Sunday, October 2, 2011

सूत न कपास जुलाहों का लट्ठम -लट्ठा

प्रिय दोस्तों ,

अगर आपने अबतक बिना सूत कपास के जुलाहों का लट्ठम -लट्ठा न देखा हो तो भाजपा के नेताओ में प्रधान मंत्री पद के लिए मचे घमासान को देख लीजिये ,हर कोई जल्दी  से जल्दी कौन बनेगा करोड़पति की तर्ज पर खेले जा रहे खेल कौन बनेगा प्रधानमंत्री की हॉट सीट पर पहुँचने  के लिए जुगत में लगा हुआ है. कोई इन नेताओ से पूछे की जरा यह बताने का भी कष्ट करे की भूख ,आतंकवाद ,महंगाई से पीड़ित जनता को निजात दिलवाने में आप का  क्या योगदान  है . जनता को भय ,भूख और भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने के लिए आपके पास क्या योजनाए है इस पर कोई चर्चा ,कोई व्याहारिक नीत जिससे जनता को कोई राहत मिल सके   इस पर कोई श्वेत पत्र ,पर यह सब सोचने की फुर्सत कहाँ है ? यह तो केवल यह सोच -सोच कर खुश है जनता कांग्रेस से परेशान   है इसलिए इनको बहुमत मिल जायेगा.अब आखिर कर दूरदर्शन में बहस करने जिन नेताओ को बार -बार बुलाया जा रहा है उन्हें लगता की जनता बार-बार इनको देख रही है तो चुनते वक्त भूल थोड़ी जाएगी  . आडवानी जी को लगता है की अबकी नहीं तो कभी नहीं हालाँकि आला कमान ने संकेत दे दिए है, बयान आडवानी जी का भी आगया है लेकिन फिर भी लग रहा है की शायद रथ यात्रा से कुछ  बात बन जाये ,मोदी जी उपवास से शुरुवात  करके यात्रा भी कर लेना चाहते है कहीं ऐसा न हो रथ यात्रा के महारथी बाजी न मार ले जाये ,तो गडकरी जी सोचते है जब खुदा की मेहरबानी एक बार हो चुकी है तो दुबारा भी चमत्कार हो सकता है .डा. जोशी से लगा कर अरुण जेटली और सुषमा स्वराज मन ही मन गुलगुले पका रहे है और एक दुसरे को झटका देने को बेताब नजर आ रहे है.

सबसे बढ़िया खेल तो किया चिदम्बरम और प्रणव दादा ने. २ जी की आंच जब चिदम्बरम तक पहुंची तो मंत्री मंडल के वरिष्ठ  सहयोगी प्रणव दादा ने पहले तो तोप का मुंह चिदम्बरम की तरफ  घुमा  दिया ,लेकिन रिंग मालकिन सोनिया  ने जब दोनों को हंटर दिखाया तो दादा ने फटाफट बयान दे के चिदम्बरम की जान और अपनी लाज बचाई  .इस सारे खेल में जनता और विपक्ष देखते ही नहीं बल्कि  हाथ मलते रह गए मानो सारा झगड़ा २ जी घोटाले का न हो कर प्रणव और चिदम्बरम का रह गया हो, इसलिए इनका समझोता होते ही घोटाला भी ख़तम हो गया और जाँच की जरुरत भी. जनता हतप्रभ है बंदरो की लड़ाई में बिल्ली का रोल देख कर . चिदम्बरम तो इतने खुश है की उन्होंने सार्वजनिक बयान दे दिया है की अब उन्हें यह भी याद नहीं है की उन्होंने पद से इस्तीफा देने की पेशकश भी की थी,  है न कमाल आदमी ख़ुशी में सब कुछ भूल जाता है  और जनता  दुःख भरे दिन जो बेकाबू महगांई ,  आए दिन होने वाली       आतंकवादी घटनाओ और  रोज मर्रा की परेशानियों से निजात पाने के लिए एक-एक कर काट रही है और यह  सोच रही है की आधी तो कट गयी और  अब तो आधी ही बची है वोह भी जल्दी ही कट जाएगी .

भारत देश आज अपने दो महान सपूतो को याद कर रहा है .महात्मा गाँधी जो पैदा तो भारत में हुए लेकिन अपने काम से  विश्व धरोहर बन गए . गाँधी द्वारा पढाया गया  अहिंसा  का पाठ पूरे  विश्व में एक मिसाल बन गया है और इसकी ताकत समझ कर दुनिया में अनेक देशो ने अहिंसात्मक  तरीको  को अपना कर  सत्ता परिवर्तन किया है.और  भारत  में तो गाँधी नाम की ब्रांड इक्विटी इतनी है की यह नाम पीढ़ी दर पीढ़ी सत्ता पाने  की  गारंटी हो  गया है. खैर गाँधी  ने इस देश को जो दिया है वोह इस देश के लोग कभी भुला नहीं सकेंगे .

भारत के द्वितीय   प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने जय जवान जय किसान का नारा दे कर देश की  खादान्य जरूरतों में भी  आत्मनिर्भर बनाया और सैन्य जरूरतों में भी .नतीजतन भारत १९६५ के युद्ध के बाद कोई युद्ध नहीं हारा. एक बात जो शास्त्री जी के प्रधान मंत्री बनने से सिद्ध हुई वोह यह की साधारण परिवार में पैदा हुआ और साधारण कद काठी का भी कोई आदमी यदि दृढ निश्चय के साथ कुछ करना चाहता है तो उसकी सहायता भगवान भी करते है और देश की जनता भी.

 हम सब भारत वासी शास्त्री जी के मार्ग दर्शन के लिए आभारी है और चाहते है की फिर शास्त्री जी जैसा साधारण लेकिन देश हित की बात सोचने वाला ,देश के लिए परिवार त्यागने वाला और देश हितो पर मर मिटने के तैआर व्यक्ति फिर देश का नेतृत्व करे .

और अंत में 
समय समय की बात है,समय समय का योग 
लाखो में बिकने लगे ,दो कौड़ी  के लोग 
अजय सिंह "एकल"

4 comments:

Sunil said...

samay samay ki baat hai...samay samay ka yog...lakho mei bikne lage.....do kodi ke log....khub kahi sir...

Punchline of the story:

"झगड़ा २ जी घोटाले का न हो कर प्रणव और चिदम्बरम का रह गया हो, इसलिए इनका समझोता होते ही घोटाला भी ख़तम हो गया और जाँच की जरुरत भी. जनता हतप्रभ है बंदरो की लड़ाई में बिल्ली का रोल देख कर . चिदम्बरम तो इतने खुश है की उन्होंने सार्वजनिक बयान दे दिया है की अब उन्हें यह भी याद नहीं है की उन्होंने पद से इस्तीफा देने की पेशकश भी की थी, है न कमाल आदमी ख़ुशी में सब कुछ भूल जाता है और जनता दुःख भरे दिन जो बेकाबू महगांई , आए दिन होने वाली आतंकवादी घटनाओ और रोज मर्रा की परेशानियों से निजात पाने के लिए एक-एक कर काट रही है और यह सोच रही है की आधी तो कट गयी और अब तो आधी ही बची है वोह भी जल्दी ही कट जाएग"

vkjaitly said...

Keep it up. Good show. I don't subscribe to the view of any fight for chair between Modi and Advani. However, it is very natural for anyone so near to the top that they have full right to have some aspirations to reach to the top, as far as they don't cast any aspersions on each other openly. And I appreciate the respect that Modi and Advani has demonstrated for each other. Their fight for the PM's candidate is the imagination of the media.

Dola M said...

Wonderful commentry on the recent developments, in a classic Ajay Singh way. I always enjoy reading these very creative, subtle but poignant blogs. Thanks Ajay Ji.

ARUN SHUKLA said...

Bhai Ajai, Maja aa gaya