ताकत ने मोदी की डिग्री को नकली सिद्ध करने में लगा दिया है।  हम तो केवल उन्हें भगवान सद्बुद्धि दे यह प्रार्थना ही कर सकते है। अरविन्द को पता नहीं की कितने ही ऐसे लोग जिन्होंने स्कूल या कालेज का मुंह भी नहीं देखा बड़े बड़े संस्थानों से पढ़ने वल उनकी नौकरी करते है। उदाहरण के लिए धीरु भाई अम्बानी ,जमशेद जी टाटा जैसे सैकड़ो लोग मौजूद है। नौकरी पाने के लिए बड़ी पढाई जरुरी है लेकिन जीवन में सफलता बुद्धिमानी ,विनम्रता और दूसरों को सम्मान देने से मिलती है।
मोदी का विरोध चाहे व्यक्तिगत हो अथवा सैद्धांतिक इसी काम को प्राथमिकता  देकर सभी विरोधी जिसमे कांग्रेस भी शामिल है कर रहे है।  मोदी देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को ठीक करने के लिए रात दिन जुटे है और बाकी मिलकर इस कोशिश में लगे है की अपनी  कमीज को मोदी की कमीज से ज्यादा सफ़ेद कैसे सिद्ध कर दे। लेकिन शायद इन्हे पता नहीं कीदूसरे की कमीज गन्दी करने से अपनी कमीज साफ़ नहीं होती बल्कि अपनी कमीज को साफ़ करने से वह दूसरे कमीज से ज्यादा साफ़ दिखती है।
भगवान सभी को सद्बुद्धि दे।और जो जिम्मेदारी अरविन्द को दिल्ली की जनता ने उन्हें देकर अपना विश्वास दिया था उसे वह  पूरा करेंगे ताकि त्राहि त्राहि करती जनता को राहत मिले। 

और अंत में 

दुश्मनी करो तो इतनी 
की गर हम फिर दोस्त 
हो जाये तो शर्मिंदा  हो।
अजय सिंह "जे एस के "




Saturday, April 30, 2016

Bhagvat Geeta One setence per chapter



Chapter 1 :
Wrong thinking is the only problem in life

Chapter 2 :
Right knowledge is the ultimate solution to all our problems

Chapter 3 :
Selflessness is the only way to progress and prosperity

Chapter 4 :
Every act can be an act of prayer

Chapter 5 :
Renounce the ego of individuality and Rejoice in the Bliss of Infinity

Chapter 6 :
Connect to the Higher Consciousness Daily

Chapter 7 :
Live what you learn

Chapter 8 :
Never give up on yourself

Chapter 9 :
Value your blessings

Chapter 10 :
See divinity all around

Chapter 11 :
Have enough surrender to see the Truth as it is

Chapter 12 :
Absorb your mind in the Higher

Chapter 13 :
Detach from Maya and Attach to Divine

Chapter 14 :
Live a lifestyle that matches your vision

Chapter 15 :
Give priority to Divinity

Chapter 16 :
Being good is a reward in itself

Chapter 17 :
Choosing the right over the pleasant is a sign of power

Chapter 18 :
Let Go, Lets move to Union with God

Ved Vyasa.....author of Bhagvat Geeta

 

 

 

  In last

 

Awesome. Blessed children.... :

They are the children of Prof Christopher doing research on Bharatiya samskruti in Banaras university They both can chant all the 18 chapters of Bhagavadgita