Thursday, September 2, 2010

काठ की हांड़ी



प्रिय राहुल,

तुम्हारा उड़ीसा के दलित किसानो का सैनिक बनना इतना अच्छा लगा की हिंदुस्तान के सारे मोगेम्बो  खुश  हो गए| किसी ने आपकी  एक बात के लिए तरफ की ,किसीने दूसरे के लिए |कई तो इसलिये खुश  है की आप के दर्शन हो गए और बाकी इसलिये खुश  है की इसी बहाने  उड़न खटोले के दर्शन हुए वर्ना कौन पूछता है   | 
पिछले कई  सप्ताह से आप की   सक्रियता काफी बढ़ी है अच्छी बात है |किसानो को साथ देने उनके गाँव गए  तो प्रधान मंत्री जी ने भी  आप के कहने पर जमीन अधिग्रहण नियम नए सिरे से बनाने की बात सोचनी शुरू की  और अपना कर्तव्य निभाया  | मुझे लगता है प्रधान मंत्री पद के लिए जो दौड़ शुरू करनी थी उसका टैक्सी इंजन रन वे पर दौड़ना  शुरू हो हो चुका है |

मगर यह सबकुछ इतना आसान नही है ,क्या आप को याद है करीब दो साल पहले आप ने एक कलावती नामक महिला के घर खाना खा के उसकी मदद की थी, उसको सरकार ने और कई अन्य संस्थानों ने पैसे भी दिए थे ,एक बार तो ऐसा लगा भी राम ने शबरी के बेर खा कर उसके  जैसे लोगो का उद्धार कर दिया है ,मगर मुझे पता नहीं की आप जिन लोगो से घिरे हो उन्होंने आप को बताया कि नहीं,कि   बाकी की  आबादी अभी भी कलावती की  तरह ही है परेशान है .और वह अभी भी  मुश्किल से  ही दो जून का खाना जुटा पा रही  है जैसे पहले करती थी , लेकिन अब देश की अधिकांश जनता आप की ओर आशा भरी  निगाहों से देख रही है की शायद कोई चमत्कार हो जाये और उनकी स्थिति मै कुछ सुधार हो जाये .हो सकता है की शायद  कांग्रेस का हाथ गरीब जनता के काम आजाये. 

मै तो सोचता था कि राजकुमार को जब  प्रजा की  खराब हालत का पता चल गया है   तो कुछ ऐसी नीति  बनेगी की उसके  जैसे हालत में रहने वाले बहुत सारे लोगो का कल्याण हो जायेगा पर ऐसा कुछ नहीं हुआ ,हाँ आप की यह उपलब्धता जरुर मानी जा सकती है की आप को कुछ और पब्लिसिटी एवं  समर्थक मिलगये ,और  वोट बैंक में बढ़ोतरी हो गई .

ऐसे  ही  बुंदेलखंड  की ख़राब हालत पर तरस खा कर वहां भी आप गए थे कुछ योजनाओ की घोषणा भी हुई, बुंदेलखंड डेवलपमेंट  कारपोरेशन  बनाने  की बात शुरू हुई ,क्या आप को पता है की बात कहाँ  तक  पहुंची,  क्या अगला सूखा  पड़ने के पहले वहां  के हालत सुधरने की व्यवस्था पक्की हो गई है .हो सकता है की आप यह कह दे कि मायावती की सरकार की वजह से आप कुछ नहीं कर सके पर यह तो आम आदमी वाली लाचारी है और आप आम आदमी  थोड़े ही हो यह आप को भी पता है और सरकार को भी .

तो भाई आप तो जहाँ मौका देखते हो सिपाही बन जाते हो ,कंही  भाई बन जाते हो, मतलब ये की मंजे हुए नेता की तरह जैसी जरुरत हुई वैसा रोल कर लिया ,शो खतम होने के बाद कहाँ गंगू तेली और कहाँ राजा भोज  .पर ये सब तो लोग बहुत पहले से ही कर रहे है तभी तो देश की ये हालत है की आम आदमी की जिन्दगी दो जून की रोटी जुगाड़ने  में निकली जा रही है और वह अपनी किस्मत और  कर्मो पर रो रहा है. एक तरफ तो हजारो करोड़ खर्च करके सरकार खेल करवा रही है और सरकारी लोग खेल कर रहे है मगर आप भी मूक  दर्शक हो और हम तो खैर कर ही क्या सकते है  ,इतना ही नहीं तो गोदाम मै गेंहू सड़ रहा है और मंत्री जी कहते है की बांटेगे नहीं अरे राहुल भैया आप की तो बात सब सुनते है तो आप कुछ करते क्यों नहीं ?  आप की सरकार के एक और मंत्री जी है जो  बाकी जनता को तो  ये समझाते है की महंगाई घट  रही है ,महंगाई उन्नति का लक्षण है इसलिए  और थोडा  इन्तजार कर लो लेकिन  अपनी  और आप के जैसे सांसदों की पगार एक ही सत्र में  दो बार में पांच गुना बढ़ा दिया ताकि बढ़ी महंगाई का असर आप जैसो  पर ना पड़े .क्या आप बता सकेंगे की इससे देश को क्या फायदा हुआ  और क्या सांसद अब काम  ज्यादा जिम्मेदारी से करेंगे ,जो काम पगार की वजह से नहीं कर पा रहे थे .ये तो सब जनता  को पता है की जो लोग रु ५ से २५  करोड़   खर्च कर संसद पहुंचे है उनके लिए साल के ५० लाख तो इन्वेस्टमेंट पर  ब्याज वसूलने जैसा है असली कमाई तो कहीं और से है,  लेकिन इतना जरुर हुआ है की इससे सांसद गरीब जनता को मुहं    चिढाते हुए  लग रहे  है और कांग्रेस का हाथ जनता के साथ ना दिख कर मुहं पर चाटा जैसा दिखने लगा है.

माननीय राहुल जी क्या आप को पता है, कि महात्मा गाँधी जिनके नाम पर कांग्रेस पार्टी इस देश में राज कर रही है  उन्होंने ज़ब देखा की गरीब के पास धोती नहीं है तो उन्होंने तो  कपड़ा पहेनना छोड़ एक धोती में रहने का व्रत लिया और आधी धोती ओढ़ ली आधी पहन ली और कहने लगे  "जब अर्ध नग्न है देश मुझे तन ढकने का अधिकार नहीं " फिर सारी जिन्दगी इस व्रत को ईमानदारी से निभाया और  आप भी उन्ही के पद चिन्हों पर चलते दिखना तो  चाह  रहे हो, लेकिन  मजा लूट रहे हो सरकारी खर्चे पर , दुनिया की सारी सुख  सुविधाए आप के आगे पीछे उपलब्ध है,   बड़ी बड़ी कारे, प्राइवेट हवाई जहाज, लन्दन में छुट्टी मनाने कि आदत   लोग सोंचते है  कि  वाह क्या नाम का  गाँधी है . अरे  भाई  ऐसा उदाहरन    रखो  की लगे की आप दूसरो से अलग हो, लोग आप को रोल मॉडल समझे ,वरना मुझे तो आप दूसरे नेताओ से केवल   इतना  ही  फर्क  लगते हो की आप  प्रधान मंत्री पद के खानदानी दावेदार हो और अपने पूर्वज प्रधान मंत्रियो कि तरह ही चारो ओर एक से बढ़ कर एक चाटुकारों से घिरे हो ,वो लोग  भी  इस आशा में लगे है  की ज़ब कभी आप का नंबर आएगा तो वो भी कुछ बन जायेंगे जिस दिन यह आशा ख़तम हुई ये ढूंढे नहीं मिलेंगे .

इसलिए भैया अभी टाइम है ये नाटक नौटंकी छोड़  "चाल वो चल की पसेमर्ग तुझे याद करे ,काम वो कर की  ज़माने में तेरा नाम रहे " नहीं तो याद रखना की काठ की हांड़ी बार बार नहीं चढ़ती है .लोग केवल अपने काम से पूजे जाते है, खानदान  कि वजह से तो पूजा थोड़े ही दिन हो सकती है .आपकी दादी और पिता श्री उदाहरण है कि एक सीमा के बाद उनको भी  जनता ने उखाड़ कर फ़ेक दिया था .
जय श्री कृष्ण                             "Ajay Singh"
                                         




2 comments:

Magical said...

The writing is thought provoking. I would only like to say that when education spreads far and wide and everybody in this country receives good education "Kath Ki Handi" would become a thing of past.

Pradeep said...

The media has been now hired by congress party to project Rahul Gandhi as next only possible PM and show Indians what a great person Rahul is on which future of this country depends. .
India has issues of survival, no food for poor, no land for family members of farmers to make a living, the whole country is intoxicated by cricket, what an individual would do to survive and progress in life. Any poor Indian would fall for such gimmicks by Cunning people such as Rahul Gandhi and hired media would publicize such events projecting how great is Rahul Gandhi. No hope for poor in this country