Sunday, October 17, 2010

मुन्ना बदनाम हुआ

प्रिय देशवासियो ,
हम तो बदनाम हुए ऐसे इस ज़माने में ,
            तुम को लग जाएँगी सदिया हमें भुलाने में
                                                      - "पदम् भूषण श्री गोपाल दास नीरज "
मुन्ना हो या मुन्नी  बदनाम कोई भी हो सकता है .लेकिन मजा इस बात का है की बदनामी में मिला क्या.कवि नीरज कहते  है की बदनाम भी  होंगे तो क्या नाम ना होगा यानि बदनामी में भी कम से कम नाम तो होता  ही है ,जो और ज्यादा सयाने है वो बदनाम हो के झंडू बाम का विज्ञापन    झटक  लेते है जैसा मुन्नी ने किया . लेकिन जो वाकई में सयाने है उनकी   कमाई लाखो ,करोडो में नहीं अरबो में है चाहे देश ने इसकी कोई भी कीमत चुकाई हो. 

खेल की बिसात बिछ गयी है  ,खेल गाँव आबाद हो गया है  कुछ साँप पहचान लिए गए है और उनके लिए तो सपेरे भी आगये है, लेकिन आस्तीन के साँपो का क्या होगा  ?जिनसे  खेल ख़तम होने के बाद निपटने का आश्वाशन प्रधान मंत्री से लगा कर अन्य उच्च अधिकारिओ ने इस देश को दिया है  .शायद ठीक ही कहा था शहीदे आजम भगत सिंह ने "गोरे अंग्रेजो से तो एक बार ही निपटना है ,एक बार चले गए तो बात ख़तम लेकिन काले अंग्रेजो से कैसे निपटेंगे जो हमारे बीच में ही है और जिनके पैरोकार भी हमारे लोग ही होंगे" .लेकिन कोई तो बात है जो  मिटती  हस्ती नहीं हमारी .अगर बाबर,गोरी और गजनी जैसे सैकड़ो लोगो के  मिल कर लूटने पर भी हम बने  हुए है तो कोई तो  बात है . लेकिन ये जीना भी कोई जीना है लल्लू  की एक तरफ तो स्थिती है लोग ज्यादा खा कर मर रहे है और दूसरी तरफ लोग भूख से .लेकिन चलो हम तो काम चला ही लेंगे क्योंकि ऐसे ही जीने के आदी है , लेकिन तेरा क्या होगा कालिया ?ये कालिया और कोईं नहीं बस देश में फैला  भ्रष्टाचार और भाई भतीजा वाद  है जिस वजह से कामन वेल्थ  गेम की अर्गेनिजिंग  कमेटी में केवल मुन्ना के पास और  दूर के लोगो  को जगह मिली  और  जिसका परिणाम हुआ की योजना लागत १० गुना  बढ़ गयी और तिस पर भी दुनिया भर  में थू थू .पर चलो अंत भला तो सब भला और अब  बात बन जाएगी ऐसी उम्मीद है .
जब बारात आई तो बरातियो में कुछ मामा टाइप लोग भी स्वाभविक थे ,अब जब बारात UK से आए तो आस्ट्रेलिया के लोग तो मामा ही हुए ना ,इसिलए इन लोगो  ने सबसे ज्यादा उधम काट कर ये दिखा दिया कि केवल चमड़ी गोरी होने से आदमी को तमीज नहीं आती ,बल्कि काले लोग  तमीज दार भी होते है ओर सहनशील भी साथ ही घर आए लोगो कि इज्जत भी करते है वर्ना इन्होने तो केवल वाशिंग मशीने तोड़ी यहाँ के लोग तो इन्हें ही तोड़ देते .खैर बरातियो को घर बुलाने के बाद तो हिन्दुस्तानी साथ आए कुत्ते को भी उतनी ही इज्जत देते है जितनी मनुष्यों को ,तो एक बार फिर मेहमान नवाजी का रिकॉर्ड हिन्दुस्तानियो ने दुनिया के सामने रखा.
कम से कम अगले खेलो में ऐसा नहीं होगा इस उम्मीद के साथ  2014 में होने वाले खेलो के लिए हमारी शुभ कामनाए.

मेहमान नवाजी में तो हमारा वैसे भी कोई सानी नहीं ,हम खाने में भी तेज और खिलाने में भी .गेम की तैयारी  में ही इतना खा गए की सात पीढ़िया  याद करेंगी लेकिन बढ़िया बात ये की मेहमानों को ऐसा खिलाया की उनकी भी पीढ़िया   बहुत दिनों तक याद करेंगी .चलिए खेल ख़तम होने के बाद तो वैसे भी यादे ही रह जाती है .थोड़ी अच्छी थोड़ी ख़राब .

सवाल ये नहीं है की लोग हमारे बारे में क्या सोचते है ,सवाल ये है की हम अपने बारे में क्या सोचते है.यदि हम ही अपने आत्म गौरव की राष्ट्र गौरव की  बात करने में संकोच करते है तो फिर आप हूपर से कैसे उम्मीद कर रहे है की वो आपके बारे में अच्छा   सोचेगे . और जब ओ सी ,चेअरमेन कलमान्द्दी  ओर खेल मंत्री गिल आपस में तब ही मित्र बनते है जब मुसीबत से निपटना हो, नहीं तो मोर और साँप के जैसे दोस्ती ,वैसे ये केवल इनके लिए ही नहीं और भी बहुत से लोग ऐसे है जैसे मुख्मंत्री शीला दीक्षित  ओर लेफ्टिनेंट गवर्नर तजेंद्र खन्नाजी ,बारात बिदा हुई भी नहीं लग गए हिसाब लगाने कि क्रेडिट किसको मिलेगा ,हमको मिले तो ठीक नहीं तो मेरे सामने दूसरा कैसे ले जाएगा . देश की जनता जो बिचारी मूक दर्शक ही बनी रही खेलो के पहले भी ,खेलो के दौरान  भी ओर खेलो के बाद भी क्योंकि खेलने में मजा ही तब है जब ताली बजाने वाली भीड़ भी हो ,तो हमने वही  किया भी पर जिनके लिए ताली बजाते है उनको भी तो सोचना है की सबकुछ अपने लिए ही  करना है या जो अँधेरे में बैठे है उन पर भी नजर डालेंगे और उनके भी जीने का इंतजाम करेंगे. 
.
तो भई अब जब २०२० के  ओलंपिक का दावा भी करने की बात शुरू हो गई है ,कम से कम इतना निश्चय करे की भारत की वो तस्वीर पेश  करेंगे दुनिया के सामने की अब इस देश में कोई भूखा नहीं सोता है ,कोई अनपढ़ नहीं है और सरकार भी केवल बलवानो की नहीं बल्कि आम आदमी की है .देश में श्रम करने वालो की इज्जत होती है ,बेईमानो की नहीं .तब ही हम पुनः विश्व गुरु के पद  पर इस महान देश को प्रतिष्ठित कर पाएंगे .आइये हम सब मिलकर दशहरे के पावन पुनीत पर यह प्रण करे और देश में राम राज्य की पुनः स्थापना का काम शुरू करे.

नवरात्री एवं दशहरे की शुभकामनाओ सहित 

अजय सिंह "एकल"















Sunday, September 19, 2010

अब द्वारे खड़ी बारात

प्रिय जनों ,


बारात आने में केवल १५ दिन बाकी है| शेरा मुस्करा रहा है , ठेकेदार  हँस रहे  है ,आयोजन समिति के लोग ठहाका लगा रहे है, मंत्री जी कहते है की हमने तो पहले ही कहा था की बारात को आने दो सब ठीक हो जायेगा |हम हिन्दुस्तानी राएता समेटने में निपुड है लेकिन इसको सिद्ध करने के लिए पहले फैलाना पड़ेगा | विरोधी पार्टी वाले तो यू ही आरोप लगाते रहते है ,अरे बाद में बैठा लेना आयोग | पहले इतने आयोग बैठाये तो क्या कुछ हो गया ,जो आगे हो जायेगा |एक बार काम खतम  और पैसा हजम हो तो फिर कौन पूछता है |


देखो खेल गाँव कितना सुन्दर बना है ,यमुना के किनारे |हम है गाँधी के सिधान्तो को मानने वाले , वो सारी जिन्दगी गाँव को सुन्दर बनाने में लगे रहे और हमने सुन्दर सा गाँव दिल्ली में ही बना दिया | देखो गे तो देखते रह जाओगे , गाँव इतना सुन्दर की शहर वाले भी रस्क करे| क्या नहीं है गाँव में ,आलिशान वातानुकूलित कमरे रहने के लिए  ,खेलने  के लिए जिम ,जीमने के लिए १५० तरह के देसी-विदेसी  व्यंजन |वाह क्या बात है १२ मिनट  में ९ की .मी.   पहुचने के लिए नाले पर सड़क |


"न्यूयार्क जैसी दिल्ली हो मेरी कब ऐसा मैंने सोचा था ,
                                        पर आज ये बिलकुल वैसी है जैसा मैंने सोचा था" | 
                                                                             

डेंगू फैलाते  मच्छर , सडको में गड्ढे , टूटे फूटे फूटपाथ अब सब बाते जल्दी ही पुरानी  हो जाएँगी , और दिल्ली होगी मेरी जान ,मेरी शान |


मैंने तो सुना है की पुराने ज़माने में तो जब लड़की के घर लड़के वाले आते थे तो पडोसी का सोफा घर में लगा कर अपनी  शान बढ़ा लेते थे |अब तो जमाना इतना बदल गया है की गमी हो जाये तो प्रोफेशनल   रोने वाले भी मिलते है तो भई विदेशी मेहमानों के आने के पहले पुरानी फर्श पर ईरानी कालीन डाल कर सुन्दर बना लेने में क्या हर्ज है अब कोई कालीन उठा कर तो देखेगा नहीं | इसलिये चारो ओर अफरा तफरी मची है जल्दी-जल्दी काम खतम करो बारात आने वाली है | वैसे भी हम  हिन्दुस्तानी गड्ढे खोदने और उसको भरने में इतने माहिर है की बाद में तो ये पता चलाना भी  मुश्किल है की पहले कोई गड्ढा खुदा भी था | बस ,कामन वेल्थ खेलो में लगे गाइड को समझा देना की मेहमानों को दिल्ली कहाँ  तक की दिखानी है ,कहाँ  तक की बतानी है , उसके आगे पीछे गए तो कंडीशन अप्लाई हो जाएगी और हमारी  जिम्मेदारी ख़तम ,बाद में ना कहना की बताया नहीं था |


और दिल्ली वालो तुम लोग भी ध्यान से सुन लो ,इधर -उधर थूकने का नहीं ,लाल बत्ती तोड़ने का नहीं ,रेस्ट केवल रेस्टरूम में, बस वाले भैया जरा गति संभाल के नियम कायदे से चल लो केवल १५ दिन की ही तो बात है | हमेशा दिल्ली की पब्लिक के साथ रहने वाले पुलिस  वालो अब नाक आपके हाथ में ही है सो भई दो हफ्ते बिना मेवा ही सेवा करदो ताकि नाक बची रहे ,फिर तो सारी जिन्दगी पड़ी है कमाने  खाने को | हालाकि नाक केवल तुम्हारे हाथ में ही नहीं है और भी कई विभाग है सरकार के किसी को डेंगू रोकना है और किसी को सीवर नाला ,कहीं इन्द्र भगवान ने कृपा की तो फिर सब कुछ पानी -पानी |


लेकिन बारात आने का  इन्तजार तो उन्हें ही होता है जिनके घर आती है ,हमारे जैसे लोगो को  तो बारात जाने का इन्तजार है , ताकि हम फिर सड़क की  दोनों लेन में आराम से चल सके और वह सबकुछ कर सके जो अंग्रेजो के ज़माने से करते आए है|हमको हमारी जरुरत की दूध और सब्जी  ठीक भाव पर मिलसके  ,बच्चे फिर स्कूल जा सके ,और पांच साल बाद हम फिर बारात के खुशी -खुशी बिदा होने की खुशिया मना  सके और  जी सके जिन्दगी अपने हिसाब से |


अजय सिंह "एकल" 













Friday, September 10, 2010

Gujarat As I saw it



Hi,
Last month I went Gujarat ,after along time may be after  20 long years I got this opportunity . Past many years I used to listen "Vibrant Gujarat", I had all the reason to believe that it is just a slogan like many other slogans which are  popularized in support of the respective Governments regime like  "Shining India" of NDA Government or "Bharat Nirman" of UPA.

I was surprised, when I saw two girls driving  a scooty at around 12.30 night on a road near  bank of a jheel in city  and a  crowed of 15-20 people enjoying "Chat " on the stall  in Ahmadabad where my flight landed at 12.10 in mid night and  I was passing from there  while going from Airport to my hotel .Next Day I visited the secretariat and met many IAS officers found them positive and cooperative. Also had an opportunity of see MR. Ashok C Bhatt the Hon'able Speaker of State  Assembly who was very cordial and extend unexpected  help.

Next day I went to see the nearby villages  I saw the  prosperity of the area was visible and people were cooperative. In a middle school of the village I found a computer  lab and to best of my surprise it was working also. The principal informed that they are teaching computer from class 4. Same day I had an opportunity to meet Director Bhaskaracharya Institute For Space Applications and Geo-Informatics where students of class 6 -7 were being taught in three different studios and the same program in the rural school of Gujarat was being live  telecast-ed to teach the rural students. I was also informed that Mr. Narendra Modi  and cabinet colleagues are using this facility to address the villagers of the state on all important issue to establish direct communication with the public in the state.It is just not ceremonial  which is done as part of national functions like 15th August and 26th January , some important festivals or waiting for emergency like 26/11 etc. when it becomes mandatory for the leadership to use it for morel boosting of the public.It was pleasant and memorable experience of feeling the "Vibrant Gujarat" .

I am associated with an NGO  "EKAL MOVEMENT " which is empowering rural people all over India having 34000 villages in net work .Past 10 years there were many villages in Gujarat too where we  were working , this April we have winded from there because could not find an opportunity to work on the project we work on, that is already achieved.

An honest assessment of the state made me believe that "Vibrant Gujarat" is just not a slogan. My salute to the  leadership and the people of Gujarat with out whose cooperation this would have not been possible to make Gujarat a role model for other states of India.

Ajay Singh "EKAL"




Thursday, September 2, 2010

काठ की हांड़ी



प्रिय राहुल,

तुम्हारा उड़ीसा के दलित किसानो का सैनिक बनना इतना अच्छा लगा की हिंदुस्तान के सारे मोगेम्बो  खुश  हो गए| किसी ने आपकी  एक बात के लिए तरफ की ,किसीने दूसरे के लिए |कई तो इसलिये खुश  है की आप के दर्शन हो गए और बाकी इसलिये खुश  है की इसी बहाने  उड़न खटोले के दर्शन हुए वर्ना कौन पूछता है   | 
पिछले कई  सप्ताह से आप की   सक्रियता काफी बढ़ी है अच्छी बात है |किसानो को साथ देने उनके गाँव गए  तो प्रधान मंत्री जी ने भी  आप के कहने पर जमीन अधिग्रहण नियम नए सिरे से बनाने की बात सोचनी शुरू की  और अपना कर्तव्य निभाया  | मुझे लगता है प्रधान मंत्री पद के लिए जो दौड़ शुरू करनी थी उसका टैक्सी इंजन रन वे पर दौड़ना  शुरू हो हो चुका है |

मगर यह सबकुछ इतना आसान नही है ,क्या आप को याद है करीब दो साल पहले आप ने एक कलावती नामक महिला के घर खाना खा के उसकी मदद की थी, उसको सरकार ने और कई अन्य संस्थानों ने पैसे भी दिए थे ,एक बार तो ऐसा लगा भी राम ने शबरी के बेर खा कर उसके  जैसे लोगो का उद्धार कर दिया है ,मगर मुझे पता नहीं की आप जिन लोगो से घिरे हो उन्होंने आप को बताया कि नहीं,कि   बाकी की  आबादी अभी भी कलावती की  तरह ही है परेशान है .और वह अभी भी  मुश्किल से  ही दो जून का खाना जुटा पा रही  है जैसे पहले करती थी , लेकिन अब देश की अधिकांश जनता आप की ओर आशा भरी  निगाहों से देख रही है की शायद कोई चमत्कार हो जाये और उनकी स्थिति मै कुछ सुधार हो जाये .हो सकता है की शायद  कांग्रेस का हाथ गरीब जनता के काम आजाये. 

मै तो सोचता था कि राजकुमार को जब  प्रजा की  खराब हालत का पता चल गया है   तो कुछ ऐसी नीति  बनेगी की उसके  जैसे हालत में रहने वाले बहुत सारे लोगो का कल्याण हो जायेगा पर ऐसा कुछ नहीं हुआ ,हाँ आप की यह उपलब्धता जरुर मानी जा सकती है की आप को कुछ और पब्लिसिटी एवं  समर्थक मिलगये ,और  वोट बैंक में बढ़ोतरी हो गई .

ऐसे  ही  बुंदेलखंड  की ख़राब हालत पर तरस खा कर वहां भी आप गए थे कुछ योजनाओ की घोषणा भी हुई, बुंदेलखंड डेवलपमेंट  कारपोरेशन  बनाने  की बात शुरू हुई ,क्या आप को पता है की बात कहाँ  तक  पहुंची,  क्या अगला सूखा  पड़ने के पहले वहां  के हालत सुधरने की व्यवस्था पक्की हो गई है .हो सकता है की आप यह कह दे कि मायावती की सरकार की वजह से आप कुछ नहीं कर सके पर यह तो आम आदमी वाली लाचारी है और आप आम आदमी  थोड़े ही हो यह आप को भी पता है और सरकार को भी .

तो भाई आप तो जहाँ मौका देखते हो सिपाही बन जाते हो ,कंही  भाई बन जाते हो, मतलब ये की मंजे हुए नेता की तरह जैसी जरुरत हुई वैसा रोल कर लिया ,शो खतम होने के बाद कहाँ गंगू तेली और कहाँ राजा भोज  .पर ये सब तो लोग बहुत पहले से ही कर रहे है तभी तो देश की ये हालत है की आम आदमी की जिन्दगी दो जून की रोटी जुगाड़ने  में निकली जा रही है और वह अपनी किस्मत और  कर्मो पर रो रहा है. एक तरफ तो हजारो करोड़ खर्च करके सरकार खेल करवा रही है और सरकारी लोग खेल कर रहे है मगर आप भी मूक  दर्शक हो और हम तो खैर कर ही क्या सकते है  ,इतना ही नहीं तो गोदाम मै गेंहू सड़ रहा है और मंत्री जी कहते है की बांटेगे नहीं अरे राहुल भैया आप की तो बात सब सुनते है तो आप कुछ करते क्यों नहीं ?  आप की सरकार के एक और मंत्री जी है जो  बाकी जनता को तो  ये समझाते है की महंगाई घट  रही है ,महंगाई उन्नति का लक्षण है इसलिए  और थोडा  इन्तजार कर लो लेकिन  अपनी  और आप के जैसे सांसदों की पगार एक ही सत्र में  दो बार में पांच गुना बढ़ा दिया ताकि बढ़ी महंगाई का असर आप जैसो  पर ना पड़े .क्या आप बता सकेंगे की इससे देश को क्या फायदा हुआ  और क्या सांसद अब काम  ज्यादा जिम्मेदारी से करेंगे ,जो काम पगार की वजह से नहीं कर पा रहे थे .ये तो सब जनता  को पता है की जो लोग रु ५ से २५  करोड़   खर्च कर संसद पहुंचे है उनके लिए साल के ५० लाख तो इन्वेस्टमेंट पर  ब्याज वसूलने जैसा है असली कमाई तो कहीं और से है,  लेकिन इतना जरुर हुआ है की इससे सांसद गरीब जनता को मुहं    चिढाते हुए  लग रहे  है और कांग्रेस का हाथ जनता के साथ ना दिख कर मुहं पर चाटा जैसा दिखने लगा है.

माननीय राहुल जी क्या आप को पता है, कि महात्मा गाँधी जिनके नाम पर कांग्रेस पार्टी इस देश में राज कर रही है  उन्होंने ज़ब देखा की गरीब के पास धोती नहीं है तो उन्होंने तो  कपड़ा पहेनना छोड़ एक धोती में रहने का व्रत लिया और आधी धोती ओढ़ ली आधी पहन ली और कहने लगे  "जब अर्ध नग्न है देश मुझे तन ढकने का अधिकार नहीं " फिर सारी जिन्दगी इस व्रत को ईमानदारी से निभाया और  आप भी उन्ही के पद चिन्हों पर चलते दिखना तो  चाह  रहे हो, लेकिन  मजा लूट रहे हो सरकारी खर्चे पर , दुनिया की सारी सुख  सुविधाए आप के आगे पीछे उपलब्ध है,   बड़ी बड़ी कारे, प्राइवेट हवाई जहाज, लन्दन में छुट्टी मनाने कि आदत   लोग सोंचते है  कि  वाह क्या नाम का  गाँधी है . अरे  भाई  ऐसा उदाहरन    रखो  की लगे की आप दूसरो से अलग हो, लोग आप को रोल मॉडल समझे ,वरना मुझे तो आप दूसरे नेताओ से केवल   इतना  ही  फर्क  लगते हो की आप  प्रधान मंत्री पद के खानदानी दावेदार हो और अपने पूर्वज प्रधान मंत्रियो कि तरह ही चारो ओर एक से बढ़ कर एक चाटुकारों से घिरे हो ,वो लोग  भी  इस आशा में लगे है  की ज़ब कभी आप का नंबर आएगा तो वो भी कुछ बन जायेंगे जिस दिन यह आशा ख़तम हुई ये ढूंढे नहीं मिलेंगे .

इसलिए भैया अभी टाइम है ये नाटक नौटंकी छोड़  "चाल वो चल की पसेमर्ग तुझे याद करे ,काम वो कर की  ज़माने में तेरा नाम रहे " नहीं तो याद रखना की काठ की हांड़ी बार बार नहीं चढ़ती है .लोग केवल अपने काम से पूजे जाते है, खानदान  कि वजह से तो पूजा थोड़े ही दिन हो सकती है .आपकी दादी और पिता श्री उदाहरण है कि एक सीमा के बाद उनको भी  जनता ने उखाड़ कर फ़ेक दिया था .
जय श्री कृष्ण                             "Ajay Singh"
                                         




Sunday, August 22, 2010

अँधा बांटे रेवड़ी

मित्रो,





पूरे  हिंदुस्तान मै केवल एक ही जिन्दा नेता है जो जिन्दा दिल है और हर चीज को मुनाफे मै बदल देता है ,जय  प्रकाश नारायण के आन्दोलन का मुनाफा कर बिहार का चीफ मिनिस्टर बना , जानवरों के चारे से मुनाफा कमा जब जेल जाने की बरी आयी तो पत्नी राबड़ी को चीफ मिनिस्टर बना दिया ,रेल मंत्री बना तो रेल मै मुनाफा| बहुत दिन जुगाड़ किया कि फिर मंत्रालय मिल जाये नहीं मिला तो खाली  पार्लिअमेन्ट  कि मेम्बरी मै मुनाफा |महीने के   ` १६०००  मिलते   थे, महंगाई बढ़ गई  इसलिए पगार बढ़ाने कि मांग की, इस बात मै कश्मीर से  कन्या कुमारी तक  के सारे माननीय एक थे ,सबने राष्ट्रीय  एकता का परिचय दिया और ऐसा प्रेशर बना की प्रणव दादा जिनका पर्याय वाची गुस्सा है ,खुशी  - खुशी     `८०,००० पर राजी हो गए,और हो भी  क्यों न आखिर उनका भी तो मुनाफा है | वो  दादा जो पेट्रोल की सब्सिडी ख़तम करने के विरोध मै जाने कितने तर्क देते है ,वो दादा जो हर बार महंगाई  के खतम होने की तारीख हर बार अप्रैल  में  दिसम्बर और दिसम्बर में  अप्रैल बता कर काम चला लेते है ,और जरुरत पड़ने पर महगाई को आर्थिक विकास का लक्षण बताते है ,बिना किसी न नुकुर के पांच गुना वेतन बढ़ाना  स्वीकार कर लेते है | केवल इतना ही नहीं दूसरे लाभ भी लगभग दो गुने करने  मै भी  गुस्सा नहीं दिखाते क्योकि आखिर मौसेरे भाइओ का ख्याल तो रखना ही पड़ेगा ,चलो गुस्सा फिर कर लेंगे | अभी महंगाई कौन सी कम हुई जा रही है ,जब जनता टैक्स कम करने की बात करेगी तब कर लेंगे  गुस्सा | जब जनता कहेगी की राशन  सस्ता होना चाहिए तब गुस्सा कर लेंगे अभी तो मामला रिश्ते के मौसेरे भाइओ का है ,इन्हें तो पैसे  ज्यादा मिलने ही चाहिए कितनी महगाई बढ गयी है | फिर लालू ने धमका भी दिया की जो लोग पगार बढ़ने का विरोध कर रहे है उनके खाते स्वित्ज़रलैंड मै है तो अब कौन पंगा ले ,सो प्रणव बाबू को भी इसी मै भलाई नजर आई की  स्वित्ज़रलैंड की बात चली तो फिर दूर तलक जाएगी पता नहीं  कौन सा भाई चपेटे मै आ जाये फिर देते रहो सफाई  सो भैया प्रस्ताव लालू का और मर्जी दादा की, बात भी बन गई और मजा भी आगया ,आखिर हम भी तो बाल बच्चे  वाले है |इसको कहते है साँप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी |कांग्रेस का हाथ जनता के साथ और लालू की लालटेन बंगले में|

सवालो के लिए पैसा लेने वाले ,आधे दिन पार्लियामेंट में ना आने वाले ,आकर के ऊँघने वाले ,अपनी कुर्सी जाते देख अपनों को बैठाने वाले ,एक बार चुने जाने के बाद बरसो अपने चुनाव क्षेत्र  में ना जाने वाले ,मंत्री बन ने के बाद आरोप लगे तो अंडर ग्राउंड हो जाने वाले ,मेम्बरों   के चिल्लाने के बाद भी सदन में ना आने वाले,देश हित की किसी भी बात पर एक न होने वाले ऐसे माननियो ने ऐसी एकता दिखाई की लोगो को इस से सबक लेना पड़ेगा की  "उंगलिया पांचो चाहे एक जैसी न भी हो तो भी ,जब  खाने की बात आती है तो पांचो एक हो जाती है| " अब इस गरीब देश  का हर मेम्बर औसतन  `३७ लाख हर साल पायेगा,बाकी सुविधाए अलग से , जो की MP's Pay VS Per capita GDP ६८ गुना होगी | यानि भारत के  औसत आदमी कि आए से ६८ गुना ज्यादा | ताकि गरीब देश के मान नीयो   को गरीबी  का एहसास न हो |

मुनाफे की बात केवल यही ख़तम नहीं हुई  आखिर बिहार का चुनाव आगया है ,सो उठा दी  मदरसे के मौलानाओ को सरकारी खंजाने से पगार दिलाने की बात,मंजूर हो गई तो मैंने  दिला दी, इसलिए  मैं  तुम्हारा  दोस्त नहीं मंजूर हुए तो कांग्रेस तुम्हारी दुश्मन इसलिए मैं तुम्हारा दोस्त|  वाह भाई वाह मैं तो कहता हूँ हिन्दोस्तान के तमाम नेताओ में केवल लालू ही ऐसे नेता है जिनकी खोपड़ी से भेजा  निकल कर मुजिएम   में रखा जाना चाहिए ताकि अर्थशाश्त्र और बिजनेस  मैनेजमेंट दोनों के विद्यार्थी मुनाफा कमाने की तरकीबे सीख सके और राजनीत शाश्त्र के विद्यार्थी राजनीत की|आखिर ऐसे ही थोड़ी IIM अहमदाबाद और हॉवर्ड के कालिजो ने लेक्चर देने को  बुलाया था |इतना प्रतिभावान व्यक्ति फिर कहा मिलेगा ,जो आम ,गुठली और छिलका तीनो का दाम लगा मुनाफा कमा सके |

बात यही ख़तम नहीं हुई ,लालू ने तो उप प्रधान मंत्री बन ने का उपक्रम(In mock session ) कर के आने वाले समय के लिये अपनी तैयारी   कि झलक भी दे दी है ,इस लिए  हे प्रधान मंत्री पद कि दौड़  में लगे हुए मान नियो समय कि आवाज सुनिए ऐसा न हो कि आप लाइन में लगे रहे और यादव द्वये (मुलायम और लालू) और पासवान जी कुर्सी ले उड़े |तो पहले तो साँप मर गया बिना लाठी तोड़े और बाद में पता चले कि साँप निकल गया और आप लकीर पीट रहे हो |

अतेव कांग्रेस के दादा और दादियो   लालू के टैलेंट का उपयोग अपने लाभ के लिए कर ले ,नहीं तो राबड़ी मुख्य मंत्री  और लालू प्रधान मंत्री  और कैबिनेट में  ९ बच्चे और ९ बहुए बाकि कुर्सी सालो को|और फिर मुलायम के रिश्तेदार भी तो है ,इतने से काम चला लेंगे |ठीक ही है "चेरिटी बिगेन एट  होम"|आखिर  इतनी महंगाई में ज्यादा मंत्रियो कि क्या जरुरत है , हमारी भी तो जवाब देही है जनता के लिए ,हम समाजवादी नेता है तो समाज का ही खायेंगे न |अब ये तो ठीक नहीं है काम करे समाज का और खाए घर जा के |
अब इस देश को गुरु बन ने से कोई नहीं रोक सकता जहाँ का भैस चरने वाला  भी हॉवर्ड में पढ़ा सकता  है ,तो फिर पढ़े लिखे कि क्या बात है | फिर भी एक भ्रम है -
हमने किया गुनाह तो दोजख हमें मिला ,दोजख का क्या गुनाह जो उसको  को हम मिले  |
अब कोई बता सके तो बता दे|
"Ajay Ekal"

  

Sunday, August 15, 2010

Go for Wealth

Hi,
Common Wealth Game may mean different to different people, to me it is a game, which makes it easy to loot the wealth of  common men of the country and leave them to hue and cry. I have seen the the monkey doing "Kalamandi" since my child hood but "Kalamandi" of human being has been experienced by me and other fellow country men first time in the history of India.
I must congratulate "Suresh" for raising the standard of  corruption in the country.This may be a good case study to many  management students to do the research as till the 1980 the bribe and charging over the market price in government supply was limited to 40-50% ,which further rose up to 100-200% in the next decade.Now precedence shall be available for no such bar,now it shall be simply based on the convenience  of giver and taker, the rent could be even more than the cost . So stop talking the standard or bar let there be "sky is the limit".
There has been absolutely no discussion how is the preparation of  players going on and what are the prospects ,this has become simply irrelevant .Khel Mantri  Gill to Chief Minister Sheila Dixit including her  M.P.son Sandeep all are busy making money quickly ,only those who are left behind are making some noise they are mainly from other parties and singing the chorus"कारवा गुजर गया गुबार देखते रहे ".Many other who are not part of it and really willing
to see the thing going right are feeling help less  and repeating    the old slogan "कानून अपना काम करेगा "

May I ask the Government of India  why law has failed to prosecute the people indulged in misuse of public money to name a few one can recall the case of "Hasan Ali " a stud farm owner  having dues of 25000 Cr or RS Nagarwala or politician "Sukhram" there could be long list but in past 50 years there is hardly any one got punishment ,this is the possibly fate of  "Common Wealth Loot" also ,do what ever you like and if need by leave the country like many Kalamandi and their team.

This recalls me a famous quote of Shahid Bhagat Singh who once said "it is easy to protest to English men's act and deed but how will identify the "काले अंग्रेज "who are sitting among us and I found him absolutely  correct.
"हैलट साही मा हेईट दीन अब  गाँधी कैप लगाइत  है, हम तब बो  लूट के खावा है औ अब्बो लुटित खाइते है "

Happy Independence Day .
               
अजय एकल 
Posted by "Ajay Singh"

Sunday, July 11, 2010

फिर फंसा अर्जुन बेचारा

दिल खुश  है आज, मस्जिद को वीरा देख कर ,
मेरी तरह खुदा का भी, खाना ख़राब है 








बात के पुरानी हो जाने से उसकी महत्ता कम नहीं होती ,न कहानी कि सीख बदलती है |



 वर्ष २००७ में विदर्भ के किसानो को  आत्महत्या करते देख हमारे प्रधान मंत्री जी का दिल भर आया और उन्होंने प्रधानमंत्री राहत कोष ( जो कि जनता के द्वारा दिए हुए  दान के पैसे से बनता है) से  पैसे उनकी हालत ठीक करने  के लिए दिए ,टीवी ,अखबारों में खबर छपी ,खूब वाह  वाही हुई | और फिर जब  चेक बैंक में गई कैश होने तो पता लगा कि अकाउंट में पैसे  नही है | जिस अधिकारी ने चेक साइन कि उसकी पदोन्नति हो गई और वह कृषि सचिव बन गए | और हो भी क्यों न आखिर उन्होंने किसानो को राहत जो दिलवा दी ,सरकार का नाम भी करवा दिया अखबारों में छपी खबरे गवाह है  वो भी बिना पैसे खर्च किये हुए | अब वो कोई आम आदमी तो है नहीं कि चेक बोउंस का मुकदमा चले सेक्सन १३८ में ,आम आदमी न रहे इसी लिए तो भर्ती     हुए थे सरकारी  महकमे में |



अब सरकार चलाना  कोई बच्चो का खेल तो नहीं है ,बहुत तरह के खेल खेलें पड़ते है ,दिन को रात और रात को दिन बनाना पड़ता है ,केवल बनाना ही नहीं सिद्ध भी करना पड़ता है | दुनिया के पांचवे सबसे बड़े  नए हवाई टर्मिनल टी ३ का दिल्ली में उदघाटन प्रधान मंत्री जी ने ३ जुलाई को कर दिया ,हवाई मंत्री प्रफुल पटेल खुद गाड़ी चला कर ले गये और बताया गया कि १४ जुलाई २०१० को पहला जहाज लैंड करेगा | एक दिन बाद पता चला  कि अभी केवल जहाज आयेगा और जायेगा, बाकी   सुविधाए थोड़े दिन बाद मिलेंगी | फिर खबर आई कि अभी और टाइम लगेगा अभी जहाज लैंड  करने कि  भी पूरी तेयारी नहीं है|

सोचा कि कोई कारण  होगा जल्दी उदघाटन करने का , आखिर बिना कारण तो हो नहीं सकता कि देश का प्रधान मंत्री झूठ बोले और देश को बिन  वजह  गुमराह करे ,तो पता चला कि कम्पनी कि  टेंडर शर्तो में एक थी समय पर काम पूरा करने कि ,तो कंपनी ने  शर्त के मुताबिक टर्मिनल हैण्ड ओवर टाइम से कर दिया बाकी सरकार जाने | आखिर सरकार का काम करने और सरकारी लोगो से दोस्ती का यही फायदा है  वर्ना बाकी  तो सब नुकसान ही  है | होली, दिवाली पहुचाओ ,जायज न जायज मांगे मानो,मुफ्त में खाना खिलायो ,देश विदेश घुमाओ इन के बदले अगर थोडा बहुत फायदा न उठाओ तो फिर ये सब करने कि क्या जर्रूरत है , और फिर मंत्री  जी को भी तो एहसान उतारने का मौका मिलना चाहिए ,अब इतनी एहसान फरामोसी भी तो ठीक नहीं  कि जो सालो से सेवा कर रहा है उसके लिए छोटा सा झूठ भी न बोल सके|सरकार चलाना कोई  बच्चो का खेल नहीं बहुत तरह के खेल खेलने पड़ते है |

लोग कहते है कि नाम में क्या रखा है ,मै सोचता हूँ कि नाम का बड़ा प्रभाव है | द्वापर में भी एक अर्जुन थे कुरुक्षेत्र में पहुच कर शंका में  पड़ गए ,युद्ध करू कि ना करू ,श्रीकृष्ण जी ने समाधान में पूरी गीता सुना डाली और कहा तू कुछ नहीं करता है, करता तो मै हूँ ,बात पुरानी है लेकिन है पते कि | 
कलयुग में एक बार फिर अर्जुन शंका में पड़ गया कि वारेन अन्डरसन को जाने दू कि न जाने दू ,अर्रेस्ट भी कर लिया तभी श्रीकृष्ण कि गीता याद आ गई तो लगा कि मै भी कहा कुछ कर रहा हू,मै तो केवल केंद्र के  निर्देश का पालन कर रहा हू,  मगर अर्जुन भूल गया कि कलयुग के कृष्ण बहुरूपीऐ है और ये बाद मै सब कुछ तुम्हारे ऊपर ही लाद देंगे | मगर गलती केंद्र के बहुरुपेओं से भी हो गई है ,अब अर्जुन ने कहा है कि मै अपनी गीता खुद लिखूंगा आत्म  कथा के रूप में| इससे दोहरा फायदा होगा आत्म कथा  के पैसे मिलेंगे बाकी जिन्दगी (अगर आत्म कथा में राजीव गाँधी का नाम खोलने के बाद बची तो) चैन  से गुजारने  के लिए  और नहीं बची तो कम से कम दूसरा अर्जुन तो नहीं फसेंगा श्री कृष्ण के चक्कर में | अतः जब  सब कुछ बताना  ही है तो पैसे तो कमाने का जुगाड़ कर लो ,ये थोड़ी कि तुम तो  टी आर  पी बढाओ मुझे बदनाम कर के ,वो सरकार बचाए मुझे फंसा कर के  और मै द्वापर से कलयुग  तक  बेचारा बना रहू | मै ये नहीं होने दूंगा किसी दूसरे अर्जुन को नही फसने दूंगा , आखिर नाम को तो बदनाम होने से बचाना ही है |

अजय सिंह "एकल"